राजस्थान में आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और 1 मई से इसका पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान से पहले राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों से सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से लोगों को संदेश देते हुए कहा कि सही और सटीक जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, क्योंकि यही आंकड़े भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं की आधारशिला बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के साथ स्व-गणना के लिए एक आधिकारिक ऑनलाइन लिंक भी साझा किया है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी जनगणना स्वयं कर सकते हैं। यह व्यवस्था इस बार की जनगणना को पहले से अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 मई से 15 मई 2026 तक लोग स्वयं अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं, जबकि इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर मकानों और परिवारों की गणना का कार्य पूरा करेंगे।
इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि देश में पहली बार नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का अवसर दिया जा रहा है। इससे न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि समय की भी बचत होगी। यदि कोई व्यक्ति पहले से अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर देता है, तो जब कर्मचारी उसके घर पहुंचेंगे, तब उन्हें केवल सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इससे कागजी औपचारिकताओं में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और पूरी प्रक्रिया अधिक सुगम बन सकेगी।
हालांकि, इस डिजिटल सुविधा के साथ कुछ सावधानियां बरतना भी आवश्यक है। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि जनगणना के नाम पर साइबर ठगी की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इसलिए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जनगणना कर्मचारी केवल मोबाइल नंबर और ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान प्राप्त एसई आईडी की जानकारी ही मांगेंगे। किसी भी स्थिति में वे ओटीपी नहीं मांगेंगे। यदि कोई व्यक्ति ओटीपी मांगता है, तो उसे धोखाधड़ी का प्रयास समझना चाहिए और ऐसी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
जनगणना के पहले चरण में कर्मचारियों द्वारा कुल 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे, जो मुख्य रूप से मकान की स्थिति और उसमें उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े होंगे। इन सवालों के माध्यम से यह जानकारी जुटाई जाएगी कि घर की संरचना किस प्रकार की है, परिवार का मुखिया कौन है, सामाजिक श्रेणी क्या है और परिवार के पास कितने संसाधन उपलब्ध हैं। इसके अलावा पानी, बिजली, शौचालय, रसोई और ईंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए घर में उपलब्ध डिजिटल और परिवहन सुविधाओं जैसे इंटरनेट, स्मार्टफोन, वाहन आदि के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।
इस व्यापक अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को तैनात किया गया है। लगभग एक लाख साठ हजार कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया गया है, जिनमें सबसे अधिक संख्या शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की है। इस कारण से लंबे समय से अपने तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है, क्योंकि जनगणना कार्य के चलते उनके ट्रांसफर पर फिलहाल विराम लगने की संभावना है।
जनगणना निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार, जो कर्मचारी इस पहले चरण में कार्य करेंगे, वही आगामी दूसरे चरण में भी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होने की संभावना है, जिसमें जनसंख्या से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। इस प्रकार यह प्रक्रिया एक दीर्घकालिक और बहुस्तरीय अभियान के रूप में संचालित की जाएगी।
जनगणना केवल आंकड़े जुटाने का कार्य नहीं है, बल्कि यह सरकार के लिए नीतिगत निर्णय लेने का आधार भी तैयार करती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं इन्हीं आंकड़ों पर आधारित होती हैं। इसलिए नागरिकों की भागीदारी और सही जानकारी देना बेहद महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि राजस्थान की अतिथि सत्कार की परंपरा को बनाए रखते हुए जब कर्मचारी घर-घर पहुंचे, तो उन्हें सहयोग दिया जाए और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह विश्वास जताया कि प्रदेशवासी इस जिम्मेदारी को समझते हुए इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


