राजस्थान के अजमेर स्थित MDSU के प्रशासनिक हलके में उस समय हड़कंप मच गया जब विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव सूरजमल राव के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर हैकर्स ने उनके परिचितों से पैसों की मांग शुरू कर दी। इस साइबर ठगी की कोशिश से विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और परिचितों के बीच अचानक हलचल पैदा हो गई।
जानकारी के अनुसार, शातिर साइबर अपराधियों ने सूरजमल राव के मोबाइल या सोशल मीडिया अकाउंट को निशाना बनाते हुए उनकी पहचान का दुरुपयोग किया। इसके बाद उन्होंने उनके संपर्क सूची में मौजूद लोगों को संदेश भेजकर ‘इमरजेंसी’ का हवाला देते हुए तत्काल पैसों की मांग करनी शुरू कर दी। इस घटना के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों में साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता देखने को मिली।
इमोशनल कार्ड खेलकर पैसे मांगने की कोशिश
मामले की जानकारी के अनुसार, हैकर्स ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से इस ठगी की कोशिश को अंजाम देने की कोशिश की। उन्होंने सूरजमल राव के नाम और फोटो का इस्तेमाल करते हुए या तो फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार की या फिर उनके मौजूदा अकाउंट में सेंध लगा दी। इसके बाद उन्होंने उनके संपर्क में मौजूद लोगों को निजी संदेश भेजना शुरू किया।
संदेश में बेहद भावनात्मक अंदाज में लिखा गया कि उन्हें तत्काल मदद की जरूरत है। मैसेज में कहा गया कि “कुछ हेल्प चाहिए, 40 हजार की अर्जेंट जरूरत है। मेरा यूपीआई नंबर काम नहीं कर रहा है, कल पक्का वापस कर दूंगा। प्लीज, फैमिली मेंबर का एक्सीडेंट केस है।” इस तरह का संदेश भेजकर लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश की गई।
हैकर्स ने अलग-अलग लोगों से अलग-अलग रकम की मांग की। किसी से 40 हजार रुपये तो किसी से 36 हजार रुपये तक भेजने के लिए कहा गया। भरोसा दिलाने के लिए एक मोबाइल नंबर भी साझा किया गया और यह निर्देश दिया गया कि रकम भेजने के बाद उसका स्क्रीनशॉट उसी नंबर पर भेजा जाए।
यूनिवर्सिटी ग्रुप में जानकारी साझा होने से खुला मामला
जब विश्वविद्यालय के कई कर्मचारियों और परिचितों के पास एक साथ इस तरह के संदेश पहुंचे तो उन्हें शक हुआ। कुछ जागरूक लोगों ने तुरंत इस बात को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में इसकी जानकारी साझा की।
ग्रुप में संदेश सामने आने के बाद मामला तेजी से स्पष्ट होने लगा। जैसे ही इस बारे में सूरजमल राव को जानकारी मिली, वे भी हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति से पैसे नहीं मांगे हैं और उनका अकाउंट हैक हो गया है।
इसके बाद व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सभी कर्मचारियों और परिचितों को सावधान रहने की सलाह दी गई। साथ ही यह भी कहा गया कि इस तरह के किसी भी संदेश के आधार पर किसी भी तरह का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन न किया जाए।
साइबर सेल में दर्ज कराई शिकायत
अपनी पहचान का दुरुपयोग होते देख सहायक कुलसचिव सूरजमल राव ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस और साइबर सेल को उन मोबाइल नंबरों और चैट के स्क्रीनशॉट भी उपलब्ध कराए जिनके माध्यम से लोगों को ठगने की कोशिश की जा रही थी।
साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं के बीच इस मामले को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस अब उन नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है जिनके जरिए यह ठगी करने की कोशिश की गई।
साइबर सुरक्षा को लेकर फिर बढ़ी चिंता
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं और लोग किस तरह नई-नई तरकीबों से ठगी का शिकार बनाए जा रहे हैं। अक्सर हैकर्स किसी परिचित व्यक्ति के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं और फिर उनसे पैसे मांगते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अचानक कोई परिचित व्यक्ति पैसों की मांग करे तो तुरंत पैसे भेजने के बजाय पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। इसके लिए सीधे फोन कॉल कर स्थिति की जानकारी लेना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।


