देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं को एक और बड़ा झटका लगा है। अमूल और मदर डेयरी ने 13 मई 2026 को दूध के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया और ये नई कीमतें 14 मई 2026 से पूरे देश में लागू हो गई हैं। इन दो बड़े ब्रांड्स के महंगे होने के बाद जैसा अनुमान था, वैसा ही हुआ — राजस्थान में सरस दूध भी अब महंगा हो गया है। जयपुर डेयरी ने सरस दूध के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही पनीर की कीमतों में भी 23 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की गई है, जिससे राजस्थान के लाखों उपभोक्ताओं की रसोई का बजट एक बार फिर प्रभावित होगा।
राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन यानी आरसीडीएफ के निर्देश पर जयपुर डेयरी की ओर से दूध की रेट बढ़ाई गई है। सरस गोल्ड, टोंड, स्मार्ट, स्टैंडर्ड एवं लाइट दूध के उपभोक्ता मूल्यों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है और बूथ संचालकों को 6 पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त कमीशन भी मिलेगा। नई दरें लागू होने के बाद सरस गोल्ड का आधा लीटर पैक अब 33 रुपये की जगह 34 रुपये और एक लीटर पैक 66 रुपये की जगह 68 रुपये का मिलेगा। सरस स्टैंडर्ड दूध का आधा लीटर पैक 29 रुपये की जगह 30 रुपये और सरस टोंड दूध का आधा लीटर पैक 26 रुपये की जगह 27 रुपये तथा एक लीटर पैक 52 रुपये की जगह 54 रुपये का मिलेगा।
जयपुर डेयरी ने एक साल के अंतराल के बाद दूध के दामों में यह संशोधन किया है और साल 2017 से अब तक दूध की कीमतों में 11 बार बढ़ोतरी हो चुकी है। इस अवधि में दूध के दामों में 42 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा बताता है कि राजस्थान में दूध धीरे-धीरे कितना महंगा होता जा रहा है और आम परिवारों की थाली पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
दूध के साथ-साथ पनीर की कीमतों में भी बड़ा इजाफा किया गया है। डेयरी ने पनीर के दाम 23 रुपये प्रति किलो बढ़ाए हैं। पनीर राजस्थान में रोजमर्रा के खाने का एक अहम हिस्सा है और इसकी बढ़ी हुई कीमत घरों की रसोई से लेकर होटल और रेस्तरां तक सभी को प्रभावित करेगी। इससे पहले सरस घी के दाम भी बढ़ाए गए थे, जिससे उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ रही है। नई कीमतों का सीधा असर खासकर मध्यवर्गीय और निम्नवर्गीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जो रोजाना दूध और घी का नियमित इस्तेमाल करते हैं।
इस पूरी मूल्यवृद्धि के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर चल रही डेयरी क्षेत्र की लागत बढ़ोतरी की बड़ी भूमिका है। अमूल ने बताया कि पशु आहार, दूध की पैकेजिंग फिल्म और ईंधन की बढ़ती लागत के कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया। मई 2025 से अब तक किसानों को दिए जाने वाले दूध के खरीद मूल्य में 3.7 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण बढ़े कच्चे तेल के दाम भी एक बड़ा कारण हैं, क्योंकि भारत अपनी अधिकांश जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है, जिससे परिवहन, पैकेजिंग और बिजली की लागत बढ़ती है और अंततः खाद्य वस्तुएं महंगी होती हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अमूल और मदर डेयरी के बाद क्षेत्रीय डेयरी ब्रांड्स और सहकारी दुग्ध संघ भी आने वाले हफ्तों में इसी तरह दाम बढ़ा सकते हैं। सरस ने इसी कड़ी में अपनी कीमतें संशोधित कर ली हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पनीर, दही, मक्खन, खोया और घी जैसे डेयरी उत्पाद भी जल्द महंगे हो सकते हैं, क्योंकि दूध की खरीद और उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।
राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन घी के दामों को नियंत्रित करता है, जबकि दूध की कीमतें जिला डेयरी संघ अपने स्तर पर तय करते हैं। इसीलिए सरस की बढ़ी हुई दरें सभी जिलों में एकसमान लागू नहीं होतीं, लेकिन जयपुर और दौसा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इन नई दरों का असर तुरंत महसूस किया जाएगा। जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक ने स्पष्ट किया कि इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण दुग्ध उत्पादकों को बेहतर मूल्य देना है और इस फैसले से किसानों और दूध उत्पादकों की आय में बढ़ोतरी होगी।
देश की बात करें तो भारत के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों से भी पिछले कई महीनों में खुदरा दूध मुद्रास्फीति में लगातार बढ़ोतरी सामने आई है, जो पशु चारे, ईंधन और रसद लागत में वृद्धि को दर्शाती है। यह स्थिति बताती है कि डेयरी क्षेत्र में महंगाई का यह दौर अभी थमने वाला नहीं है और आने वाले समय में उपभोक्ताओं को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी।
कुल मिलाकर अमूल और मदर डेयरी के बाद सरस दूध का महंगा होना राजस्थान के उन करोड़ों परिवारों के लिए एक और आर्थिक बोझ है, जो रोजाना सुबह की चाय से लेकर बच्चों के पोषण तक सरस के दूध पर निर्भर हैं। दूध, घी और पनीर — तीनों की कीमतें एक साथ बढ़ने से राजस्थान की आम जनता की रसोई पर महंगाई की मार पहले से कहीं अधिक गहरी हो गई है।


