राजस्थान में शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सरकारी विभागों में तबादलों से बैन हटाने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला लिया जा सकता है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और ईंधन बचत को लेकर केंद्र सरकार की अपील के अनुरूप राजस्थान सरकार भी कुछ बड़े कदम उठा सकती है। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकारी खर्चों में कटौती, फ्यूल सेविंग और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश के कई भाजपा विधायकों ने पिछले कुछ समय से तबादलों पर लगी रोक हटाने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी है। विधायकों का कहना है कि लंबे समय से तबादले बंद होने के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों में भी असंतोष बढ़ रहा है। सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों ने यह फीडबैक भी दिया है कि यदि सरकार तबादलों पर लगी रोक हटाती है तो इसका राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि अब सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है।
राज्य सरकार यदि तबादलों से बैन हटाने का फैसला लेती है तो इसके बाद प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से आधिकारिक सर्कुलर जारी किया जाएगा। माना जा रहा है कि कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होगी और बैठक के बाद आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं। लंबे समय से कर्मचारी संगठन भी तबादलों की प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में इस फैसले का असर प्रदेश के हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों पर पड़ सकता है।
कैबिनेट बैठक में केवल तबादलों का मुद्दा ही नहीं, बल्कि सरकारी खर्चों में कटौती और फ्यूल बचत को लेकर भी कई अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने अपने काफिलों में शामिल वाहनों की संख्या कम कर एक संदेश देने की कोशिश की थी। अब सरकार इस दिशा में और आगे बढ़ते हुए सरकारी विभागों के लिए नई गाइडलाइन लागू कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ऊर्जा संरक्षण और फ्यूल बचत को लेकर की गई अपील के बाद राज्यों में इस तरह के कदमों पर जोर बढ़ा है।
राजस्थान सरकार भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कई फैसले लागू करने पर विचार कर रही है। चर्चा है कि सरकारी विभागों में फिजिकल बैठकों की संख्या कम कर वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा दिया जा सकता है। अधिकारियों और कर्मचारियों को केवल अत्यंत जरूरी परिस्थितियों में ही आमने-सामने बैठकें करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। सरकार का मानना है कि वर्चुअल बैठकों से समय और ईंधन दोनों की बचत होगी, साथ ही प्रशासनिक कार्यों में तेजी भी आएगी।
इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ज्यादा इस्तेमाल के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है। माना जा रहा है कि सरकार इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। सरकारी कामकाज में निजी वाहनों के उपयोग को सीमित करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की योजना पर भी विचार हो रहा है। इससे एक ओर ईंधन की खपत कम होगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सूत्रों के मुताबिक सरकार सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” लागू करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। यदि ऐसा फैसला लिया जाता है तो उस दिन सरकारी कर्मचारी और अधिकारी दफ्तर आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे। इस पहल का उद्देश्य ईंधन बचत के साथ-साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी माना जा रहा है। देश के कई राज्यों में इस तरह की पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
राजस्थान सरकार वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए मितव्ययता सर्कुलर जारी करने की तैयारी भी कर सकती है। वित्त विभाग पहले भी समय-समय पर सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। इस बार भी अनावश्यक खर्चों को कम करने, सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग और ईंधन बचत को लेकर विशेष गाइडलाइन लाई जा सकती है। माना जा रहा है कि सरकारी कार्यालयों में बिजली, वाहन और अन्य संसाधनों के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश दिए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही इस दिशा में कई बड़े फैसले लागू कर चुकी है। वहां सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने के साथ-साथ 50 प्रतिशत बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रियों और अधिकारियों को निजी वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया है। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” मनाने का निर्णय भी लिया गया है। राजस्थान सरकार अब इन्हीं मॉडलों का अध्ययन कर अपने स्तर पर उपयुक्त फैसले लेने की तैयारी में है।


