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पचपदरा रिफाइनरी में आग लगने की पूरी घटना जानिए

पचपदरा रिफाइनरी में आग लगने की पूरी घटना जानिए

राजस्थान के पचपदरा में स्थित महत्वाकांक्षी रिफाइनरी परियोजना को लेकर पिछले एक सप्ताह से व्यापक स्तर पर तैयारियां चल रही थीं। यह मौका देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल परियोजना के उद्घाटन का था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने का कार्यक्रम तय किया गया था। आयोजन स्थल को पूरी तरह तैयार कर लिया गया था, जहां सैकड़ों कुर्सियां लगाई गई थीं और गर्मी को देखते हुए कूलर तथा पंखों की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा के लिहाज से भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क था और राजस्थान पुलिस के साथ अन्य एजेंसियां हाई अलर्ट पर थीं। सभी की निगाहें 21 अप्रैल की सुबह पर टिकी थीं, जब प्रधानमंत्री के हाथों इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का उद्घाटन होना था।

हालांकि इस भव्य आयोजन से ठीक एक दिन पहले, सोमवार को घटी एक अप्रत्याशित घटना ने पूरे कार्यक्रम की दिशा बदल दी। दोपहर के समय रिफाइनरी परिसर में अचानक आग लगने से अफरातफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा सिस्टम फेलियर के कारण हुआ, जिसने कुछ ही मिनटों में एक सामान्य तकनीकी गड़बड़ी को बड़े खतरे में बदल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल एक इंजीनियर के अनुसार रिफाइनरी की दो महत्वपूर्ण इकाइयों क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट और वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट के मशीनरी हिस्सों में अचानक घर्षण बढ़ गया। इस घर्षण से निकली चिंगारी ने तेजी से आसपास मौजूद ज्वलनशील पदार्थों को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।

घटना के समय रिफाइनरी का अधिकांश स्टाफ लंच ब्रेक पर था, जिससे शुरुआती कुछ मिनटों में स्थिति को संभालने में कठिनाई आई। जैसे ही सायरन बजा, पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था पहले से सक्रिय होने के कारण फायर सेफ्टी सिस्टम ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया। इसके बावजूद मशीनों में अधिक मात्रा में मौजूद तेल के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और कुछ ही समय में पूरे प्रोसेस प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। प्रशासन पहले से हाई अलर्ट पर था, इसलिए राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं हुई। दमकल कर्मियों और तकनीकी टीमों ने करीब दो घंटे तक लगातार प्रयास कर आग पर काबू पाया। अधिकारियों के अनुसार यदि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो यह हादसा और भी भयावह रूप ले सकता था।

तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि रिफाइनरी की CDU और VDU जैसी प्रमुख इकाइयां इस परियोजना की रीढ़ मानी जाती हैं। अगर ये यूनिट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जातीं, तो न केवल उत्पादन प्रक्रिया ठप हो जाती, बल्कि इससे हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान भी हो सकता था। अनुमान है कि स्थिति बिगड़ने पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक की क्षति हो सकती थी। हालांकि समय पर की गई कार्रवाई से बड़े नुकसान को टाल लिया गया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। सुरक्षा और तकनीकी कारणों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया, ताकि किसी भी तरह के जोखिम से बचा जा सके। प्रशासन और रिफाइनरी प्रबंधन अब पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रहे हैं, ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

पचपदरा रिफाइनरी परियोजना को राजस्थान के औद्योगिक विकास के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस परियोजना के शुरू होने से न केवल राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। ऐसे में उद्घाटन से ठीक पहले हुआ यह हादसा निश्चित रूप से चिंता का विषय है। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय पर कार्रवाई के चलते किसी प्रकार की जनहानि की खबर सामने नहीं आई।

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