देश की प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में शामिल बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी ने जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में ₹5,465 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के ₹4,480 करोड़ की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के नतीजे बाजार की उम्मीदों के लगभग अनुरूप रहे हैं। अच्छे तिमाही परिणामों के साथ कंपनी ने निवेशकों के लिए डिविडेंड की घोषणा की है, वहीं बोर्ड स्तर पर एक अहम बदलाव की जानकारी भी दी गई है। कंपनी ने बताया है कि राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा देंगे।
बजाज फाइनेंस के मजबूत नतीजों के पीछे कई प्रमुख कारण रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में सबसे बड़ी भूमिका बैड लोन यानी फंसे हुए कर्ज के लिए किए जाने वाले प्रावधानों में कमी ने निभाई है। वित्तीय संस्थान भविष्य में संभावित नुकसान को देखते हुए अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अलग रखते हैं, जिसे प्रोविजनिंग कहा जाता है। इस तिमाही में कंपनी का कुल प्रोविजन कम हुआ, जिससे लाभप्रदता बेहतर रही और नेट प्रॉफिट में तेज वृद्धि देखने को मिली।
कंपनी का कुल राजस्व भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। चौथी तिमाही में बजाज फाइनेंस का रेवेन्यू 18 प्रतिशत बढ़कर ₹21,606 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹18,294 करोड़ था। इसका मतलब है कि कंपनी के व्यवसाय में विस्तार जारी है और ऋण वितरण के साथ अन्य आय स्रोतों में भी मजबूती बनी हुई है। विश्लेषकों ने इस तिमाही में लगभग ₹5,490 करोड़ के मुनाफे का अनुमान लगाया था, ऐसे में घोषित परिणाम बाजार अपेक्षाओं के काफी करीब रहे।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि राजीव बजाज बोर्ड से हटने की इच्छा जता चुके हैं। वे आगामी वार्षिक आम बैठक में दोबारा नियुक्ति के लिए स्वयं को प्रस्तुत नहीं करेंगे। ऐसे में 30 जुलाई 2026 को होने वाली वार्षिक आम बैठक के बाद वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद से हट जाएंगे। कंपनी के बोर्ड ने उनके लंबे योगदान और नेतृत्व की सराहना की है। यह बदलाव कॉर्पोरेट स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राजीव बजाज लंबे समय से समूह से जुड़े रहे हैं और रणनीतिक निर्णयों में उनकी अहम भूमिका रही है।
अच्छे नतीजों के साथ कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड की घोषणा भी की है। इस राशि में ₹0.60 प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड शामिल है। कंपनी ने बताया कि यह अतिरिक्त लाभांश बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयरों की बिक्री से हुए लाभ के आधार पर दिया जा रहा है। कंपनियां जब सामान्य लाभांश के अलावा अतिरिक्त लाभ वितरित करती हैं, तो उसे स्पेशल डिविडेंड कहा जाता है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 30 जून 2026 तय की गई है। रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है, जिस दिन तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में शेयरधारक के रूप में दर्ज होंगे, वे लाभांश पाने के पात्र होंगे।
बजाज फाइनेंस की लोन बुक यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का एयूएम 21 प्रतिशत बढ़कर ₹3,72,986 करोड़ हो गया। एक वर्ष पहले यही आंकड़ा ₹3,08,832 करोड़ था। एयूएम किसी वित्तीय कंपनी के पास मौजूद कुल ऋण और प्रबंधित परिसंपत्तियों की वैल्यू को दर्शाता है। इसमें वृद्धि का मतलब है कि कंपनी का ऋण व्यवसाय लगातार फैल रहा है और बाजार में उसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।
कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से होने वाली शुद्ध आय भी बेहतर रही। यह आंकड़ा 20 प्रतिशत बढ़कर ₹10,716 करोड़ पर पहुंच गया। नेट इंटरेस्ट इनकम किसी वित्तीय संस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेतक होता है, क्योंकि यह बताता है कि कंपनी उधार दिए गए पैसे पर कितना कमा रही है और उधार लेने की लागत घटाने के बाद वास्तविक आय कितनी बच रही है।
एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी बजाज फाइनेंस ने सुधार दर्ज किया है। कंपनी का ग्रॉस एनपीए 0.29 प्रतिशत से घटकर 0.27 प्रतिशत पर आ गया है। वहीं नेट एनपीए 0.11 प्रतिशत पर स्थिर रहा। एनपीए का अर्थ उन ऋणों से है जिनकी किश्तें समय पर नहीं चुकाई जा रही हैं। कम एनपीए का मतलब है कि कंपनी की वसूली व्यवस्था बेहतर है और ग्राहकों की भुगतान क्षमता अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
हालांकि कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई सेगमेंट में बढ़ते बैड लोन की चुनौती बनी हुई थी। इसके बावजूद इस तिमाही में कुल प्रावधान ₹2,167 करोड़ से घटकर ₹2,008 करोड़ रह गया। यह कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत है। साथ ही भविष्य के आर्थिक जोखिमों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने ₹142 करोड़ का अतिरिक्त क्रेडिट लॉस प्रावधान भी रखा है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रबंधन केवल मौजूदा लाभ पर नहीं, बल्कि भविष्य की अनिश्चितताओं पर भी नजर बनाए हुए है।
बजाज फाइनेंस के नतीजे यह दर्शाते हैं कि कंपनी ने विकास और जोखिम प्रबंधन के बीच संतुलन बनाए रखा है। मजबूत ऋण वृद्धि, नियंत्रित एनपीए, बढ़ती आय और निवेशकों को आकर्षक डिविडेंड कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत संकेत देते हैं। ऐसे समय में जब वित्तीय क्षेत्र प्रतिस्पर्धा और ब्याज दरों की चुनौतियों से गुजर रहा है, बजाज फाइनेंस का प्रदर्शन निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर सकता है।
आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपनी ग्रोथ रफ्तार को किस तरह बनाए रखती है, एमएसएमई पोर्टफोलियो की चुनौतियों से कैसे निपटती है और नेतृत्व परिवर्तन के बाद प्रबंधन किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल चौथी तिमाही के परिणाम कंपनी के लिए उत्साहजनक माने जा रहे हैं।


