मनीषा शर्मा। अजमेर में जमीन और मकान की फर्जी रजिस्ट्री को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक भाजपा नेता और उनकी पत्नी पर आरोप लगा है कि उन्होंने कथित तौर पर दस्तावेजों में हेरफेर कर संपत्ति अपने नाम करा ली। यह मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज
लोहाखान स्थित कल्पवृक्ष मंदिर के पास रहने वाले नवीन भाटी ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे प्रकरण की कड़ी से कड़ी जोड़कर जांच कर रही है और दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है।
रजिस्ट्री में भुगतान का दावा, लेकिन पैसे नहीं दिए गए—आरोप
नवीन भाटी ने पुलिस को बताया कि बक्शीजी की कोठी, पट्टी कटला निवासी भाजपा नेता संदीप पवार और उनकी पत्नी ने उनकी माता भंवरी देवी के मकान की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। आरोप के मुताबिक, इस रजिस्ट्री के एवज में न तो नकद भुगतान किया गया और न ही कोई चेक दिया गया।
हालाँकि, रजिस्ट्री दस्तावेजों में यह उल्लेख किया गया कि चेक से एक-एक लाख रुपये का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, ऐसा कोई लेन-देन वास्तव में नहीं हुआ और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी भ्रामक है।
शिकायत के बाद खुला पूरा खेल
नवीन भाटी और उनकी पत्नी नैना चौहान का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब संदीप पवार ने अजमेर नगर निगम में शिकायत दी कि उनका मकान अवैध है। आरोप है कि राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए मकान को अवैध घोषित कराने और तोड़ने की कोशिश की जा रही थी।
इसी दौरान दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि उनकी माता की संपत्ति की रजिस्ट्री पहले ही अवैध तरीके से कराई जा चुकी है।
संपत्ति हड़पने का आरोप
परिवादी का आरोप है कि योजना बनाकर संपत्ति हड़पने के लिए यह पूरा कदम उठाया गया। उनका कहना है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री दिखा दी गई और परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। अब शिकायत दर्ज होने के बाद पीड़ित पक्ष न्याय की मांग कर रहा है।
पुलिस ने दर्ज की FIR, जांच शुरू
फिलहाल सिविल लाइन थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित दस्तावेज, बैंक विवरण और रजिस्ट्री रिकॉर्ड खंगाल रही है।
अधिकारी मानते हैं कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आरोपित पक्ष की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


