राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच स्कूलों की छुट्टियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश में एक ओर शिक्षक संगठन सरकार के नए शैक्षणिक कैलेंडर से नाराज हैं, वहीं दूसरी ओर अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। दोनों पक्षों की मांग है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश को बढ़ाया जाए, लेकिन अब तक इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है। दरअसल, राज्य में तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई जिलों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे में स्कूलों का संचालन जारी रहने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण अभिभावक और शिक्षक दोनों ही इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहे हैं।
राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रनजीत मीणा ने इस मामले में सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से 7 अप्रैल को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जिला कलेक्टर के माध्यम से शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया था। इस ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई थी कि ग्रीष्मकालीन अवकाश को 17 मई से 30 जून तक किया जाए, ताकि भीषण गर्मी के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों को राहत मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले की तरह संस्था प्रधान द्वारा घोषित किए जाने वाले अतिरिक्त अवकाश की संख्या को भी दो ही रखा जाए। संगठन का तर्क है कि नए कैलेंडर में छुट्टियों में कटौती की गई है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ा है। अब 30 अप्रैल तक का समय सरकार को दिया गया था, लेकिन इस अवधि में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर फैसला नहीं हुआ, तो प्रदेशभर के शिक्षक एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों की चिंता भी इस मुद्दे को और गंभीर बना रही है। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि जब कॉलेजों में गर्मी को देखते हुए अवकाश घोषित किया जा सकता है, तो स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए ऐसा निर्णय क्यों नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों पर गर्मी का प्रभाव अधिक पड़ता है, जिससे उनकी सेहत पर खतरा बढ़ सकता है।
अभिभावकों का मानना है कि बच्चों का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है और यदि वे स्वस्थ रहेंगे तभी उनकी पढ़ाई भी सुचारु रूप से हो सकेगी। इसलिए सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो अभिभावक भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच शिक्षा विभाग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर शिक्षकों का विरोध और दूसरी ओर अभिभावकों की चिंता ने सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। राज्य के लाखों विद्यार्थी, उनके माता-पिता और शिक्षक अब इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर ग्रीष्मकालीन अवकाश कब से कब तक घोषित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे गर्म प्रदेश में मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक कैलेंडर तैयार किया जाना चाहिए। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते स्कूलों के समय और अवकाश की अवधि में लचीलापन जरूरी हो गया है। यदि समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका असर न केवल छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट है कि यह विवाद केवल छुट्टियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा बन चुका है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो गया है कि वह सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक निर्णय ले।
आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा। यदि सरकार शिक्षकों और अभिभावकों की मांगों को स्वीकार करती है, तो इससे तनाव कम हो सकता है, वहीं अगर मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो प्रदेश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेगा कि राजस्थान में इस बार गर्मी की छुट्टियां किस अवधि तक रहेंगी।


