राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ शनिवार को कोटपूतली पहुंचे, जहां उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस और विशेष रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर तीखा हमला बोला। राठौड़ ने डोटासरा द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए को भाजपा और आरएसएस की एजेंसी बताए जाने वाले बयान पर जोरदार पलटवार किया और कहा कि कांग्रेस नेताओं को अपने शासनकाल के रिकॉर्ड पर पहले नजर डालनी चाहिए।
मदन राठौड़ ने कहा कि गोविंद सिंह डोटासरा अक्सर ऐसे बयान देते हैं जिनका कोई आधार नहीं होता। उन्होंने कहा कि एनटीए को आरएसएस की एजेंसी बताना पूरी तरह गलत और भ्रामक है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं और युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार इन मामलों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही थी।
राठौड़ ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार को घेरते हुए कहा कि इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा मामले में चयनित अभ्यर्थियों को दो साल नौकरी करने के बाद घर भेज दिया गया था। उनके अनुसार इससे हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ और उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। भाजपा नेता ने कहा कि इसके विपरीत एनटीए ने परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने के बाद तत्काल परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया, जिससे आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सका।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो छात्रों की तैयारी, मानसिक स्थिति और भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता था। राठौड़ ने दावा किया कि भाजपा सरकार युवाओं के हितों के प्रति संवेदनशील है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई करने की नीति पर काम कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने की अपील पर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी मदन राठौड़ ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसाधनों की बचत करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और इसमें राजनीति नहीं की जानी चाहिए। राठौड़ ने कहा कि जब कांग्रेस नेता पानी बचाओ और बिजली बचाओ जैसे अभियान चलाते थे, तब भाजपा ने उसका समर्थन किया था। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री ईंधन बचाने की बात कर रहे हैं तो इसमें कोई गलत बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि मितव्ययी जीवनशैली अपनाना समय की जरूरत है और देश के संसाधनों को बचाना सभी की जिम्मेदारी है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने विपक्ष पर केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को विवादित बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देशहित के विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।
पेपर लीक मामलों को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। राठौड़ ने कहा कि जो मामले सामने आए हैं, उनकी जड़ें राजस्थान से बाहर तक जुड़ी हुई हैं और सरकार हर स्तर पर जांच कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार केवल छोटे आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े और प्रभावशाली लोगों पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस नेता Mahesh Joshi का नाम लेते हुए कहा कि गहलोत सरकार के करीबी नेताओं पर कार्रवाई होना इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार निष्पक्ष तरीके से काम कर रही है। राठौड़ ने कहा कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, यदि वह दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई तय है।
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों से पेपर लीक का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के आरोपों ने लाखों युवाओं के बीच नाराजगी पैदा की है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक-दूसरे पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा जहां कांग्रेस शासनकाल में हुए पेपर लीक मामलों को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस वर्तमान सरकार और एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी समय में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा राजस्थान की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है। युवाओं और बेरोजगार अभ्यर्थियों के बीच यह विषय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में दोनों प्रमुख दल इस मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
कोटपूतली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मदन राठौड़ का बयान यह संकेत देता है कि भाजपा अब पेपर लीक मामलों पर कांग्रेस को सीधे घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस भी सरकार की कार्यप्रणाली और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।


