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किसानों की बड़ी जीत: हनुमानगढ़ के टिब्बी में नहीं लगेगी एथेनॉल फैक्ट्री

किसानों की बड़ी जीत: हनुमानगढ़ के टिब्बी में नहीं लगेगी एथेनॉल फैक्ट्री

मनीषा शर्मा। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। किसानों के लंबे आंदोलन, लगातार विरोध और फैक्ट्री परिसर में हुई आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद कंपनी प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए टिब्बी में एथेनॉल फैक्ट्री न लगाने का निर्णय लिया है। कंपनी के इस फैसले को स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यह फैक्ट्री राजस्थान के बाहर किसी अन्य राज्य में स्थापित की जाएगी, जहां से निवेश के प्रस्ताव भी मिल रहे हैं।

क्यों विरोध कर रहे थे किसान?

टिब्बी के राठीखेड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री का स्थानीय किसानों और ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से विरोध किया जा रहा था। किसानों का आरोप था कि इस फैक्ट्री से क्षेत्र में जल प्रदूषण बढ़ेगा और पहले से ही संकटग्रस्त भूजल स्तर पर गंभीर असर पड़ेगा। किसानों का कहना था कि एथेनॉल फैक्ट्री के लिए अत्यधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जिससे खेती, पशुपालन और पीने के पानी की समस्या और गहराएगी। इसके साथ ही फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।

धरने, महापंचायत और आंदोलन की लंबी श्रृंखला

फैक्ट्री के विरोध में किसानों ने कई बार धरना-प्रदर्शन किए। टिब्बी और आसपास के गांवों में दो बार बड़ी महापंचायतें आयोजित की गईं, जिनमें हजारों किसान और ग्रामीण शामिल हुए। इन महापंचायतों में साफ तौर पर फैक्ट्री का एमओयू रद्द करने और किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की गई। 10 दिसंबर को टिब्बी में आयोजित महापंचायत के बाद स्थिति हिंसक हो गई, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा।

महापंचायत के बाद हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़

महापंचायत के बाद जब किसान फैक्ट्री की ओर कूच कर रहे थे, तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए। उग्र किसानों और स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री परिसर में पहुंचकर जमकर तोड़फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। फैक्ट्री परिसर के अंदर और बाहर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई। इस घटना के बाद प्रशासन और सरकार पर भारी दबाव बना।

100 से अधिक किसानों पर FIR, हिरासत में लिए गए लोग

हिंसक घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। कई किसानों को हिरासत में भी लिया गया, जिससे क्षेत्र में और ज्यादा तनाव पैदा हो गया। इस कार्रवाई के विरोध में 17 दिसंबर को धानमंडी में एक और बड़ी महापंचायत आयोजित हुई। किसानों ने प्रशासन को 20 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 7 जनवरी को संगरिया में विशाल महापंचायत की जाएगी।

सरकार ने बनाई जांच कमेटी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। इस समिति का उद्देश्य फैक्ट्री से जुड़ी आपत्तियों और जल प्रदूषण की आशंकाओं का अध्ययन करना था। इस कमेटी में वन एवं पर्यावरण विभाग के विशिष्ट शासन सचिव, हनुमानगढ़ जिला कलेक्टर, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अभियंता अरविंद अग्रवाल और भूजल विभाग के मुख्य अभियंता सूरजभान को शामिल किया गया। समिति को क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति और फैक्ट्री के संभावित प्रभावों की रिपोर्ट तैयार करनी थी।

कंपनी प्रबंधन का बड़ा फैसला

किसानों के लगातार विरोध, प्रशासनिक दबाव और हिंसक घटनाओं के बाद कंपनी प्रबंधन ने आखिरकार टिब्बी में एथेनॉल फैक्ट्री न लगाने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि मौजूदा हालात में राजस्थान में निवेश करना संभव नहीं है और अब फैक्ट्री को किसी अन्य राज्य में स्थापित किया जाएगा। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, कई राज्य सरकारें उन्हें अपने यहां फैक्ट्री लगाने के प्रस्ताव दे रही हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है।

किसानों के लिए क्यों है यह बड़ी जीत?

यह फैसला हनुमानगढ़ के किसानों के लिए इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन, एकजुटता और जनदबाव के जरिए अपनी बात सरकार और कंपनी तक पहुंचाई। किसानों का मानना है कि यह जीत केवल एक फैक्ट्री रोकने की नहीं, बल्कि जल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा की लड़ाई है।

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