राजस्थान इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सूरज की तेज तपिश और दोपहर के समय चलने वाली गर्म हवाओं ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान करने लगती है और दोपहर होते-होते हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि सड़कों पर आवाजाही लगभग थम जाती है। बाजारों, चौराहों और मुख्य सड़कों पर दोपहर के समय कर्फ्यू जैसा सन्नाटा देखने को मिल रहा है।
राजधानी जयपुर सहित जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में गर्मी का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। तेज धूप और लू के कारण लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। अधिकांश लोग दिन के समय घरों में रहकर गर्मी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। दोपहर के समय शहरों की सड़कें लगभग खाली नजर आती हैं और बाजारों में ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा रही है।
भीषण गर्मी का असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए घर से बाहर निकलना मजबूरी है। दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, ठेला संचालक और निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को इस झुलसा देने वाली गर्मी में काम करना पड़ रहा है। तेज धूप के बीच काम करने से लोगों को चक्कर आने, शरीर में पानी की कमी और थकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई मजदूर सड़क किनारे पेड़ों या अस्थायी छायादार स्थानों पर बैठकर आराम करते दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान के कई शहरों में दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी सफर करना बेहद कठिन हो गया है। महिलाएं और पुरुष दोनों ही गर्मी से बचने के लिए अपने चेहरों को कपड़ों से पूरी तरह ढककर निकल रहे हैं। लोग सिर पर गमछा, दुपट्टा या सूती कपड़ा बांधकर धूप से बचने की कोशिश कर रहे हैं। आंखों को तेज धूप से बचाने के लिए चश्मों का उपयोग बढ़ गया है। इसके बावजूद गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को राहत नहीं दे पा रहे हैं।
गर्मी का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर सुबह जल्दी काम शुरू कर रहे हैं ताकि दोपहर की तेज गर्मी से बचा जा सके। कई गांवों में दोपहर के समय सड़कें सूनी पड़ जाती हैं और लोग घरों के अंदर रहने को मजबूर हो जाते हैं। गर्म हवाओं के कारण पेयजल की मांग भी तेजी से बढ़ गई है, जिससे कई इलाकों में पानी की किल्लत की समस्या सामने आने लगी है।
इस भीषण गर्मी का असर पशु-पक्षियों पर भी गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। जल स्रोतों के सूखने और तापमान बढ़ने से पक्षियों और जानवरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बीकानेर के एक रेस्क्यू सेंटर में कछुओं को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। उन्हें ठंडी और गीली मिट्टी में रखा जा रहा है ताकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रखा जा सके। इसके अलावा कई सामाजिक संगठन पक्षियों के लिए परिंडे लगाने और पानी की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।
गर्मी के कारण अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, उल्टी, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याओं से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि अत्यधिक गर्मी उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने की सलाह दी है।
मौसम विभाग और प्रशासन लगातार लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। लोगों को दोपहर के समय बिना जरूरी काम के बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर और चेहरे को ढककर निकलने, हल्के सूती कपड़े पहनने और समय-समय पर पानी पीते रहने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ओआरएस का घोल, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती गर्मी जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेतों में से एक है। हर साल तापमान में बढ़ोतरी और हीटवेव की अवधि लंबी होती जा रही है, जिससे आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। राजस्थान जैसे रेगिस्तानी राज्य में गर्मी पहले से ही चुनौती रही है, लेकिन इस बार की भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करने की आवश्यकता है ताकि इस भीषण गर्मी के प्रभाव से बचा जा सके।


