अजमेर में नारी वंदन अधिनियम को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब BJP देहात महिला मोर्चा ने कांग्रेस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। महिला कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकालकर विरोध दर्ज कराया और कांग्रेस पर महिलाओं के अधिकारों तथा राजनीतिक भागीदारी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की, राहुल गांधी का पुतला जलाया और महिला सम्मान के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने का प्रयास किया। कार्यक्रम में भाजपा के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल रहीं।
भाजपा देहात महिला मोर्चा द्वारा आयोजित यह प्रदर्शन अजमेर में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में महिला आरक्षण और नारी वंदन अधिनियम को लेकर देशभर में चर्चा तेज रही है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि संसद में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में लाए गए नारी वंदन अधिनियम का कांग्रेस ने विरोध किया और इससे महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंची है।
प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने शहर में पदयात्रा निकाली। हाथों में तख्तियां और पार्टी के झंडे लेकर निकली महिलाओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए। “नारी शक्ति का अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्तान” जैसे नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध प्रकट किया। पदयात्रा के दौरान माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में दिखाई दिया और भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व को महिला विरोधी बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।
कार्यक्रम में भाजपा देहात जिलाध्यक्ष जीतमल प्रजापत ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से नारी वंदन अधिनियम पेश किया, लेकिन कांग्रेस ने इसका विरोध कर महिलाओं के सपनों को तोड़ने का काम किया। उनके अनुसार यह कानून महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है और इसका विरोध करना महिलाओं की आकांक्षाओं का विरोध करने जैसा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देती रही है। चाहे उज्ज्वला योजना हो, मातृत्व से जुड़ी योजनाएं हों, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना हो या राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास, हर स्तर पर महिलाओं को आगे लाने के लिए काम किया गया है। ऐसे में नारी वंदन अधिनियम का विरोध करने वालों की मानसिकता जनता समझ चुकी है।
भाजपा देहात महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मुकेश कंवर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण की बात तो की, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके लिए ठोस कार्य नहीं किए। उन्होंने आरोप लगाया कि साधारण परिवारों से आने वाली महिलाओं को राजनीति में अवसर देने के बजाय कांग्रेस ने सीमित दायरे की राजनीति की। उनके अनुसार भाजपा महिलाओं को नेतृत्व के नए अवसर देने में विश्वास रखती है।
मुकेश कंवर ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से लोकतंत्र और मजबूत होता है। यदि पंचायत से संसद तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा तो नीतियों में संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन भी बढ़ेगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का लक्ष्य महिलाओं को केवल वोटर नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्ति बनाना है।
भाजपा नेता सरिता गेना ने भी कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि नारी वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस असहज रही और इसे रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे समझती हैं कि कौन-सी पार्टी उनके हित में काम कर रही है। उनके अनुसार आने वाले समय में देश की आधी आबादी लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी का पुतला दहन भी किया गया, जिसे भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के विरोध का प्रतीक बताया। पुतला दहन के समय कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और कहा कि महिला सम्मान के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण और नारी वंदन अधिनियम जैसे मुद्दे आने वाले समय में चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं। भाजपा इन मुद्दों को महिला मतदाताओं से जोड़कर राजनीतिक समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष इस पर अलग दृष्टिकोण रखता है। ऐसे में अजमेर जैसे शहरों में हो रहे प्रदर्शन संकेत देते हैं कि यह मुद्दा स्थानीय स्तर तक पहुंच चुका है।
अजमेर में हुए इस प्रदर्शन ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा महिला मोर्चा संगठनात्मक रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहा है। महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी और सार्वजनिक प्रदर्शन के जरिए पार्टी महिला मतदाताओं तक अपना संदेश पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला संगठनों को सक्रिय कर राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश दिखाई दे रही है।


