उमस भरे मौसम में त्वचा से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं और दाद तथा खुजली जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। शुरुआत में यह समस्या मामूली लगती है, लेकिन जब यह बार-बार लौटकर आने लगती है, तब यह चिंता का कारण बन जाती है। कई लोग महंगी दवाइयों और क्रीम का इस्तेमाल करते हैं, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिल जाती है, लेकिन जैसे ही दवा बंद की जाती है, खुजली फिर से शुरू हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल त्वचा की ऊपरी समस्या नहीं होती, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. निशि यादव के अनुसार, बार-बार होने वाला फंगल संक्रमण अक्सर गलत इलाज और लापरवाही का नतीजा होता है। बहुत से लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से क्रीम खरीद लेते हैं, जिनमें स्टेरॉयड मिला होता है। ये क्रीम शुरुआती तौर पर खुजली और जलन को दबा देती हैं, जिससे मरीज को लगता है कि बीमारी ठीक हो गई है। लेकिन वास्तव में ये क्रीम फंगस को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं। इससे संक्रमण अंदर ही अंदर बना रहता है और कुछ समय बाद पहले से ज्यादा गंभीर रूप में वापस लौट आता है।
फंगल संक्रमण के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में मौजूद कुछ बीमारियां इसे बढ़ावा देती हैं। उदाहरण के तौर पर डायबिटीज के मरीजों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके अलावा जिन लोगों की इम्युनिटी कम होती है, उन्हें भी बार-बार फंगल संक्रमण होने का खतरा रहता है। उमस भरे मौसम में पसीना अधिक आता है और अगर शरीर को साफ और सूखा न रखा जाए, तो यह फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बना देता है। गंदे या गीले कपड़े पहनना भी इस समस्या को बढ़ाता है।
शुरुआत में दाद और खुजली सामान्य लग सकती है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह गंभीर रूप ले सकती है। जब खुजली लगातार बनी रहती है, त्वचा पर लाल या काले धब्बे बढ़ने लगते हैं, या खुजलाने से घाव बनने लगते हैं, तब यह संकेत होता है कि संक्रमण गहरा हो रहा है। अगर प्रभावित हिस्से से पस निकलने लगे या बुखार जैसा महसूस हो, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है, क्योंकि यह संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों तक भी फैल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाली खुजली कुछ गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। डायबिटीज के अलावा लिवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं भी त्वचा पर असर डाल सकती हैं। खून की कमी यानी एनीमिया भी शरीर को कमजोर बनाता है, जिससे त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो केवल बाहरी इलाज पर निर्भर रहना सही नहीं है, बल्कि इसकी जड़ तक पहुंचना जरूरी होता है।
इस समस्या से बचने और ठीक होने के लिए जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद महत्वपूर्ण है। सबसे पहले शरीर को साफ और सूखा रखना चाहिए, क्योंकि नमी फंगस के फैलने का सबसे बड़ा कारण होती है। सूती और ढीले कपड़े पहनने से त्वचा को हवा मिलती है और पसीना जल्दी सूख जाता है। नहाने के दौरान पानी में नीम का इस्तेमाल करने से भी संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे तौलिया और साबुन अलग रखना, ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले।
इसके साथ ही कुछ गलत आदतों से बचना भी जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी क्रीम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे समस्या दब सकती है, लेकिन खत्म नहीं होती। खुजलाने से त्वचा को नुकसान पहुंचता है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। अधिक मीठा खाना भी फंगल संक्रमण को बढ़ावा दे सकता है, इसलिए खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है। गीले कपड़े पहनने से बचना चाहिए और ज्यादा केमिकल वाले साबुन का इस्तेमाल कम करना चाहिए, क्योंकि ये त्वचा को संवेदनशील बना सकते हैं।


