मनीषा शर्मा। ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में खादिमों के लाइसेंस के लिए आवेदन की अंतिम तारीख कल है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक नाजिम कार्यालय में एक भी आवेदन जमा नहीं हुआ। अंजुमन सैयद जादगान के करीब 2200 और अंजुमन शेखजादगान के लगभग 800 सदस्य बताए जाते हैं। यानी करीब 3000 खादिम इस प्रक्रिया से जुड़े माने जा रहे हैं—और इनकी ओर से पहले ही विरोध दर्ज कराया जा चुका है।
कोर्ट और सरकार के आदेश पर शुरू हुई प्रक्रिया
दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान की ओर से जारी विज्ञापन में स्पष्ट बताया गया कि यह प्रक्रिया केवल सैयद जादगान और शेखजादगान के लिए लागू है। उन्होंने कहा कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों, केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों, जिला प्रशासन और सुरक्षा अंकेक्षण रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है। उनका दावा है कि इससे किसी के हित प्रभावित नहीं होंगे और यह जायरीन की सुविधा और सुरक्षा के लिए जरूरी है।
अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत लाइसेंस
लाइसेंस प्रक्रिया दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 की धारा 11(एफ) के अनुसार चलाई जा रही है। इसके तहत खादिम समुदाय की पहचान, दायित्व, कार्यप्रणाली और मानकों को स्पष्ट करना तथा जायरीन की सुविधा सुनिश्चित करना उद्देश्य बताया गया है। इसी के लिए पात्र खादिमों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प
आवेदन-पत्र दरगाह कमेटी की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है या व्यक्तिगत रूप से नाजिम कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। भरा हुआ फॉर्म, आवश्यक दस्तावेज और स्वप्रमाणित प्रतियों के साथ 5 जनवरी 2026 तक जमा कराना अनिवार्य है।
शुरुआत से ही उठा विवाद
प्रक्रिया शुरू होते ही विरोध के स्वर तेज हो गए। अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इसे “तुगलकी फरमान” बताते हुए साफ कहा कि वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे।
वहीं नाजिम मोहम्मद बिलाल खान का कहना है कि यह पूरी तरह नियमों के अनुसार है और इसे गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए।
75 साल में पहली बार लाइसेंस प्रक्रिया
दरगाह के इतिहास में यह पहला मौका है जब खादिमों को औपचारिक लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। 1954 से अब तक दरगाह कमेटी में 3 प्रशासक और 37 नाजिम अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। मौजूदा नाजिम मोहम्मद बिलाल खान (BSF से सेवानिवृत्त) के कार्यकाल में यह पहल शुरू हुई है, जिससे इसे ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है—भले ही इसका कड़ा विरोध हो रहा हो।


