राजस्थान के कोटा स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले ने पूरे प्रदेश में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। लगातार सामने आ रही मौतों और संक्रमण के मामलों के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बेहद संवेदनशील बन गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सीएडी सभागार में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर चिकित्सा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। बैठक में चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान ओम बिरला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने अस्पतालों की कार्यप्रणाली, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, ऑपरेशन थिएटर की स्थिति और चिकित्सा सेवाओं की निगरानी को लेकर अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, इसलिए पूरे मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी और स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं। उनका कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की चूक सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences और अन्य केंद्रीय चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कोटा और बूंदी के अस्पतालों का दौरा करेगी। यह विशेषज्ञ टीम अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था की समीक्षा करेगी और ऑपरेशन थिएटरों की स्थिति का निरीक्षण करेगी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि कहीं अस्पतालों में स्वच्छता, उपकरणों की सफाई या चिकित्सा प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की कमी तो नहीं रही। विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ने अस्पतालों में साफ-सफाई और नर्सिंग व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज के दौरान स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। इसके साथ ही आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सा संसाधन उपलब्ध हों और मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। ओम बिरला ने साफ तौर पर कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी अस्पतालों में लोगों का भरोसा कायम रह सके।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और JK Lone Hospital में सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी संक्रमण के कारण इन महिलाओं की जान गई। इसके अलावा दो अन्य महिलाओं की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि चार अन्य मरीजों का इलाज जारी है। लगातार बढ़ते संक्रमण और मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पहला मामला सामने आने के करीब सात दिन बाद भी चिकित्सा प्रशासन मौतों के वास्तविक कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाया है। इससे लोगों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। परिजनों और आमजन की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सार्वजनिक की जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संक्रमण की वजह ऑपरेशन थिएटर या चिकित्सा प्रक्रियाओं से जुड़ी है, तो यह बेहद गंभीर मामला हो सकता है।
मामले में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चार प्रसूताओं में से केवल एक महिला का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और उसकी रिपोर्ट भी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर संदेह गहरा रहा है। दूसरी ओर जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम दोबारा कोटा पहुंची और भर्ती मरीजों की स्थिति का जायजा लिया। टीम संक्रमण के कारणों और इलाज की प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है।
संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए नए अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में फिलहाल प्रसूताओं की भर्ती बंद कर दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। वहीं अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल तैनात किया गया है। बड़ी संख्या में मरीजों के परिजन अस्पताल परिसर में मौजूद हैं, जिससे स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में बढ़ते मरीजों के दबाव, संसाधनों की कमी और संक्रमण नियंत्रण की कमजोर व्यवस्थाएं कई बार गंभीर हालात पैदा कर देती हैं। ऐसे में जरूरी है कि अस्पतालों में नियमित निरीक्षण, स्वच्छता मानकों का पालन और चिकित्सा प्रक्रियाओं की सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल पूरे मामले पर राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग की नजर बनी हुई है। जांच रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि संक्रमण फैलने की असली वजह क्या थी और इसमें किस स्तर पर चूक हुई। लेकिन इतना तय है कि कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का यह मामला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बनकर सामने आया है।


