राजस्थान के पचपदरा में 20 अप्रैल को हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन और राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। इस घटना ने न केवल औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे के रद्द होने के बाद हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति का विस्तृत जायजा लिया। उनका यह दौरा प्रशासनिक सक्रियता और सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने रिफाइनरी परिसर में करीब ढाई घंटे तक अधिकारियों और तकनीकी टीमों के साथ बैठक कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने हादसे के कारणों, नुकसान की स्थिति और सुरक्षा उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उनके साथ राज्य के कानून मंत्री जोगाराम पटेल और मुख्य सचिव वी श्रीनिवास भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका। हालांकि घटना ने सुरक्षा मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को जरूर उजागर कर दिया है।
हादसे के बाद रिफाइनरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त कर दिया गया है। विशेष रूप से गेट नंबर एक और दो पर निगरानी बढ़ा दी गई है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। इसके साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है और संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल का गठन कर सकती है।
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने घटना को लेकर बयान देते हुए कहा कि रिफाइनरी के केवल एक छोटे हिस्से को नुकसान पहुंचा है और एचपीसीएल के इंजीनियर उसे जल्द ठीक करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि निर्धारित समय के अनुसार रिफाइनरी का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। एचपीसीएल की ओर से भी जारी बयान में कहा गया है कि सभी प्रमुख इकाइयां संरचनात्मक रूप से सुरक्षित हैं और आग का अन्य हिस्सों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि परियोजना को जल्द पटरी पर लाने के प्रयास जारी हैं।
दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। जोगाराम पटेल ने विपक्षी दलों को सलाह दी कि इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने से बचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिफाइनरी से जुड़े टेंडर और तकनीकी प्रक्रियाएं राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं, बल्कि यह केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के स्तर पर तय होती हैं। ऐसे में बिना तथ्यों के बयान देना उचित नहीं है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना पर चिंता जताते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां प्रधानमंत्री का कार्यक्रम प्रस्तावित था, वहां एक दिन पहले आग लगना गंभीर मामला है और इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। गहलोत ने यह भी कहा कि सुरक्षा मानकों में कहीं न कहीं चूक हुई है, जिसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।
कांग्रेस के अन्य नेताओं जैसे टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की है। उन्होंने रिफाइनरी में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इतने बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट में इस तरह की घटना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है।
उद्घाटन कार्यक्रम के टलने के बाद अब नई तारीख को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जोगाराम पटेल ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही प्रधानमंत्री की उपलब्धता के अनुसार नई तारीख घोषित की जाएगी और उसी के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सरकार इस परियोजना को लेकर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी के बजाय सुरक्षा और गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रही है।


