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कोटा मंडी में धीमी खरीद पर मंत्री नागर नाराज

कोटा मंडी में धीमी खरीद पर मंत्री नागर नाराज

राजस्थान के कोटा में फसल खरीद सीजन के दौरान भामाशाह मंडी में गेहूं खरीद की धीमी रफ्तार और अव्यवस्थित व्यवस्थाओं को लेकर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। शनिवार को मंडी के तौल केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे मंत्री ने मौके पर हालात देखकर नाराजगी जताई और भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि इतनी बड़ी मंडी में खरीद व्यवस्था सुस्त होना किसानों के साथ अन्याय है और इसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।

निरीक्षण के दौरान मंत्री नागर ने मंडी में गेहूं तुलाई, सैंपलिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और माल उठाव की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने पाया कि मंडी की वास्तविक क्षमता के मुकाबले काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। मंत्री ने कहा कि भामाशाह मंडी जैसी बड़ी मंडी, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में अनाज की आवक होती है, वहां इस तरह की सुस्ती स्वीकार नहीं की जा सकती।

ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मंडी में रोजाना लगभग 80 हजार कट्टों की तुलाई की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में केवल 40 हजार कट्टों की ही तुलाई हो रही है। यानी आधी क्षमता पर काम चल रहा है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि खरीद सीजन के बीच इतनी बड़ी मंडी अपेक्षाकृत खाली पड़ी है। सामान्य परिस्थितियों में इस समय मंडी में किसानों की भारी भीड़ और तेज खरीद प्रक्रिया दिखाई देनी चाहिए थी।

मंत्री नागर ने कहा कि यदि संसाधनों का सही उपयोग और बेहतर प्रबंधन किया जाए तो तुलाई की संख्या एक लाख कट्टों तक पहुंच सकती है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि केवल क्षमता होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर उसका परिणाम भी दिखना चाहिए। किसानों की उपज समय पर नहीं खरीदी गई तो उन्हें आर्थिक नुकसान और अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

निरीक्षण के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन की धीमी प्रक्रिया भी मंत्री के निशाने पर रही। उन्होंने पाया कि किसानों के सत्यापन के लिए उपलब्ध मशीनों की संख्या बेहद कम है, जिससे लंबी प्रतीक्षा की स्थिति बन रही है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान में लगी तीन मशीनों की संख्या बढ़ाकर छह की जाए, ताकि किसानों का पंजीकरण और सत्यापन कार्य तेजी से पूरा हो सके।

उन्होंने यह भी देखा कि तौल केंद्र पर एक ही कर्मचारी को कई जिम्मेदारियां दी गई हैं। एक व्यक्ति बायोमेट्रिक सत्यापन, सैंपलिंग और अन्य कार्यों को संभाल रहा था, जिससे काम में देरी होना स्वाभाविक है। मंत्री ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कार्यों का उचित विभाजन होना चाहिए। उन्होंने अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और कार्यों के विकेंद्रीकरण के निर्देश दिए, ताकि हर प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

गेहूं के सैंपल की गुणवत्ता जांच और खरीदे गए माल के उठाव को लेकर भी मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एफसीआई के महाप्रबंधक राजेश चौधरी से फोन पर बात कर तत्काल व्यवस्था सुधारने को कहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सैंपल क्वालिटी चेक करने और माल उठाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि माल समय पर नहीं उठेगा तो मंडी में जाम की स्थिति बनेगी और किसानों को अपनी उपज बेचने में देरी होगी।

मंत्री नागर ने कहा कि खरीद प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान को समय पर तौल मिले और भुगतान में किसी तरह की देरी न हो। किसान अपनी मेहनत की फसल लेकर मंडी पहुंचता है और यदि उसे कई दिनों तक इंतजार करना पड़े तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मंडी कर्मचारियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने किसानों के साथ व्यवहार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान अन्नदाता हैं और उनके साथ सम्मानजनक, संवेदनशील और विनम्र व्यवहार होना चाहिए। मंडी में किसी किसान को मानसिक तनाव, अपमान या अनावश्यक दौड़भाग का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि किसान सेवा भाव से काम करें, क्योंकि कृषि व्यवस्था देश की रीढ़ है।

ऊर्जा मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि मंडी की स्थिति पर रोजाना नजर रखी जाए और प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाए। कितनी तुलाई हुई, कितने किसानों का सत्यापन हुआ, कितना माल उठाया गया और कहां समस्या है, इसकी लगातार समीक्षा होनी चाहिए। इससे खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

निरीक्षण के दौरान भारतीय खाद्य निगम, राजफैड, अतिरिक्त कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। मंत्री ने सभी विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि खरीद सीजन में किसी तरह की रुकावट न आए। उन्होंने कहा कि यदि विभाग आपसी तालमेल से काम करेंगे तो किसान को राहत मिलेगी और सरकार की खरीद नीति सफल होगी।

कोटा की भामाशाह मंडी राजस्थान की प्रमुख कृषि मंडियों में गिनी जाती है। यहां बड़ी मात्रा में गेहूं सहित अन्य फसलों की आवक होती है। ऐसे में खरीद सीजन के दौरान व्यवस्थाओं का सुचारू रहना बेहद जरूरी है। यदि तुलाई धीमी रहती है या माल उठाव समय पर नहीं होता तो किसानों को लंबे इंतजार, अतिरिक्त खर्च और नुकसान का सामना करना पड़ता है।

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