शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति में अपनी सादगी, ईमानदारी और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भरतपुर जिले के वरिष्ठ नेता गिर्राज प्रसाद तिवारी का 105 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी मृत्यु की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों और समर्थकों के साथ-साथ राजनीतिक जगत के दिग्गजों ने भी इस खबर को बेहद दुखद बताया। गिर्राज प्रसाद तिवारी न केवल भाजपा बल्कि राजस्थान की राजनीति में एक ऐसा नाम थे, जिनका सम्मान सभी दलों के नेताओं के बीच था।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे मुख्यमंत्री और नेता
तिवारी के निधन की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, वित्त आयोग के चेयरमैन अरुण चतुर्वेदी, स्थानीय विधायक और भाजपा नेताओं का बड़ा दल भरतपुर जिले के बयाना स्थित उनके पैतृक गांव बिड्यारी पहुंचा। दोपहर 1.15 बजे मुख्यमंत्री ने तिवारी के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गिर्राज प्रसाद तिवारी का जीवन हर राजनेता के लिए प्रेरणास्रोत है। वे अनुशासन, समर्पण और सेवा भाव के प्रतीक थे।
पैतृक गांव में अंतिम संस्कार
गिर्राज प्रसाद तिवारी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बिड्यारी, बयाना में किया गया। अंतिम संस्कार में परिजनों, स्थानीय लोगों, समर्थकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। पूरा गांव शोक में डूबा नजर आया। इस दौरान न केवल भाजपा बल्कि अन्य दलों के कार्यकर्ता और नेता भी मौजूद रहे, जिससे यह साफ झलकता है कि तिवारी को किस तरह सर्वमान्य नेता के रूप में सम्मान प्राप्त था।
नेताओं की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अलावा भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं ने तिवारी को श्रद्धांजलि दी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि गिर्राज प्रसाद तिवारी का निधन अत्यंत दुखद है। उनका संयमित और प्रेरणादायक जीवन सभी के लिए उदाहरण था। गहलोत ने यह भी कहा कि इतनी उम्र में भी उनकी जिंदादिली और तेज स्मरणशक्ति लोगों को प्रभावित करती थी।
गिर्राज प्रसाद तिवारी का जीवन परिचय
गिर्राज प्रसाद तिवारी का जन्म 1920 में हुआ था। शुरुआती जीवन में उन्होंने वकालत को अपना पेशा बनाया और इस क्षेत्र में अपनी मेहनत और प्रतिभा से पहचान बनाई। धीरे-धीरे उन्होंने राजनीति की ओर कदम बढ़ाया और समाज सेवा के जरिए जनता से गहरा जुड़ाव बनाया। वे स्थानीय स्तर पर प्रधान और जिला प्रमुख जैसे पदों पर रहकर जनसेवा करते रहे। उनके कार्यों ने उन्हें लोकप्रिय नेता बनाया और जनता ने उन्हें विधायक के रूप में विधानसभा भेजा।
राजनीतिक करियर
गिर्राज प्रसाद तिवारी का राजनीतिक करियर अनुकरणीय रहा। वे दो बार विधायक चुने गए और विधानसभा में जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया। उनका सबसे अहम कार्यकाल 1985 से 1990 तक रहा जब वे राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के पद पर आसीन हुए। इस दौरान उनकी निष्पक्षता, संयम और नेतृत्व कौशल की सराहना हर ओर हुई। उन्होंने सदन की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व में विधानसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चली और वे सभी दलों के विधायकों के बीच समान सम्मान पाते रहे।
तिवारी का योगदान
राजनीति में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। उन्होंने सदैव जनहित को प्राथमिकता दी और अपने क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास किए। भरतपुर और बयाना क्षेत्र में शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में उनकी सक्रिय भूमिका रही। तिवारी अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार से दूर रहे और ईमानदारी की मिसाल पेश की। यही वजह है कि वे अपने राजनीतिक जीवन में हर किसी के लिए आदर्श बने रहे।
जनता के बीच छवि
गिर्राज प्रसाद तिवारी की छवि एक सुलझे हुए, सरल और सहज नेता की रही। ग्रामीण क्षेत्रों में वे सीधे जनता से जुड़ते थे और समस्याओं को सुनकर समाधान कराने की कोशिश करते थे। इतनी लंबी उम्र तक सक्रिय और सकारात्मक रहने की उनकी क्षमता उन्हें अलग पहचान दिलाती थी। 105 वर्ष की आयु में भी उनकी जिंदादिली और स्मरणशक्ति अद्भुत थी, जिसका उल्लेख कई बार उनके सहयोगियों और नेताओं ने किया।
गिर्राज प्रसाद तिवारी का निधन राजस्थान की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवनकाल में ईमानदारी, सेवा और निष्पक्षता की ऐसी मिसाल कायम की, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी। उनके निधन से न केवल भरतपुर और बयाना बल्कि पूरे राजस्थान ने एक सच्चा जननेता खो दिया है।


