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बाड़मेर-बालोतरा सीमा बदलाव पर सियासी घमासान

बाड़मेर-बालोतरा सीमा बदलाव पर सियासी घमासान

मनीषा शर्मा।  बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में हाल ही में किए गए बदलाव ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार के नोटिफिकेशन के बाद कांग्रेस ने इस निर्णय को पूरी तरह जनविरोधी करार देते हुए सड़क से लेकर राजनीतिक मंच तक विरोध तेज कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीमाओं का यह पुनर्गठन असंवैधानिक है और लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करता है।

चौधरी ने कहा कि सरकार ने थार के लोगों को बांटने का काम किया है और यह फैसला स्थानीय पहचान और सामाजिक एकता पर सीधा प्रहार है। उनके अनुसार, क्षेत्र की जनता इस निर्णय को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी और समय आने पर इसका जवाब देगी।

नोटिफिकेशन से बढ़ा विवाद

राज्य सरकार द्वारा 31 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं का पुनर्गठन किया गया। इस बदलाव के तहत गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंडों को बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया, जबकि बायतु को फिर से बाड़मेर में जोड़ दिया गया।

यही फैसला अब विवाद का केंद्र बन गया है। कांग्रेस का आरोप है कि बिना जनसहमति, बिना व्यवहारिक अध्ययन और राजनीतिक उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे प्रशासनिक कामकाज ही नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है।

“जनता देगी करारा जवाब”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए हरीश चौधरी ने कहा कि यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि जनहित के भी खिलाफ है। उन्होंने धोरीमन्ना में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने का जिक्र करते हुए बताया कि आमजन, सामाजिक संगठनों और पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।

चौधरी ने कहा कि बायतु को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की जिम्मेदारी कोई भी नेता लेने को तैयार नहीं है, क्योंकि यह निर्णय क्षेत्र की एकजुटता को तोड़ने वाला है। उन्होंने दावा किया कि चाहे कितनी भी साजिश की जाए, जनता उनके साथ खड़ी है और इस लड़ाई को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

राजनीतिक स्वार्थ का आरोप

विधायक चौधरी ने सरकार पर राजनीतिक स्वार्थसिद्धि का आरोप लगाते हुए कहा कि सीमा बदलाव का फैसला प्रशासनिक सुविधा के नाम पर लिया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उनके अनुसार, यह केवल सत्ता की रणनीति है, जिसका परिणाम भविष्य में सरकार को भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की भावनाओं को दरकिनार कर कोई भी फैसला टिक नहीं सकता।

धरना-प्रदर्शन ने बढ़ाई चिंता

सीमा बदलाव के खिलाफ धोरीमन्ना मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना भी जारी है। धरने में शामिल 75 वर्षीय हेमाराम चौधरी ने कहा कि इस फैसले से हर वर्ग में गहरा आक्रोश है और यह निर्णय लोगों की मूलभूत सुविधाओं पर सीधा असर डालता है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जनता की आवाज सुनी जाए और फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों के जीवन से जुड़ा प्रश्न है।

पुनर्विचार की मांग तेज

कांग्रेस और स्थानीय प्रतिनिधियों का मानना है कि सीमाओं के पुनर्गठन से प्रशासनिक दूरी बढ़ सकती है और कई गांवों के लिए दिक्कतें खड़ी होंगी। इसलिए उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह जनता से संवाद स्थापित करे और आवश्यक हो तो सीमांकन में संशोधन करे।

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