देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बीच अब एक नई तकनीक को परीक्षा सुरक्षा के बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है। गुजरात के युवा उद्यमियों द्वारा विकसित किया गया एआई आधारित पेटेंटेड ‘जीरो टच सिस्टम’ शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है। इस तकनीक का उद्देश्य प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग और वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, गोपनीय और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाना है। दावा किया जा रहा है कि यह सिस्टम प्रतियोगी परीक्षाओं, यूनिवर्सिटी एग्जाम, स्कूल परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक की घटनाओं को काफी हद तक रोक सकता है।
इस नई तकनीक को जयपुर के रेडिसन ब्लू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया। कार्यक्रम में ‘जीरो टच सिस्टम’ के फाउंडर भावेश कुमार ने इस तकनीक की कार्यप्रणाली और इसकी विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मशीन नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने वाला एक संपूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम है, जिसमें क्लाउड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन को एक साथ जोड़ा गया है।
भावेश कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में पेपर लीक देश की सबसे बड़ी शैक्षणिक चुनौतियों में से एक बन चुका है। कई भर्ती परीक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाएं लीक के कारण रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे लाखों छात्रों का समय और मेहनत प्रभावित हुई है। ऐसे में यह नई तकनीक परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके वितरण तक पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड रहती है। किसी भी स्तर पर मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती, जिससे गोपनीयता भंग होने की संभावना बेहद कम हो जाती है। सिस्टम के तहत किसी भी परीक्षा के लिए अधिकतम तीन शिक्षकों की टीम अपने-अपने प्रश्नपत्र एक सुरक्षित क्लाउड प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेगी। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित होगा।
इसके बाद एआई आधारित सिस्टम इन प्रश्नपत्रों को स्कैन करेगा और संभावित त्रुटियों की जांच करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह सुनिश्चित करेगा कि प्रक्रिया निष्पक्ष और सुरक्षित बनी रहे। परीक्षा से ठीक पहले सिस्टम तीनों प्रश्नपत्रों में से किसी एक का पूरी तरह रैंडम चयन करेगा। इस चयन प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति की भूमिका नहीं होगी, जिससे पेपर चयन को लेकर किसी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात की संभावना समाप्त हो जाएगी।
चयनित प्रश्नपत्र को परीक्षा शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले ‘जीरो टच मशीन’ द्वारा स्वतः प्रिंट किया जाएगा। मशीन केवल प्रिंटिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऑटो स्टेपलिंग और ब्लॉक वाइज पैकेजिंग का कार्य भी अपने आप करेगी। पूरी प्रक्रिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की निगरानी में होगी और इसमें किसी कर्मचारी को प्रश्नपत्र छूने या देखने की अनुमति नहीं होगी। यही कारण है कि इसे ‘जीरो टच’ नाम दिया गया है।
सिस्टम की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सुरक्षा व्यवस्था है। मशीन से निकलने वाले प्रश्नपत्र पूरी तरह सीलबंद पैकेट में होंगे। इन पैकेट्स को परीक्षा शुरू होने से केवल 10 मिनट पहले ही खोला जा सकेगा। एआई आधारित सुरक्षा प्रणाली समय और सील दोनों पर नजर रखेगी। यदि किसी प्रकार की छेड़छाड़ या समय से पहले पैकेट खोलने की कोशिश की जाती है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। इससे पेपर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो सकती है।
तकनीक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की प्रणालियां बड़े स्तर पर लागू होती हैं तो देश में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता काफी मजबूत हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के कारण सरकारों और परीक्षा एजेंसियों की साख प्रभावित हुई है। लाखों छात्रों को बार-बार परीक्षा देनी पड़ी और युवाओं में नाराजगी भी बढ़ी। ऐसे माहौल में ‘जीरो टच सिस्टम’ को एक स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
भावेश कुमार ने बताया कि इस तकनीक को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल चुका है। उन्होंने कहा कि कंपनी वर्तमान में मध्यप्रदेश और गुजरात सरकार के शिक्षा विभागों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके अलावा 50 से अधिक सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को कंपनी पहले ही ईआरपी और परीक्षा समाधान उपलब्ध करा चुकी है। कंपनी केवल शिक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, कॉर्पोरेट और रिटेल सेक्टर के लिए भी एआई आधारित ईआरपी समाधान विकसित कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल और एआई आधारित तकनीकों की भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है। परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ऑटोमेशन और क्लाउड टेक्नोलॉजी का उपयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘जीरो टच सिस्टम’ इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो शिक्षा क्षेत्र में तकनीक के नए युग की शुरुआत कर सकता है।


