केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान तीन दिवसीय धार्मिक और राजनीतिक दौरे पर राजस्थान पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार सहित पुष्कर स्थित प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर में दर्शन किए और बाद में अजमेर शरीफ दरगाह पहुंचकर जियारत की। धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद उन्होंने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय राजनीति, महिला आरक्षण बिल, पश्चिम बंगाल की स्थिति, एनडीए गठबंधन और बिहार के विकास जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उनके बयान ने राजस्थान से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक नई चर्चा को जन्म दिया है।
राजस्थान दौरे के दौरान चिराग पासवान ने सबसे पहले कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस और उसके सहयोगी दल सत्ता में रहे, लेकिन उन्होंने कभी भी महिला आरक्षण को ईमानदारी से लागू करने की इच्छा नहीं दिखाई। उनके अनुसार कई बार इस बिल को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई, लेकिन अलग-अलग बहानों के जरिए इसे रोका गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिला आरक्षण को लेकर जो कदम उठाए गए हैं, वे ऐतिहासिक हैं और इससे महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। चिराग पासवान ने कहा कि कुछ विपक्षी दल परिसीमन यानी डीलिमिटेशन को मुद्दा बनाकर बिल के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में इससे बेहतर प्रस्ताव संभव नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सीटों का विस्तार होता है और एक तिहाई सीटों पर महिलाएं चुनकर आती हैं तो इससे लोकतंत्र और मजबूत होगा, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं चाहता।
चिराग पासवान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य हिंसा और अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और वहां भी डबल इंजन सरकार की सोच मजबूत हो रही है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल के लोग अब विकास, स्थिरता और बेहतर शासन की दिशा में सोच रहे हैं। उनका कहना था कि आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में लोग अब केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार चाहते हैं, ताकि विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सके। चिराग पासवान ने कहा कि एनडीए गठबंधन को जनता का समर्थन मिल रहा है और कई राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने की संभावना है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में कई प्रदेशों में एनडीए की स्थिति और मजबूत होगी।
कांग्रेस के भीतर असंतोष को लेकर भी चिराग पासवान ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई सांसद ऐसे हैं जो खुद को पार्टी में संतुष्ट महसूस नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य दलों में भी कई नेता नेतृत्व शैली और संगठनात्मक निर्णयों से नाराज हैं। आम आदमी पार्टी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह बड़ी टूट देखने को मिली, उससे स्पष्ट है कि कई दलों में आंतरिक असंतोष मौजूद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दल बदलने या निर्णय लेने का अधिकार संबंधित सांसदों और नेताओं का होता है।
बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के रिश्तों पर उठते सवालों का जवाब देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष यह भ्रम फैलाता है कि भाजपा अपने सहयोगियों का साथ नहीं देती। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता तो वे स्वयं एनडीए के साथ नहीं रहते। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनमें विकास की सोच है और वे सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की भावना रखते हैं। उन्होंने माना कि राष्ट्रीय दलों का अपना प्रभाव होता है, लेकिन कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राजस्थान दौरे के दौरान चिराग पासवान ने विकास के मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में राजस्थान के पास बड़ी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र को आगे बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है और कृषि उपज की बर्बादी को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विस्तार से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस विषय पर राजस्थान के मुख्यमंत्री से चर्चा करने की भी बात उन्होंने कही।
बिहार के भविष्य को लेकर भी चिराग पासवान ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्ष बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि लंबे समय बाद राज्य को डबल इंजन सरकार का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि बिहार विकास की दौड़ में लंबे समय तक पीछे रहा, जिसका एक कारण केंद्र और राज्य में अलग-अलग राजनीतिक सोच की सरकारें रही हैं। अब यह समय है जब राज्य में विकास को गति दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बिहार से पलायन रोकना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। रोजगार की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में जाते हैं, जिसे रोकने के लिए उद्योग, रोजगार और आधारभूत ढांचे पर तेजी से काम करना होगा। उन्होंने रिवर्स माइग्रेशन यानी बाहर गए लोगों को वापस राज्य में रोजगार देने की दिशा में भी योजनाएं बनाने की बात कही।
कुल मिलाकर राजस्थान दौरे पर चिराग पासवान ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति, महिला सशक्तिकरण, बंगाल चुनाव, एनडीए गठबंधन और बिहार विकास जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उनके बयान आने वाले राजनीतिक समीकरणों और चुनावी रणनीतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


