राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों के व्यवहार को लेकर सत्ता पक्ष की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने न केवल आसन का अनादर किया बल्कि असंसदीय भाषा का प्रयोग करके सदन की मर्यादा को आहत किया। यह पूरा घटनाक्रम सत्र के दौरान हुए हंगामे के बाद राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील बन गया है, जिसे लेकर विभिन्न नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
विधानसभा परिसर में नेताओं ने जताया रोष
विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा, कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और सादुलशहर के विधायक गुरुवीर सिंह ने संयुक्त रूप से विपक्षी व्यवहार को अनुचित बताया। नेताओं का कहना था कि विपक्ष ने लोकतांत्रिक परंपरा और संसदीय सभ्यता के नियमों की उपेक्षा की, जो कि राजस्थान की गौरवशाली विधायी संस्कृति के विपरीत है।
नेताओं ने कहा कि सदन बहस और संवाद का पवित्र मंच है, लेकिन विपक्ष द्वारा जिस तरह का रवैया अपनाया गया, उसने न केवल हंगामे को जन्म दिया बल्कि सदन की कार्यवाही को बाधित भी किया। सत्ता पक्ष का तर्क है कि विपक्ष इस तरह के व्यवहार से जनता का ध्यान मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रहा है।
समय सीमा समाप्त होने पर शुरू हुआ विवाद
घटना के संदर्भ में विधायक संदीप शर्मा ने बताया कि उस समय वे सभापति की भूमिका में थे और सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार संचालित की जा रही थी। उन्होंने कहा कि चर्चा के लिए निर्धारित पांच मिनट की समय सीमा समाप्त होने पर घंटी बजाकर संकेत दिया गया था। इसके बाद विपक्ष के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने आसन को चुनौती देना शुरू किया और उग्रता के साथ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
शर्मा ने कहा कि सदन में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना आसन का अधिकार है, लेकिन विपक्ष ने व्यक्तिगत टिप्पणियां कर न केवल नियमों का उल्लंघन किया बल्कि सदन की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। सत्ता पक्ष का कहना है कि यह व्यवहार किसी भी तरह से लोकसभा या विधानसभा की कार्यप्रणाली के अनुरूप नहीं है।
अविनाश गहलोत ने इसे बताया विधायी गुंडागर्दी
कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने विपक्ष के इस व्यवहार को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे “विधायी गुंडागर्दी” करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की असंसदीय भाषा का प्रयोग कुछ कांग्रेस विधायकों ने किया, वह पूरे राजस्थान की जनता ने देखा है। उनके अनुसार यह केवल सभापति के प्रति नहीं बल्कि पूरे सदन की गरिमा और जनता के भरोसे के खिलाफ है।
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन इसे व्यक्त करने की मर्यादा होती है। विपक्ष ने उस मर्यादा को तोड़कर सदन की गंभीरता को प्रभावित किया।
फुटेज की जांच कर कार्रवाई की मांग
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और विधायक गुरुवीर सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से ऐसी घटनाएँ पहली बार नहीं हुई हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज की समीक्षा कर दोषी सदस्यों पर विधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष को रचनात्मक बहस करनी चाहिए न कि सदन को विवाद और हंगामे का मंच बनाना चाहिए।


