जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने देश की सुरक्षा रणनीति, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य की सैन्य तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिए। इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती और लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने भारत की सैन्य क्षमता, आतंकवाद के खिलाफ नीति और आधुनिक रक्षा ढांचे पर विस्तार से जानकारी साझा की।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय खुफिया एजेंसियों के पास नियंत्रण रेखा के पार मौजूद आतंकवादी लॉन्च पैड्स, आतंकी कैंपों और आतंक से जुड़े ढांचों की सटीक जानकारी मौजूद है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार कुछ ऐसे क्लस्टर हैं, जिन्हें भारत आतंकवाद से जुड़ा मानता है और भारतीय सेना इन गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। हालांकि सुरक्षा कारणों और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इन स्थानों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया।
अपने संबोधन में उन्होंने दोहराया कि नियंत्रण रेखा के पार कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत हर उस ठिकाने पर कार्रवाई करने की क्षमता रखता है, जहां से आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलता है। उनके अनुसार भारतीय सेना अब केवल सीमित जवाब तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर गहराई तक जाकर कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने इसे भारत की नई रणनीतिक सोच का हिस्सा बताया और कहा कि कार्रवाई का समय, तरीका और परिस्थितियां भारत स्वयं तय करेगा।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने यह भी कहा कि आतंकवादी कैंपों और लॉन्च पैड्स की स्थिति समय-समय पर बदलती रहती है। कई कैंपों को अब अंदरूनी क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि वहां वे ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। हालांकि उन्होंने दोहराया कि भारत की निगरानी और कार्रवाई की क्षमता लगातार मजबूत हो रही है और किसी भी स्थान को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
पाकिस्तान और चीन के संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के लगभग 80 प्रतिशत सैन्य उपकरण चीन मूल के हैं। इसके बावजूद भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को पाकिस्तान, चीन या अन्य देशों से जुड़े बहुआयामी सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ता है तो सेना उसी के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार करती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेनाओं का सफल संयुक्त अभियान बताया। उन्होंने कहा कि भारत की लड़ाई पाकिस्तान की जनता से नहीं, बल्कि आतंकवाद और उसे संरक्षण देने वाले नेटवर्क से थी। उनके अनुसार भारतीय सेनाओं ने अपने सभी निर्धारित उद्देश्यों को हासिल किया और अभियान पूरी तरह सफल रहा।
एयर मार्शल भारती ने कहा कि जब पाकिस्तान ने आतंकवाद का खुलकर समर्थन किया और संघर्ष को अपनी लड़ाई बना लिया, तब भारत को कठोर जवाब देना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई थी और इसका मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था। उन्होंने कहा कि कड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने संघर्ष विराम की मांग की, जिसके बाद भारत ने अभियान रोका, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। इसके अलावा 11 एयर फील्ड और 13 पाकिस्तानी विमान भी ध्वस्त किए गए। इनमें एक एयर वार्निंग विमान भी शामिल था, जिसे 300 किलोमीटर से अधिक दूरी से मार गिराया गया। एयर मार्शल भारती ने दावा किया कि भारतीय सेना और नागरिक ढांचे को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ और पाकिस्तान की ओर से किए गए सभी हमलों को प्रभावी तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया।
डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन और डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि 7 मई 2025 को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने सात और वायु सेना ने दो प्रमुख लक्ष्यों को निशाना बनाया था। इस अभियान में 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों और 100 से ज्यादा आतंकवादियों के मारे जाने का दावा भी किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान तीनों सेनाओं के समन्वय से संचालित किया गया था और सरकार ने आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के लिए सेनाओं को पूरी स्वतंत्रता दी थी। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत पहल की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान में भारतीय सेना के लगभग 65 प्रतिशत उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तेजी से बढ़ रही है।
इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने अंतरिक्ष सुरक्षा और सैटेलाइट क्षमताओं को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। पाकिस्तान द्वारा हाल ही में चार सैटेलाइट लॉन्च किए जाने पर उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने इस घटनाक्रम को पेशेवर दृष्टिकोण से देखा है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने अपना पहला सैन्य सैटेलाइट वर्ष 2001 में लॉन्च किया था और पिछले एक दशक में देश ने अंतरिक्ष क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य रणनीति में अंतरिक्ष केवल सहायक माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक प्रतिस्पर्धी संचालन क्षेत्र बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने वर्ष 2019 में डिफेंस स्पेस एजेंसी का गठन किया था, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं से जुड़े अंतरिक्ष मामलों की निगरानी और समन्वय स्थापित करना है।
लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में आईएसआर और कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को और मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस पर गंभीरता से काम कर रहा है, ताकि अंतरिक्ष गतिविधियों और संभावित खतरों की बेहतर निगरानी की जा सके।


