प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील अब राज्यों में भी असर दिखाने लगी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल ने शुक्रवार को खुद उदाहरण पेश करते हुए डीजल कार की जगह इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी कार में सफर किया। मुख्यमंत्री कार्यालय से जवाहर सर्किल स्थित एक निजी होटल तक उन्होंने इलेक्ट्रिक कार से यात्रा कर ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा बचत केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी बन चुकी है।
मुख्यमंत्री राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस समय ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय हालातों और बढ़ती वैश्विक अस्थिरता का असर ईंधन बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की एक-एक बूंद बचाने की अपील बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र प्रथम की भावना और आत्मनिर्भर भारत के विजन से जुड़ा हुआ है।
सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि यदि देश के 140 करोड़ नागरिक थोड़ी-थोड़ी भी ईंधन बचत करते हैं तो इसका सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और पेट्रोल-डीजल की बचत से लाखों बैरल तेल के आयात को कम किया जा सकता है। इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आर्थिक मजबूती बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा बचाना भी ऊर्जा उत्पादन के बराबर है और यह सोच अब जन आंदोलन का रूप लेनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि कई बार लोगों के पास संसाधन अधिक होते हैं तो उनका उपयोग भी जरूरत से ज्यादा होने लगता है। लेकिन वर्तमान समय में हर व्यक्ति को जिम्मेदारी समझते हुए संसाधनों का सीमित और सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक यात्राओं से बचना, निजी वाहनों का कम उपयोग करना और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ना समय की जरूरत है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान मिलेगा।
उन्होंने राजस्थान की जनता से अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के इस संदेश को केवल सरकारी अभियान न समझा जाए, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है और ऊर्जा संरक्षण को लेकर लगातार नई नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकारी विभागों में ऊर्जा बचत और वाहनों के सीमित उपयोग को लेकर और अधिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार केवल लोगों को सलाह देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि खुद उदाहरण पेश कर बदलाव की शुरुआत कर रही है। इसी सोच के तहत उन्होंने खुद डीजल वाहन छोड़कर ईवी कार में सफर किया। इसे सरकार की ऊर्जा संरक्षण नीति और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है। राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पहले से कई योजनाओं पर काम चल रहा है और सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ें।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने फिजूलखर्ची रोकने और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपने सुरक्षा काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम कर दी थी। आमतौर पर मुख्यमंत्री के काफिले में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड सहित 14 से 16 वाहन शामिल रहते थे, लेकिन प्रधानमंत्री की अपील के बाद जब मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे के लिए रवाना हुए तो उनके काफिले में केवल पांच गाड़ियां ही दिखाई दीं। इसे सरकार के भीतर एक बड़े बदलाव और संदेश के रूप में देखा गया।
मुख्यमंत्री ने केवल अपने स्तर पर बदलाव नहीं किया, बल्कि प्रदेश के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी वाहनों के सीमित उपयोग और ईंधन बचत के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर भी अनावश्यक खर्च और ईंधन की खपत कम की जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव समाज पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ईंधन संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी हो गया है। इलेक्ट्रिक वाहन इस दिशा में एक बड़ा विकल्प बनकर उभर रहे हैं। इससे प्रदूषण कम होगा, आयातित तेल पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।


