latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

रविंद्र सिंह भाटी के प्रदर्शन पर राजेंद्र राठौड़ की टिप्पणी से गरमाई सियासत

रविंद्र सिंह भाटी के प्रदर्शन पर राजेंद्र राठौड़ की टिप्पणी से गरमाई सियासत

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी को लेकर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। बाड़मेर जिले में मजदूरों के समर्थन में किए गए उनके विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई एक घटना ने न केवल प्रशासनिक हलकों में बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी बहस को जन्म दे दिया है। चार दिन पहले बाड़मेर कलेक्ट्रेट के सामने हुए प्रदर्शन के दौरान रविंद्र सिंह भाटी द्वारा स्वयं पर पेट्रोल छिड़कने की घटना अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की तीखी प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है।

यह पूरा घटनाक्रम बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़ा हुआ है, जहां पिछले कई सप्ताह से मजदूर और स्थानीय लोग अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण के बाद स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के जो वादे किए गए थे, वे पूरी तरह से लागू नहीं हो सके। इसके अलावा मजदूरों की ओर से कार्य अवधि को लेकर भी मांग उठाई जा रही थी। आंदोलनकारी चाहते थे कि उन्हें निर्धारित आठ घंटे की ड्यूटी मिले और रोजगार से जुड़े पुराने आश्वासनों को पूरा किया जाए। इन मांगों को लेकर मजदूरों का धरना लगातार जारी था और इसी आंदोलन को समर्थन देने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी सक्रिय रूप से मैदान में उतरे थे।

लगातार कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन ने प्रशासन और सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा था। मजदूरों का कहना था कि क्षेत्र के लोगों ने विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीनें दीं, लेकिन बदले में रोजगार और सुविधाओं को लेकर किए गए वादों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। इसी असंतोष के चलते आंदोलन का स्वरूप धीरे-धीरे व्यापक होता गया और स्थानीय स्तर पर इसे काफी समर्थन भी मिला।

स्थिति उस समय अचानक गंभीर हो गई जब 19 मई को बाड़मेर कलेक्ट्रेट के घेराव के दौरान रविंद्र सिंह भाटी ने विरोध दर्ज कराने के लिए खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने माचिस जलाकर खुद को आग लगाने का प्रयास भी किया। हालांकि वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उन्हें रोक लिया। अधिकारियों की तत्परता के कारण एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में इसकी चर्चा शुरू हो गई।

घटना के बाद राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे मजदूरों की समस्याओं को लेकर एक गंभीर विरोध का प्रतीक बताया, जबकि कई राजनीतिक नेताओं ने इस तरीके पर सवाल उठाए। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ का बयान विशेष रूप से चर्चा में आ गया है।

शनिवार को चूरू जिले के सुजानगढ़ क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे राजेंद्र राठौड़ ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रविंद्र सिंह भाटी के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार के आचरण की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। राठौड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी मांगों और अधिकारों के लिए संघर्ष करने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध दर्ज कराने के तरीके लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक दायरे के भीतर होने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल जनता की आवाज उठाना ही नहीं होती, बल्कि उन्हें ऐसा आचरण भी प्रस्तुत करना चाहिए जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप हो। राठौड़ ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे अनुचित करार दिया। उनके बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ सामने आ रहे हैं।

इस मामले को और अधिक संवेदनशील बनाने वाली बात यह भी है कि घटना से पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने गिरल लिग्नाइट माइंस से संबंधित एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। न्यायालय ने लिग्नाइट के परिवहन को तुरंत शुरू करने और इसमें बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में आंदोलन और न्यायिक आदेशों के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्थानीय रोजगार, भूमि अधिग्रहण, औद्योगिक विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं। बाड़मेर क्षेत्र में ऊर्जा और खनन परियोजनाएं लंबे समय से विकास के केंद्र में रही हैं, लेकिन इनके साथ रोजगार और पुनर्वास के प्रश्न भी लगातार उठते रहे हैं। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर ऐसे आंदोलनों को व्यापक जनसमर्थन मिल जाता है।

रविंद्र सिंह भाटी पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान की राजनीति में एक प्रभावशाली युवा नेता के रूप में उभरे हैं। अपनी बेबाक शैली और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर मुखर रहने के कारण वे अक्सर चर्चा में रहते हैं। दूसरी ओर राजेंद्र राठौड़ भाजपा के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं और उनकी राजनीतिक टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे में दोनों नेताओं के नाम इस विवाद से जुड़ने के बाद मामला और अधिक राजनीतिक महत्व प्राप्त कर गया है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading