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JJM घोटाले में महेश जोशी गिरफ्तार, कोर्ट ले जाते वक्त दिया बड़ा बयान

JJM घोटाले में महेश जोशी गिरफ्तार, कोर्ट ले जाते वक्त दिया बड़ा बयान

राजस्थान की राजनीति में गुरुवार का दिन उस समय हलचल भरा हो गया, जब राज्य की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में जलदाय मंत्री रहे महेश जोशी  को एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी बहुचर्चित जल जीवन मिशन यानी जेजेएम घोटाले से जुड़े मामले में की गई है। करीब 979.45 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में एसीबी द्वारा लगभग छह महीने पहले एफआईआर दर्ज की गई थी और अब जांच के दौरान पूर्व मंत्री पर शिकंजा कसते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद जब एसीबी की टीम उन्हें कोर्ट में पेशी के लिए ले जा रही थी, तब उन्होंने मीडिया से बातचीत में कई भावुक और राजनीतिक बयान दिए, जिसने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया।

पूर्व मंत्री महेश जोशी ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए खुद को निर्दोष करार दिया। उन्होंने मीडिया से कहा कि यदि वह खुद को निर्दोष साबित नहीं कर पाए, तो ऐसा कदम उठाएंगे कि किसी को उनसे शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। इस दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी भावनात्मक बात भी कही। उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्हें गिरफ्तार किया गया, उसी दिन उनकी शादी की सालगिरह भी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनकी गिरफ्तारी करके उनकी दिवंगत पत्नी को “श्रद्धांजलि” दी है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

महेश जोशी ने आगे कहा कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए कहा कि फिलहाल गिरफ्तारी से वह परेशान जरूर हैं, क्योंकि किसी भी व्यक्ति के लिए गिरफ्तारी सम्मान की बात नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से अब तक कोई नोटिस नहीं मिला था और सीधे गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। हालांकि उन्होंने कहा कि वह मामले की जांच को प्रभावित करने वाली कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन अपने स्तर पर वह खुद को बेगुनाह मानते हैं।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि जब वह सत्ता में थे, तब उन्होंने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी और अब उन्हीं लोगों के बयानों के आधार पर उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार यह कार्रवाई निष्पक्ष नहीं कही जा सकती। महेश जोशी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राजस्थान में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी गर्म है और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

इस पूरे मामले में भावनात्मक पहलू भी जुड़ा हुआ है। महेश जोशी की पत्नी कोशल देवी का पिछले वर्ष 28 अप्रैल 2025 को निधन हो गया था। बताया गया था कि वह लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें किडनी की समस्या के साथ-साथ अन्य कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। बाद में ब्रेन हेमरेज के चलते उनकी हालत और गंभीर हो गई थी, जिसके बाद उन्हें जयपुर के मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय महेश जोशी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की हिरासत में थे।

जानकारी के अनुसार, पत्नी की गंभीर हालत को देखते हुए ईडी ने अदालत से विशेष अनुमति लेकर महेश जोशी को अस्पताल में उनसे मिलने की इजाजत दी थी। यह मुलाकात उनकी पत्नी के निधन से एक दिन पहले हुई थी। पत्नी के निधन के बाद अदालत ने उन्हें सात दिन की पैरोल भी प्रदान की थी ताकि वह अंतिम संस्कार और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभा सकें। अब ठीक एक साल बाद उनकी शादी की सालगिरह के दिन हुई गिरफ्तारी ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक भावुक बना दिया है।

दरअसल, जेजेएम घोटाले से जुड़ा यह मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन राजस्थान में इस योजना के तहत हुए कार्यों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इसी को लेकर ईडी और एसीबी दोनों एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही हैं।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत महेश जोशी को गिरफ्तार किया था। उस दौरान उन्हें करीब सात महीने तक जेल में रहना पड़ा था। बाद में 3 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए उन्हें जमानत प्रदान की थी। सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे, लेकिन अब एसीबी की कार्रवाई के बाद एक बार फिर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महेश जोशी की गिरफ्तारी आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति को और अधिक गर्मा सकती है। कांग्रेस इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दे सकती है, जबकि भाजपा सरकार इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है। जेजेएम घोटाला पहले ही प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है और अब पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

फिलहाल एसीबी इस मामले में आगे की पूछताछ और जांच की तैयारी में जुटी हुई है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित घोटाले में किन अधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य लोगों की भूमिका रही। दूसरी ओर महेश जोशी लगातार खुद को निर्दोष बता रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।

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