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कांकाणी GSS बना पश्चिमी राजस्थान का पावर हब, 765 KVअपग्रेडेशन को मंजूरी

कांकाणी GSS बना पश्चिमी राजस्थान का पावर हब, 765 KVअपग्रेडेशन को मंजूरी

राजस्थान के जोधपुर जिले के निकट स्थित कांकाणी ग्रिड सब स्टेशन तेजी से पश्चिमी राजस्थान की बिजली व्यवस्था का एक मजबूत और रणनीतिक केंद्र बनकर उभर रहा है। अत्याधुनिक तकनीक और उच्च क्षमता से लैस यह ग्रिड सब स्टेशन न केवल क्षेत्र में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि भविष्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

वर्तमान में इस ग्रिड सब स्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 815 एमवीए है, जिसमें 500 एमवीए और 315 एमवीए के दो पावर ट्रांसफॉर्मर कार्यरत हैं। इन ट्रांसफॉर्मरों के माध्यम से क्षेत्र में बिजली का संतुलित वितरण किया जा रहा है, जिससे जोधपुर सहित आसपास के जिलों में बिजली आपूर्ति सुचारु बनी हुई है। यह सब स्टेशन पश्चिमी राजस्थान के उन चुनिंदा प्रमुख ऊर्जा केंद्रों में शामिल हो चुका है, जो लगातार बढ़ती मांग के बीच भी विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं।

भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कांकाणी ग्रिड सब स्टेशन को 765 केवी स्तर तक अपग्रेड करने की स्वीकृति मिल चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत यहां 765/400 केवी क्षमता के दो नए पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 500 एमवीए होगी। यह अपग्रेडेशन न केवल ग्रिड की क्षमता में बड़ा इजाफा करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की ट्रांसमिशन प्रणाली को अधिक मजबूत और स्थिर बनाएगा।

इस योजना के अंतर्गत नई ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण भी प्रस्तावित है। जयपुर के फागी क्षेत्र से कांकाणी तक लगभग 350 किलोमीटर लंबी 765 केवी लाइन बिछाई जाएगी, जबकि जैसलमेर से भी कांकाणी को जोड़ने के लिए एक और हाई वोल्टेज लाइन विकसित की जाएगी। इन नई लाइनों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के बीच बिजली का आदान-प्रदान अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा, जिससे लोड मैनेजमेंट में सुधार होगा और आपूर्ति बाधित होने की संभावना कम हो जाएगी।

कांकाणी जीएसएस की एक बड़ी विशेषता इसकी मजबूत तकनीकी संरचना और सुरक्षा व्यवस्था है। यहां 80 एमवीएआर का बस रिएक्टर और दो 50 एमवीएआर के लाइन रिएक्टर स्थापित किए गए हैं, जो वोल्टेज नियंत्रण और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा इस सब स्टेशन से 400 केवी की छह और 220 केवी की छह ट्रांसमिशन लाइनें संचालित होती हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने का कार्य करती हैं।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इस ग्रिड सब स्टेशन को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। यहां दो लाख लीटर क्षमता वाला उन्नत अग्निशमन सिस्टम स्थापित किया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। इससे न केवल उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि कर्मचारियों और आसपास के क्षेत्र की भी सुरक्षा मजबूत होती है।

यह जोधपुर का दूसरा 400 केवी ग्रिड सब स्टेशन है, जो सुरपुरा जीएसएस से डबल सर्किट ईएचवी लाइनों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। इस कनेक्टिविटी के कारण जोधपुर, पाली और यहां तक कि राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली तक बिजली आपूर्ति में बेहतर संतुलन देखने को मिला है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कांकाणी जीएसएस केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर भी ऊर्जा आपूर्ति की महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है।

वर्तमान में इस ग्रिड सब स्टेशन के विस्तार कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। एक अतिरिक्त 500 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किया जा रहा है, जिसे जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इस पहल से क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उद्योगों के लिए निरंतर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति अत्यंत आवश्यक होती है।

इस पूरे सिस्टम का संचालन आधुनिक स्काडा प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है, जो रियल टाइम मॉनिटरिंग और नियंत्रण की सुविधा प्रदान करती है। इससे ग्रिड की कार्यक्षमता बढ़ती है और किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान संभव हो पाता है। वर्तमान में इस सब स्टेशन का क्षेत्रफल लगभग 140 बीघा है, जबकि भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखते हुए 155 बीघा अतिरिक्त क्षेत्र में नए यार्ड के निर्माण की योजना बनाई गई है।

प्रशासनिक स्तर पर भी इस परियोजना को कुशलता से संचालित किया जा रहा है। यहां अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंताओं, कनिष्ठ अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों की एक सक्षम टीम कार्यरत है, जो पूरे सिस्टम की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही है।

अधीक्षण अभियंता M K Soni के अनुसार, कांकाणी जीएसएस का 765 केवी स्तर तक अपग्रेडेशन पश्चिमी राजस्थान की बिजली व्यवस्था को नई मजबूती देगा। इससे न केवल बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी, बल्कि भविष्य में बढ़ती मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

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