देश में निवेश के कई विकल्प मौजूद होने के बावजूद फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD आज भी लोगों के बीच सबसे भरोसेमंद निवेश साधनों में गिनी जाती है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और म्यूचुअल फंड जैसे बाजार आधारित निवेशों के जोखिम के बीच बड़ी संख्या में लोग अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए FD को प्राथमिकता देते हैं। खासकर रिटायर हो चुके वरिष्ठ नागरिक और नियमित आय चाहने वाले निवेशक बैंक एफडी को स्थिर और सुरक्षित विकल्प मानते हैं। यही वजह है कि आज भी लाखों लोग अपनी बचत का बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं ताकि उन्हें हर महीने निश्चित आय मिलती रहे।
रिटायरमेंट के बाद अधिकतर लोगों की सबसे बड़ी चिंता नियमित मासिक आय को लेकर होती है। नौकरी या व्यवसाय से मिलने वाली कमाई बंद होने के बाद ऐसे निवेश की जरूरत महसूस होती है, जो बिना जोखिम के हर महीने एक तय रकम उपलब्ध कराता रहे। इसी कारण नॉन-क्यूम्युलेटिव FD का विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस प्रकार की FD में निवेशक को ब्याज हर महीने, तिमाही या अन्य निर्धारित अंतराल पर मिलता रहता है, जबकि मूल राशि सुरक्षित रहती है। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है जिन्हें हर महीने खर्च चलाने के लिए नियमित नकदी की आवश्यकता होती है।
यदि कोई व्यक्ति हर महीने 10 हजार रुपये की आय चाहता है, तो उसे सालभर में कुल 1 लाख 20 हजार रुपये ब्याज के रूप में चाहिए होंगे। इसके लिए कितना निवेश करना होगा, यह पूरी तरह बैंक की ब्याज दर पर निर्भर करता है। वर्तमान समय में अलग-अलग बैंक और वित्तीय संस्थान अलग-अलग ब्याज दरें दे रहे हैं। आमतौर पर ब्याज दर जितनी अधिक होगी, उतनी कम मूल राशि निवेश करनी पड़ेगी।
अगर कोई बैंक सालाना 6 प्रतिशत ब्याज दे रहा है, तो हर महीने 10 हजार रुपये की आय प्राप्त करने के लिए लगभग 20 लाख रुपये की FD करनी होगी। वहीं यदि ब्याज दर 7 प्रतिशत हो तो आवश्यक निवेश घटकर करीब 17.14 लाख रुपये रह जाता है। इसी तरह 7.25 प्रतिशत ब्याज दर पर लगभग 16.55 लाख रुपये जमा करने होंगे। यदि बैंक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज दे रहा है, तो करीब 16 लाख रुपये की FD पर्याप्त हो सकती है। वहीं 8 प्रतिशत ब्याज दर मिलने पर लगभग 15 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट से हर महीने 10 हजार रुपये तक की नियमित आय प्राप्त की जा सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में छोटे फाइनेंस बैंक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बड़े बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं। यही कारण है कि कई निवेशक अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों की FD योजनाओं में भी रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि निवेश से पहले बैंक की विश्वसनीयता, सुरक्षा और जमा बीमा संबंधी नियमों को समझना भी जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल अधिक ब्याज दर देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए, बल्कि बैंक की वित्तीय स्थिति और सुरक्षा मानकों का भी ध्यान रखना चाहिए।
वरिष्ठ नागरिकों को फिक्स्ड डिपॉजिट पर आम निवेशकों की तुलना में अतिरिक्त लाभ मिलता है। अधिकांश बैंक सीनियर सिटीजंस को करीब 0.50 प्रतिशत तक अधिक ब्याज प्रदान करते हैं। इसका फायदा यह होता है कि वरिष्ठ नागरिक अपेक्षाकृत कम निवेश में भी बेहतर मासिक आय प्राप्त कर सकते हैं। यही वजह है कि रिटायरमेंट के बाद FD को स्थायी आय का सबसे लोकप्रिय साधन माना जाता है।
हालांकि FD में निवेश करने से पहले टैक्स नियमों को समझना भी बेहद जरूरी है। फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज आयकर नियमों के तहत “इनकम फ्रॉम अदर सोर्स” की श्रेणी में आता है। इसका मतलब यह है कि FD से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल वार्षिक आय में जुड़ जाता है और उसी के अनुसार टैक्स देनदारी तय होती है। यदि किसी व्यक्ति की कुल आय टैक्स स्लैब में आती है, तो उसे FD के ब्याज पर भी टैक्स देना होगा।
पुराने टैक्स सिस्टम के तहत वरिष्ठ नागरिकों को विशेष राहत भी दी जाती है। आयकर अधिनियम की धारा 80TTB के तहत वरिष्ठ नागरिक बैंक ब्याज आय पर 50 हजार रुपये तक की छूट प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पांच साल की टैक्स सेविंग FD में निवेश करने पर धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती का लाभ भी लिया जा सकता है। इस कारण कई लोग टैक्स बचत और सुरक्षित निवेश दोनों उद्देश्यों के लिए FD को चुनते हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट पर TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स के नियम भी लागू होते हैं। यदि किसी वित्त वर्ष में FD से मिलने वाला ब्याज तय सीमा से अधिक हो जाता है, तो बैंक ब्याज भुगतान से पहले TDS काट लेते हैं। वित्त वर्ष 2025 के नियमों के अनुसार सामान्य निवेशकों के लिए यह सीमा 50 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये तक रखी गई है। यदि निवेशक ने बैंक को PAN उपलब्ध कराया है, तो आमतौर पर 10 प्रतिशत की दर से TDS काटा जाता है।
जिन लोगों की कुल आय टैक्स योग्य नहीं है, वे निर्धारित शर्तें पूरी करके TDS कटने से बच सकते हैं। इसके लिए जरूरी दस्तावेज और घोषणा पत्र बैंक में जमा करने होते हैं। हाल के वर्षों में टैक्स प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है ताकि निवेशकों को आसानी हो सके।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि FD उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो जोखिम से बचना चाहते हैं और नियमित आय को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि महंगाई और बदलती ब्याज दरों को देखते हुए निवेशकों को अपनी जरूरत और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार योजना बनानी चाहिए। सही बैंक और उपयुक्त ब्याज दर का चयन करके फिक्स्ड डिपॉजिट के जरिए सुरक्षित और स्थिर मासिक आय प्राप्त की जा सकती है।


