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डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर बड़ा एक्शन, वॉट्सएप ने 9,400 अकाउंट बंद किए

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर बड़ा एक्शन, वॉट्सएप ने 9,400 अकाउंट बंद किए

देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर रोक लगाने के लिए वॉट्सएप ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 9,400 से अधिक संदिग्ध अकाउंट्स को बैन कर दिया है, जिनका इस्तेमाल भारतीय यूजर्स को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने के लिए किया जा रहा था। यह कार्रवाई जनवरी 2026 से शुरू हुए 12 हफ्तों के दौरान सरकारी एजेंसियों से मिले इनपुट और कंपनी की आंतरिक जांच के आधार पर की गई। इस मामले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी गई, जहां देशभर में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई चल रही है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम हाल के समय में साइबर अपराध का सबसे खतरनाक रूप बनकर सामने आया है। इसमें जालसाज खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अफसर, इनकम टैक्स अधिकारी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद वे पीड़ित को वीडियो कॉल पर घंटों रोके रखते हैं, फर्जी दस्तावेज दिखाते हैं और गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय पैदा कर बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी के माध्यम से बताया गया कि वॉट्सएप ने इन स्कैम अकाउंट्स पर कार्रवाई करते हुए बड़े नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास किया है। कोर्ट इस समय ऐसे मामलों को गंभीरता से देख रहा है, क्योंकि बीते महीनों में देश के कई हिस्सों से नागरिकों के करोड़ों रुपए ठगे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

वॉट्सएप की जांच में यह भी सामने आया है कि भारतीय यूजर्स को निशाना बनाने वाले कई संदिग्ध अकाउंट्स विदेशों से संचालित हो रहे थे। विशेष रूप से कंबोडिया जैसे देशों में बने स्कैम सेंटरों से यह नेटवर्क चलाया जा रहा था। वहां से संचालित ठग भारतीय नागरिकों को फोन, वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए निशाना बना रहे थे। यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे साइबर अपराध के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर संकेत मिलता है।

जालसाज भरोसा जीतने और डर पैदा करने के लिए अपनी प्रोफाइल फोटो और नाम में दिल्ली पुलिस, मुंबई हेडक्वार्टर, सीबीआई, एटीएस या अन्य सरकारी विभागों के नाम और प्रतीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। आम यूजर जब ऐसे नाम और लोगो देखता है तो वह अक्सर उन्हें असली मान लेता है। इसी मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर ठग लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

वॉट्सएप ने स्पष्ट किया है कि कंपनी केवल शिकायत मिलने के बाद अकाउंट बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे आपराधिक नेटवर्क को पहचानने और खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। सरकारी एजेंसियों ने जहां लगभग 3,800 अकाउंट्स की जानकारी साझा की थी, वहीं कंपनी ने अपनी तकनीकी जांच के आधार पर उनसे जुड़े हजारों अन्य अकाउंट्स की पहचान कर कार्रवाई की। इससे साफ है कि अब साइबर फ्रॉड रोकने के लिए टेक कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए वॉट्सएप अब नए सुरक्षा फीचर्स भी शुरू कर रहा है। इनमें ऐसा सिस्टम शामिल होगा जो सरकारी विभाग बनकर धोखाधड़ी करने वालों की पहचान करेगा। यदि कोई अकाउंट फर्जी तरीके से किसी विभाग का नाम या लोगो इस्तेमाल करता है तो उसे चिन्हित किया जा सकेगा। इससे आम यूजर्स को फर्जी पहचान वाले अकाउंट्स से बचाने में मदद मिलेगी।

कंपनी पहली बार किसी अनजान नंबर से मैसेज आने पर यूजर को चेतावनी भी दिखाएगी। इससे लोग सतर्क रहेंगे और तुरंत भरोसा नहीं करेंगे। इसके अलावा यूजर्स यह भी देख सकेंगे कि सामने वाला अकाउंट कितना पुराना है। नया बना हुआ अकाउंट यदि खुद को सरकारी अधिकारी बताता है तो उस पर संदेह करना आसान होगा।

वॉट्सएप ने बताया कि बदलते साइबर स्कैम पैटर्न को समझने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लार्ज लैंग्वेज मॉडल का इस्तेमाल भी किया जाएगा। यह तकनीक संदिग्ध व्यवहार, धोखाधड़ी वाले मैसेज पैटर्न और नकली पहचान को पहचानने में मदद करेगी। भविष्य में साइबर अपराधियों की नई रणनीतियों से निपटने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह मामला अक्टूबर 2025 में तब गंभीर रूप से चर्चा में आया, जब एक बुजुर्ग दंपत्ति ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर अपने साथ हुई ठगी की जानकारी दी। दंपत्ति को कथित सीबीआई और आईबी अधिकारी बनकर ठगों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए डराया था। उन्हें फर्जी अदालत आदेश दिखाए गए और कहा गया कि वे गंभीर मामले में फंस चुके हैं। डर के माहौल में उनसे लगभग ₹1.5 करोड़ ठग लिए गए। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में बढ़ते ऐसे मामलों पर केंद्र सरकार और एजेंसियों से जवाब मांगा था।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अपराधी सबसे पहले यह दावा करते हैं कि पीड़ित के नाम से कोई गैरकानूनी पार्सल पकड़ा गया है या वह किसी मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या बैंकिंग केस में शामिल है। इसके बाद वे वीडियो कॉल कर कहते हैं कि जांच पूरी होने तक कैमरे के सामने बैठे रहना होगा। कई लोग डर, शर्म और सामाजिक बदनामी के कारण उनकी बात मान लेते हैं। इसी दौरान ठग उनसे बैंक विवरण लेकर पैसा ट्रांसफर करा लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी या अदालत किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती। किसी भी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया औपचारिक और लिखित होती है। यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर डराकर पैसे मांगे, तो तुरंत कॉल काटनी चाहिए और स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

वॉट्सएप द्वारा 9,400 अकाउंट्स बंद करना साइबर सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन इससे यह संदेश जरूर गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपना रहे हैं। आने वाले समय में तकनीक, जागरूकता और कानूनी कार्रवाई के संयुक्त प्रयास से ही इस तरह के स्कैम पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

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