राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में प्रसूताओं की मौत के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर घटना के बाद राजस्थान सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक और चिकित्सकीय एक्शन लिया है। राज्य के ड्रग कंट्रोलर ने शुक्रवार को आदेश जारी करते हुए 9 दवाओं के इस्तेमाल, सप्लाई और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह फैसला मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार का जोखिम न रहे।
ड्रग कंट्रोलर की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित दवाओं के सभी निर्माता, सी एंड एफ एजेंट, स्टॉकिस्ट और थोक विक्रेता इन दवाओं के संबंधित बैचों को किसी भी व्यक्ति या संस्थान को सप्लाई नहीं करेंगे। जब तक सरकारी विश्लेषक की कानूनी जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इन दवाओं का वितरण और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। विभाग ने इस आदेश को अत्यंत आवश्यक श्रेणी में रखते हुए बिना किसी लापरवाही के पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील और गंभीर माना है। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पोस्ट-ऑपरेटिव गायनी वार्ड में मरीजों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन के बाद इलाज के दौरान कुछ महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद मौतों का सिलसिला सामने आया। घटना की जानकारी मिलते ही कोटा और बूंदी के औषधि नियंत्रण अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर उन दवाओं के सैंपल लिए, जो पोस्ट-ऑपरेटिव अवधि में मरीजों को दी गई थीं। इन सैंपलों को जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं दवाओं की गुणवत्ता या उपयोग में कोई गड़बड़ी तो नहीं थी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और त्वरित जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी तेजी से प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में चिकित्सा प्रोटोकॉल और प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद जनरल सर्जरी विभाग के सह आचार्य डॉ. नवनीत कुमार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं यूटीबी पर कार्यरत सहायक आचार्य डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा ड्यूटी पर मौजूद वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी गुरजोत कौर और निमेश वर्मा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय जयपुर कर दिया गया है। विभागीय जांच में इन कर्मचारियों पर मरीजों की निगरानी में लापरवाही, चिकित्सा प्रोटोकॉल का सही पालन न करने और कार्य में शिथिलता बरतने के आरोप लगे हैं।
सरकार ने केवल निलंबन तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि कई वरिष्ठ डॉक्टरों से भी जवाब मांगा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के यूनिट हेड डॉ. बीएल पटीदार और डॉ. नेहा सीहरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उनसे उपचार प्रक्रिया की निगरानी, ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल, पर्यवेक्षण और समन्वय व्यवस्था में संभावित लापरवाही को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां बनीं, जिनके कारण एक साथ कई मरीजों की स्थिति गंभीर हुई।
प्रमुख शासन सचिव की ओर से अस्पताल प्रशासन को भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर प्रबंधन, एनेस्थीसिया प्रोटोकॉल, दवा वितरण प्रणाली और पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग सिस्टम की व्यापक समीक्षा करने को कहा गया है। साथ ही सभी कमियों को तत्काल सुधारने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर प्रसूता महिलाओं के इलाज और ऑपरेशन के बाद की देखभाल को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्ट-ऑपरेटिव अवधि मरीजों के लिए बेहद संवेदनशील होती है और इस दौरान दवाओं, संक्रमण नियंत्रण और निगरानी में किसी भी प्रकार की चूक गंभीर परिणाम दे सकती है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोटा अस्पताल में हुई यह घटना अब पूरे राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर चर्चा का विषय बन चुकी है। दवाओं पर रोक, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई तथा जांच के आदेशों से यह साफ है कि सरकार इस मामले को लेकर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इस दर्दनाक घटना के पीछे असली कारण क्या था।


