प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए आह्वान का असर अब प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी साफ दिखाई देने लगा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने आम लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ IPS विकास कुमार जब अपने सरकारी वाहन के बजाय साइकिल लेकर सड़क पर निकले तो लोग उन्हें देखते रह गए। रोजाना सरकारी गाड़ी और सुरक्षा व्यवस्था के साथ दफ्तर पहुंचने वाले अधिकारी को साधारण साइकिल पर देखकर राहगीर भी हैरान रह गए। विकास कुमार वर्तमान में राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में आईजी के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने ईंधन बचत का संदेश देने के लिए यह अनोखी पहल शुरू की है।
शुक्रवार सुबह जब विकास कुमार अपने आवास से कंधे पर बैग टांगकर साइकिल से निकले तो आसपास मौजूद लोगों को पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ कि यह वही वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें वे हमेशा सरकारी काफिले के साथ देखते आए हैं। जयपुर की एनआईआर कॉलोनी स्थित अपने आवास से वे सीधे जगतपुरा स्थित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के कार्यालय पहुंचे। आवास से कार्यालय की दूरी करीब चार किलोमीटर है। उन्होंने यह पूरा सफर साइकिल से तय किया और शाम को वापस घर भी साइकिल से ही लौटे। इस तरह उन्होंने एक दिन में करीब आठ किलोमीटर की यात्रा बिना किसी सरकारी वाहन के पूरी की।
कार्यालय पहुंचने पर वहां मौजूद स्टाफ भी चकित रह गया। कई कर्मचारियों ने पहली बार किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इस तरह साइकिल से कार्यालय आते देखा। हालांकि विकास कुमार का कहना है कि यह केवल एक दिन की पहल नहीं है। उन्होंने अगले एक महीने तक कार्यालय आने-जाने के लिए सरकारी वाहन का उपयोग नहीं करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि यदि अधिकारी खुद पहल करेंगे तो समाज में भी सकारात्मक संदेश जाएगा और आम लोग भी ईंधन बचाने के लिए प्रेरित होंगे।
विकास कुमार ने कहा कि पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन सीमित संसाधन हैं और इनके अत्यधिक उपयोग से न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ईंधन की खपत कम करने की कोशिश करनी चाहिए। छोटी दूरी के लिए साइकिल या पैदल चलने की आदत विकसित करना समय की जरूरत है। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करे तो देश स्तर पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में ईंधन बचत को लेकर की गई अपील के बाद देशभर में कई स्तरों पर पहल शुरू हुई है। पीएम मोदी ने खुद अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सरकारी काफिलों में कटौती और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हाल ही में जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहन से पहुंचे थे। ऐसे में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास कुमार ने भी इन पहलों से प्रेरणा लेते हुए साइकिल से कार्यालय जाने का निर्णय लिया।
ईंधन बचत की यह मुहिम केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रही। जयपुर पुलिस ने भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी दिखाई। जयपुर पुलिस आयुक्तालय के नॉर्थ जिले की टीम ने शुक्रवार शाम की गश्त साइकिल से की। डीसीपी करण शर्मा, एडिशनल डीसीपी बजरंग सिंह, नीरज पाठक सहित कई पुलिस अधिकारी और जवान साइकिल लेकर परकोटे की गलियों में निकले। पुलिसकर्मियों की यह साइकिल गश्त लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई। पुराने शहर की संकरी गलियों में साइकिल पर गश्त करते पुलिस अधिकारियों को देखकर लोग हैरान भी हुए और प्रभावित भी।
डीसीपी करण शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद पुलिस विभाग ने भी ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की है। उन्होंने कहा कि साइकिल गश्त से एक ओर जहां ईंधन की बचत होगी, वहीं दूसरी ओर पुलिस और आम जनता के बीच संवाद भी बेहतर होगा। साइकिल के माध्यम से पुलिसकर्मी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अधिक आसानी से पहुंच सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं होती, बल्कि समाज में व्यवहारिक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं सादगी और जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं तो आम नागरिकों पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आज के समय में बढ़ता प्रदूषण, लगातार महंगे होते ईंधन और पर्यावरण संकट पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में साइकिल जैसे साधारण लेकिन प्रभावी विकल्प को बढ़ावा देना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
विकास कुमार का यह कदम प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ सामाजिक चेतना का भी उदाहरण माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्र सेवा केवल बड़े निर्णयों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी जिम्मेदारियों को निभाने से भी होती है। सीमित संसाधनों का संतुलित उपयोग और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता आज हर नागरिक का कर्तव्य है। जयपुर में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की यह पहल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे ईंधन बचत तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।


