राजस्थान में संपत्ति खरीदने और हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में निवेश करने वाले लोगों के लिए आने वाले महीने महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने प्रदेशभर में स्थित अपनी कॉलोनियों और जमीनों की आवासीय आरक्षित दरों में बढ़ोतरी की तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड प्रशासन अगले तीन महीनों के भीतर नई दरें लागू करने की योजना पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर जयपुर सहित प्रदेश के कई शहरों में जमीनों की कीमतों, रजिस्ट्री और नई आवासीय योजनाओं पर दिखाई देगा।
सूत्रों के अनुसार हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय ने सभी उप-आवासन आयुक्तों और विभिन्न डिवीजनों के आवासीय अभियंताओं को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित जमीनों की नई दरों का निर्धारण कर प्रस्ताव तैयार करें। इन प्रस्तावों को मई महीने के अंत तक मुख्यालय भेजने के लिए कहा गया है। इसके बाद बोर्ड प्रशासन इन प्रस्तावों की समीक्षा करेगा और चर्चा के बाद जुलाई 2026 से नई आरक्षित दरें लागू की जा सकती हैं।
राजस्थान हाउसिंग बोर्ड का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश के कई शहरों में प्रॉपर्टी बाजार में लगातार तेजी देखी जा रही है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों में जमीनों और मकानों की मांग बढ़ने के कारण संपत्ति की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में बोर्ड प्रशासन अपनी जमीनों की आरक्षित दरों को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप करने की तैयारी कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक बोर्ड प्रशासन ने केवल मौजूदा कॉलोनियों की जमीनों का ही ब्यौरा नहीं मांगा है, बल्कि उन जमीनों का भी विवरण तलब किया है जहां आने वाले महीनों में नई आवासीय योजनाएं लॉन्च की जानी हैं। बोर्ड इस साल के अंत तक जयपुर में जगतपुरा के आगे सिरोली और दांतली क्षेत्र में नई आवासीय स्कीम लाने की तैयारी कर रहा है। इन क्षेत्रों में अब तक आवासीय आरक्षित दर तय नहीं की गई थी, लेकिन अब प्रस्ताव तैयार कर इनकी नई कीमतें निर्धारित की जाएंगी।
जयपुर के बाहरी इलाकों में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार को देखते हुए सिरोली और दांतली को भविष्य की महत्वपूर्ण आवासीय लोकेशन माना जा रहा है। यहां नई योजनाएं शुरू होने से बड़ी संख्या में मध्यम वर्गीय परिवारों और निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है। हालांकि नई आरक्षित दरें बढ़ने से इन योजनाओं में मकानों और प्लॉट्स की कीमतें पहले के मुकाबले अधिक हो सकती हैं।
इसके अलावा चौमूं क्षेत्र में अवाप्त की गई 30 बीघा से अधिक जमीन पर भी नई योजना लाने की तैयारी चल रही है। बोर्ड प्रशासन अब इस जमीन की आवासीय आरक्षित दर भी तय कर सकता है। माना जा रहा है कि नई दरों के निर्धारण के बाद बोर्ड यहां भविष्य की आवासीय परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा। जयपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ती आबादी और आवास की मांग को देखते हुए हाउसिंग बोर्ड नई परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा आरक्षित दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर रजिस्ट्री प्रक्रिया पर दिखाई देगा। खासतौर पर पुराने मकानों, स्वतंत्र आवासों, फ्लैट्स और भूखंडों के नियमितीकरण और रजिस्ट्री मामलों में लोगों को अधिक राशि चुकानी पड़ सकती है। राजस्थान हाउसिंग बोर्ड में बड़ी संख्या में ऐसे मामले आते हैं जिनमें पुराने मकानों की रजिस्ट्री या नियमितीकरण कराया जाता है। नई दरें लागू होने के बाद इन मामलों में अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ सकता है।
हालांकि बोर्ड प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि जिन आवासों या भूखंडों का आवंटन पहले ही हो चुका है और जिनके लिए डिमांड लेटर जारी किए जा चुके हैं, उन पर इस नई बढ़ोतरी का प्रभाव नहीं पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति को जनवरी 2026 में आवास आवंटित हुआ था और उसकी कुल राशि निर्धारित कर मांगपत्र जारी कर दिया गया था, लेकिन उसने अभी तक पूरी राशि जमा नहीं करवाई है, तो ऐसे मामलों में नई बढ़ी हुई दरें लागू नहीं होंगी। इससे पहले से आवंटन प्राप्त कर चुके लोगों को राहत मिलेगी।
हाउसिंग बोर्ड के इस फैसले को राज्य में तेजी से बदलते रियल एस्टेट बाजार से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में शहरीकरण की रफ्तार बढ़ी है और बड़े शहरों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी प्रॉपर्टी की मांग में तेजी आई है। खासतौर पर जयपुर में नए आवासीय क्षेत्रों का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में बोर्ड प्रशासन अपनी जमीनों और योजनाओं की कीमतों को बाजार के अनुरूप अपडेट करना चाहता है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि नई आरक्षित दरें लागू होने के बाद भविष्य की आवासीय योजनाओं की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर सीधे खरीदारों पर पड़ेगा। वहीं निवेशकों के लिए यह संकेत भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में संपत्ति की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कई लोग अभी से संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए निवेश की योजना बनाने लगे हैं।
फिलहाल सभी की नजर राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। मई के अंत तक विभिन्न क्षेत्रों से प्रस्ताव आने के बाद बोर्ड प्रशासन नई दरों पर अंतिम निर्णय लेगा। यदि जुलाई से नई आरक्षित दरें लागू होती हैं तो इसका असर प्रदेश के प्रॉपर्टी बाजार, आवासीय योजनाओं और रजिस्ट्री प्रक्रिया पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।


