राजस्थान के अजमेर स्थित एमडीएस यूनिवर्सिटी (MDSU) ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक अनुभव देने की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने “लर्न, अर्न एंड परफॉर्म” योजना लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत छात्र अब उच्च शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी परिसर में विभिन्न कार्यों से जुड़कर आर्थिक सहायता भी प्राप्त कर सकेंगे। इस योजना को नई शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें वास्तविक कार्य अनुभव से जोड़ना भी है। उनका कहना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के पास व्यावहारिक कौशल और प्रोफेशनल अनुभव होना भी जरूरी है। यही वजह है कि विश्वविद्यालय ने इस योजना को शुरू किया है ताकि छात्र पढ़ाई के दौरान ही अपने कौशल को विकसित कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
इस योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और गतिविधियों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। छात्र अकादमिक, प्रशासनिक, डिजिटल, शोध, रचनात्मक और पर्यावरणीय गतिविधियों से जुड़ सकेंगे। इससे न केवल उन्हें काम करने का अनुभव मिलेगा, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह योजना छात्रों को भविष्य में रोजगार प्राप्त करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगी।
योजना के तहत विद्यार्थियों को रिसर्च असिस्टेंस, प्रयोगशाला सहयोग, कंटेंट क्रिएशन, डिजिटाइजेशन, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, इवेंट मैनेजमेंट, डॉक्यूमेंटेशन और कार्यालयीय कार्यों जैसे कई क्षेत्रों में काम करने का अवसर दिया जाएगा। इसके अलावा हॉर्टिकल्चर और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में भी विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे छात्रों को अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव प्राप्त होगा और उनकी व्यावसायिक समझ विकसित होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में भी मददगार साबित होगी। छात्र टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, समय प्रबंधन और कार्य संस्कृति जैसी महत्वपूर्ण प्रोफेशनल स्किल्स सीख सकेंगे। वर्तमान समय में कंपनियां और संस्थान ऐसे युवाओं को प्राथमिकता देते हैं जिनके पास पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी हो। ऐसे में यह योजना छात्रों के करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आर्थिक सहायता के संदर्भ में विश्वविद्यालय ने बताया कि स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को हर महीने 3 हजार से 5 हजार रुपए तक की सहायता दी जा सकेगी। वहीं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों को 5 हजार से 8 हजार रुपए तक की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। कई छात्र उच्च शिक्षा के दौरान आर्थिक दबाव का सामना करते हैं और पार्ट टाइम काम की तलाश करते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय परिसर में ही काम करने का अवसर मिलने से उन्हें पढ़ाई और काम के बीच संतुलन बनाने में आसानी होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना के तहत चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी। विद्यार्थियों का चयन उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, कौशल, अनुशासन, उपस्थिति और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि प्रतिभाशाली और मेहनती विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। इससे छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित होगी और वे अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होंगे।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी National Education Policy के तहत शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में शिक्षा संस्थानों को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने वाले केंद्र के रूप में विकसित होना होगा। एमडीएस यूनिवर्सिटी की यह योजना इसी सोच को आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है।
विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में नई योजना छात्रों के लिए अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र बन सकती है। माना जा रहा है कि इससे अधिक संख्या में विद्यार्थी विश्वविद्यालय की ओर आकर्षित होंगे। खासतौर पर वे छात्र जो पढ़ाई के साथ कुछ सीखना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, उनके लिए यह पहल काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस प्रकार की योजनाएं अन्य विश्वविद्यालयों में भी लागू होती हैं तो इससे देश के उच्च शिक्षा तंत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही कार्य अनुभव मिलने से उनकी रोजगार क्षमता बढ़ेगी और वे इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप खुद को बेहतर तरीके से तैयार कर सकेंगे। साथ ही इससे युवाओं में आत्मविश्वास और नवाचार की भावना भी मजबूत होगी।
एमडीएस यूनिवर्सिटी की “लर्न, अर्न एंड परफॉर्म” योजना को शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में यह योजना विद्यार्थियों के लिए कितना प्रभावी साबित होती है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।


