देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली NEET-UG 2026 को लेकर बड़ा विवाद सामने आने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी National Testing Agency ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। मंगलवार 12 मई को एजेंसी की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि जांच एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट और सामने आए तथ्यों को देखते हुए मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं माना गया। इसके बाद परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। अब नई परीक्षा तारीखों और एडमिट कार्ड से संबंधित कार्यक्रम जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। इस फैसले के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।
यह पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब परीक्षा के प्रश्नपत्र और एक कथित गेस पेपर के बीच चौंकाने वाली समानता सामने आई। शुरुआती जांच में यह दावा किया गया कि NEET-UG 2026 के 180 प्रश्नों में से लगभग 125 सवाल गेस पेपर से मेल खाते थे। इनमें फिजिक्स और बायोलॉजी विषय के कई प्रश्न हूबहू समान पाए गए। इस खुलासे के बाद परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। मामला धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि जांच एजेंसियों को सक्रिय होना पड़ा और फिर कई राज्यों तक फैले संभावित नेटवर्क की जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि इस कथित गेस पेपर का संबंध केरल से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने यह गेस पेपर राजस्थान के सीकर जिले में रहने वाले अपने पिता को भेजा था। छात्र के पिता सीकर में एक पीजी हॉस्टल संचालित करते हैं। बताया जा रहा है कि 2 मई को छात्र ने अपने पिता को मोबाइल फोन पर यह गेस पेपर भेजा और कहा कि यह उसे सीकर में पढ़ रहे उसके एक मित्र से प्राप्त हुआ है। शुरुआत में हॉस्टल संचालक ने इस दस्तावेज को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने रात में पेपर को ठीक से नहीं देखा और अगले दिन परीक्षा से पहले हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को सामान्य अध्ययन सामग्री समझकर दे दिया।
परीक्षा समाप्त होने के बाद स्थिति तब बदली जब कुछ छात्रों ने प्रश्नों के मिलान को लेकर चर्चा शुरू की। हॉस्टल संचालक को भी शक हुआ कि गेस पेपर में मौजूद कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा से मिलते-जुलते हैं। इसके बाद वह एक कोचिंग संस्थान के शिक्षक के पास पहुंचे और गेस पेपर की जांच करवाई। शिक्षक ने जब दोनों प्रश्नपत्रों का मिलान किया तो पाया कि कई सवाल परीक्षा में भी आए थे। इसके बाद यह मामला तेजी से फैल गया और छात्रों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि परीक्षा वाले दिन यानी 3 मई को ही कुछ छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। छात्रों का कहना था कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और मोबाइल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक ऐसा गेस पेपर वायरल हुआ था, जिसमें वास्तविक परीक्षा के कई प्रश्न शामिल थे। हालांकि शुरुआती स्तर पर इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। स्थानीय अधिकारियों ने इसे सामान्य गेस पेपर मानते हुए तत्काल कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की।
बाद में जब छात्रों ने कथित गेस पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र के मिलान से जुड़े सबूत एकत्र किए और उन्हें ईमेल के माध्यम से एनटीए को भेजा, तब एजेंसियां सक्रिय हुईं। मामले ने तूल पकड़ना शुरू किया तो विभिन्न जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच का जिम्मा सौंपा गया। शुरुआती जांच में व्हाट्सएप चैट्स, सोशल मीडिया ग्रुप्स और मोबाइल डेटा की पड़ताल की गई। जांच एजेंसियों ने यह जानने की कोशिश शुरू की कि कथित गेस पेपर सबसे पहले किसने तैयार किया और यह किन माध्यमों से छात्रों तक पहुंचा।
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि शुरुआत में एनटीए के स्थानीय समन्वयक ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या शिकायत से इनकार किया था। लेकिन बाद में जब जांच एजेंसियों को कई डिजिटल साक्ष्य मिले और प्रश्नों के मिलान की बात सामने आई, तब पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया। सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं यह कोई संगठित नेटवर्क तो नहीं था, जो परीक्षा से पहले चुनिंदा अभ्यर्थियों तक प्रश्न पहुंचाने का काम कर रहा था।
NEET-UG जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह की गड़बड़ी सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच आक्रोश बढ़ गया है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक कठिन मेहनत की, लेकिन पेपर लीक और गेस पेपर विवाद ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतने बड़े स्तर पर प्रश्नों का मिलान पाया गया है, तो यह केवल संयोग नहीं माना जा सकता और इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
अब एनटीए के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई परीक्षा को पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से आयोजित करने की होगी। एजेंसी पर यह दबाव भी रहेगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी निगरानी, डिजिटल सुरक्षा और प्रश्नपत्र वितरण प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
फिलहाल देशभर के लाखों छात्र नई परीक्षा तारीखों का इंतजार कर रहे हैं। एनटीए ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही संशोधित परीक्षा कार्यक्रम और एडमिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि यह मामला केवल गेस पेपर तक सीमित था या फिर इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका मौजूद थी।


