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किताब विवाद पर डोटासरा का बीजेपी पर हमला

किताब विवाद पर डोटासरा का बीजेपी पर हमला

राजस्थान में स्कूली पाठ्यक्रम से कुछ किताबों को हटाए जाने का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सीकर स्थित अपने निजी आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से एक विशेष विचारधारा को स्थापित करने की कोशिश है।

डोटासरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आजादी से पहले और बाद के भारत के गौरवशाली इतिहास को पाठ्यक्रम से हटाना बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार, इससे नई पीढ़ी को अपने इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक विरासत की सही जानकारी नहीं मिल पाएगी। उन्होंने इस कदम को एक सुनियोजित “ब्रेनवॉश अभियान” करार दिया, जिसके जरिए बच्चों के मन में एकतरफा विचारधारा डाली जा रही है।

दरअसल, राज्य के शिक्षा विभाग ने हाल ही में 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा की चार पुस्तकों को पाठ्यक्रम से हटाने का निर्णय लिया है। इन पुस्तकों में राजस्थान के इतिहास और देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्याय शामिल थे। यही कारण है कि कांग्रेस इस फैसले को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और इसे शिक्षा के साथ छेड़छाड़ बता रही है।

डोटासरा ने आरोप लगाया कि यह निर्णय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रभाव में लिया गया है और इसके जरिए सरकारी स्कूलों में आरएसएस की विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और विद्यार्थियों पर एक खास सोच थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को स्वतंत्र सोच और व्यापक दृष्टिकोण देना होना चाहिए, न कि उन्हें किसी एक विचारधारा के दायरे में सीमित करना।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब 11वीं और 12वीं कक्षाओं में “आजादी के पहले और बाद का स्वर्णिम भारत” जैसी पुस्तकें शुरू की गई थीं। इन पुस्तकों के जरिए विद्यार्थियों को राजस्थान के शौर्य, स्वतंत्रता संग्राम और ऐतिहासिक योगदान के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती थी। डोटासरा के अनुसार, इन प्रयासों की सराहना देशभर में हुई थी और राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं ने भी इसे सकारात्मक पहल माना था। ऐसे में अब इन पुस्तकों को हटाया जाना शिक्षा के स्तर को कमजोर करने वाला कदम है।

डोटासरा ने यह भी कहा कि अगर सरकार के पास इससे बेहतर और अधिक आधुनिक पाठ्यक्रम उपलब्ध है, तो उसे सामने लाना चाहिए, लेकिन बिना ठोस विकल्प के पुस्तकों को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा में सुधार और नवाचार जरूरी हैं, लेकिन इसके नाम पर इतिहास को हटाना या बदलना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया और कहा कि आज के दौर में शिक्षा को आधुनिक बनाने की जरूरत है। लेकिन इसके बजाय अगर सरकार केवल किताबों के जरिए वैचारिक प्रचार कर रही है, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थानों और कर्मचारियों का उपयोग किसी विशेष संगठन के प्रचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस अब विधानसभा से लेकर लोकसभा तक आवाज उठाने की तैयारी में है। डोटासरा ने साफ कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले का हर स्तर पर विरोध करेगी और इसे वापस लेने की मांग करेगी। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या वैचारिक दखलअंदाजी लंबे समय में समाज के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

इसके साथ ही डोटासरा ने राष्ट्रीय राजनीति पर भी टिप्पणी की और आम आदमी पार्टी को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को दबाव और डर के जरिए भाजपा में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने आम आदमी पार्टी को भाजपा की “बी टीम” बताते हुए कहा कि इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

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