राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में भीषण गर्मी के बीच गहराते पेयजल और बिजली संकट को लेकर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रशासनिक अधिकारियों पर खुलकर नाराजगी जताई। फलसूंड क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने शनिवार रात ग्रामीणों के बीच रात्रि चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर मौजूद अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कड़े निर्देश दिए। चौपाल के दौरान मंत्री का रुख काफी सख्त दिखाई दिया और उन्होंने स्पष्ट कहा कि पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रात्रि चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने क्षेत्र में बढ़ती पेयजल किल्लत, टैंकर सप्लाई में अनियमितता, बिजली ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज जैसी समस्याओं को मंत्री के सामने रखा। ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल विभागीय विफलता नहीं बल्कि जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर का भी फेलियर है। उन्होंने कहा कि इससे पहले हुई दिशा समिति की बैठक में भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसके बावजूद हालात में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा।
केंद्रीय मंत्री ने पूर्व जिला कलेक्टर का जिक्र करते हुए तंज कसा कि शायद उन्हें यहां से जल्दी जाने की चिंता थी, इसलिए जमीनी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी क्षेत्र जैसलमेर में पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी हुई हैं और इन व्यवस्थाओं में ढिलाई किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
चौपाल के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा पेयजल संकट को लेकर रही। शेखावत ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग यानी PHED की व्यवस्था को लगभग कोलैप्स बताते हुए कहा कि टैंकर सप्लाई और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों से टैंकरों के संचालन, उनके रूट, पानी वितरण व्यवस्था और सप्लाई से जुड़े पूरे सिस्टम की जानकारी मांगी। साथ ही निर्देश दिए कि पानी वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और सबसे पहले उन गरीब एवं जरूरतमंद लोगों तक पानी पहुंचे, जिनके पास किसी प्रकार की पैरवी या पहुंच नहीं है।
मंत्री ने इस दौरान भ्रष्टाचार को लेकर भी बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से साफ शब्दों में चेतावनी दी कि पानी के नाम पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग पानी के पैसों में चोरी करेंगे, उनका वही हाल होगा जैसा पूर्व मंत्री महेश जोशी का हुआ। उन्होंने कहा कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली ठेकेदार क्यों न हो, यदि वह आम जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शेखावत ने यह भी कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है और किसी प्रकार की सिफारिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
पानी के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों और पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजस्थान के कई हिस्सों में बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन जैसलमेर जिले की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय अधिकारियों ने केंद्र सरकार को जिले में 100 प्रतिशत बिजली कनेक्शन देने के गलत आंकड़े भेज दिए थे, जबकि वास्तविकता यह है कि आज भी कई ग्रामीण परिवार बिजली सुविधा से वंचित हैं।
शेखावत ने कहा कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से बातचीत कर संबंधित योजना को अतिरिक्त 1000 दिनों के लिए दोबारा शुरू करवाया ताकि जिन परिवारों तक बिजली नहीं पहुंची है, उन्हें लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबित बिजली कनेक्शन, बार-बार ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और खराब ट्रांसफॉर्मर जैसी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि रेगिस्तानी इलाकों में भीषण गर्मी के दौरान पानी और बिजली की समस्या लोगों के लिए केवल असुविधा नहीं बल्कि जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन जाती है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने अधिकारियों से फुलप्रूफ मैकेनिज्म के तहत काम करने को कहा ताकि भविष्य में लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
रात्रि चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने भी मंत्री के सामने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। कई ग्रामीणों ने शिकायत की कि कई गांवों में कई दिनों तक पानी नहीं पहुंचता और लोगों को निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं बिजली कटौती और कम वोल्टेज के कारण घरेलू उपकरणों के खराब होने और खेती-किसानी के कार्य प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आईं।
जैसलमेर जैसे सीमावर्ती और रेगिस्तानी जिले में पानी और बिजली की उपलब्धता हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। गर्मियों के मौसम में यह संकट और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री का यह दौरा और अधिकारियों को दी गई चेतावनी प्रशासनिक स्तर पर आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकती है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इन निर्देशों पर कितनी तेजी और गंभीरता से अमल करते हैं।


