देश की प्रमुख निजी बिजली उत्पादन कंपनियों में शामिल अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹4,271 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह पिछले वर्ष की समान तिमाही के ₹2,599 करोड़ के मुकाबले 64 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के मुनाफे में यह तेज बढ़ोतरी ऐसे समय आई है जब बिजली मांग, खुले बाजार की कीमतों और ऊर्जा क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों को लेकर कई चुनौतियां बनी हुई थीं।
हालांकि कंपनी के नतीजे मजबूत रहे, लेकिन शेयर बाजार में निवेशकों की प्रतिक्रिया सीमित रही। बुधवार को अडाणी पावर का शेयर लगभग 2.48 प्रतिशत गिरकर ₹217.80 पर बंद हुआ। कई बार बाजार पहले से मजबूत नतीजों की उम्मीद कीमतों में शामिल कर लेता है, जिसके कारण अच्छे परिणाम आने के बावजूद शेयर दबाव में दिखाई देते हैं। इसके अलावा निवेशक भविष्य की मांग, कीमतों और नियामकीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखते हैं।
कंपनी के कुल राजस्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में अडाणी पावर का रिपोर्टेड रेवेन्यू 10 प्रतिशत बढ़कर ₹15,989 करोड़ पहुंच गया। पिछले वर्ष की तुलना में यह मजबूत वृद्धि मानी जा रही है। यदि पिछले अवधियों के कुछ समायोजन हटाए जाएं, तो कंपनी का कंटीन्यूइंग रेवेन्यू 3.7 प्रतिशत बढ़कर ₹15,059 करोड़ रहा। यह संकेत देता है कि मुख्य व्यवसाय से कंपनी की आय स्थिर रूप से बढ़ रही है।
कंपनी के मुनाफे में आई बड़ी छलांग की प्रमुख वजह टैक्स खर्च में भारी कमी रही। इस तिमाही में कंपनी का टैक्स भुगतान पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 83 प्रतिशत कम रहा है। टैक्स बोझ घटने से कंपनी की निचली पंक्ति यानी नेट प्रॉफिट में सीधा फायदा मिला। कई बार कर समायोजन, पूर्व प्रावधानों में बदलाव या विशेष कर लाभ के कारण ऐसी स्थिति बनती है, जिससे तिमाही मुनाफा मजबूत दिखता है।
अडाणी पावर का परिचालन प्रदर्शन भी बेहतर रहा है। कंपनी का रिपोर्टेड EBITDA, यानी ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले की आय, 27 प्रतिशत बढ़कर ₹6,498 करोड़ हो गया। EBITDA किसी भी कंपनी की परिचालन क्षमता और मूल व्यवसाय से होने वाली कमाई का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसमें वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी ने लागत नियंत्रण, उत्पादन दक्षता और बिक्री रणनीति पर बेहतर काम किया है।
यदि मुख्य व्यवसाय को देखें तो कंटीन्यूइंग EBITDA भी 9.3 प्रतिशत बढ़कर ₹5,573 करोड़ रहा। इसका मतलब है कि केवल अस्थायी लाभ या समायोजन ही नहीं, बल्कि कंपनी की वास्तविक परिचालन आय में भी मजबूती बनी हुई है। ऊर्जा क्षेत्र में ईंधन लागत, मांग और सरकारी नीतियों के बीच इस प्रकार की स्थिरता निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।
चौथी तिमाही के दौरान देशभर में बिजली मांग में मिश्रित रुझान देखने को मिला। कुल बिजली मांग 1.6 प्रतिशत बढ़कर 422 बिलियन यूनिट रही। तिमाही की शुरुआत में बेमौसम बारिश और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही। सौर और पवन ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ने से पारंपरिक थर्मल पावर कंपनियों पर कुछ दबाव देखने को मिला। हालांकि जैसे-जैसे तापमान बढ़ा, बिजली की मांग में सुधार आया और थर्मल पावर की आवश्यकता फिर मजबूत हुई।
कंपनी के लिए एक चुनौती मर्चेंट मार्केट से भी रही। खुले बाजार में बिजली कीमतों में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी के रियलाइजेशन पर असर पड़ा। मर्चेंट मार्केट वह व्यवस्था है जहां बिजली कंपनियां अल्पकालिक अनुबंधों या स्पॉट मार्केट में बिजली बेचती हैं। यहां कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर बदलती रहती हैं। कीमतों में गिरावट का सीधा असर प्रति यूनिट आय पर पड़ता है।
इन उतार-चढ़ावों से बचने के लिए अडाणी पावर ने लंबी अवधि के बिजली खरीद समझौतों पर अपना ध्यान बढ़ाया है। कंपनी ने महाराष्ट्र के साथ 1,600 मेगावाट और तमिलनाडु के साथ 558 मेगावाट के नए पावर परचेज एग्रीमेंट साइन किए हैं। ऐसे समझौते कंपनियों को स्थिर राजस्व और निश्चित मांग उपलब्ध कराते हैं, जिससे बाजार की अस्थिरता का प्रभाव कम होता है।
इन नए समझौतों के बाद कंपनी की कुल परिचालन क्षमता का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा लॉन्ग टर्म और मीडियम टर्म एग्रीमेंट के तहत सुरक्षित हो गया है। यह कंपनी के लिए बड़ी रणनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। जब किसी बिजली उत्पादक की अधिकतर क्षमता पहले से अनुबंधित होती है, तो उसे नकदी प्रवाह और राजस्व अनुमान लगाने में आसानी होती है।
कुल बिजली बिक्री मात्रा भी बढ़ी है। पिछले वर्ष की समान तिमाही में जहां कंपनी ने 26.4 बिलियन यूनिट बिजली बेची थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 27.2 बिलियन यूनिट पहुंच गया। बिक्री मात्रा में वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी के संयंत्रों का उपयोग स्तर बेहतर रहा और बाजार में उसकी मांग बनी हुई है।
अडाणी पावर के ताजा नतीजे यह दिखाते हैं कि कंपनी ने चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों में भी मुनाफा और परिचालन प्रदर्शन मजबूत रखा है। टैक्स खर्च में कमी ने लाभ को गति दी, जबकि EBITDA और बिक्री मात्रा ने मूल व्यवसाय की मजबूती साबित की है। साथ ही लंबी अवधि के समझौतों के जरिए कंपनी ने भविष्य के लिए स्थिर आय का आधार तैयार किया है।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर बिजली मांग, कोयला लागत, नवीकरणीय ऊर्जा की प्रतिस्पर्धा और नियामकीय नीतियों पर रहेगी। यदि गर्मी के मौसम में बिजली मांग तेज रहती है और कंपनी अपने लागत ढांचे को नियंत्रित रखती है, तो आगे भी प्रदर्शन मजबूत रह सकता है। फिलहाल चौथी तिमाही के नतीजों ने अडाणी पावर को ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख लाभदायक कंपनियों में फिर से मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है।


