अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भारत दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शनिवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से उन्हें अमेरिका आने का औपचारिक निमंत्रण सौंपा। इस मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले एक वर्ष के दौरान कई मुद्दों पर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद सामने आए थे। ऐसे समय में यह दौरा रिश्तों को नई मजबूती देने और भविष्य की रणनीति तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दिल्ली में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तकनीक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ईरान संकट और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर भी दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श किया। बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी प्रशासन की वरिष्ठ अधिकारी एलिसन हूकर भी मौजूद रहीं।
रूबियो का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन की यात्रा कर चुके हैं। ट्रम्प की बीजिंग यात्रा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति उनके सकारात्मक रुख ने एशियाई देशों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है। अमेरिका और चीन के बीच संबंधों की दिशा को लेकर भारत सहित कई देशों की निगाहें वॉशिंगटन पर टिकी हुई हैं। इसी कारण रूबियो की भारत यात्रा को केवल एक नियमित कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एशिया में अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत यह जानना चाहता है कि ट्रम्प प्रशासन आने वाले समय में चीन के प्रति किस प्रकार की नीति अपनाएगा और एशिया में उसकी रणनीतिक प्राथमिकताएं क्या होंगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका ने चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन के हालिया कदमों ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
भारत और अमेरिका के संबंधों में पिछले वर्ष से कुछ चुनौतियां भी सामने आई थीं। व्यापारिक नीतियों, टैरिफ और विभिन्न आर्थिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद देखने को मिले थे। इसके अलावा कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी रिश्तों में तनाव की स्थिति पैदा की थी। हालांकि दोनों देशों ने लगातार संवाद बनाए रखा और अब यह प्रयास किया जा रहा है कि संबंधों को और अधिक मजबूत तथा व्यापक बनाया जाए।
इस दौरान क्वाड समूह भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। मार्को रूबियो ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका क्वाड को पहले से अधिक मजबूत बनाना चाहता है। उन्होंने याद दिलाया कि विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद उनकी पहली महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठक क्वाड देशों के साथ हुई थी। उन्होंने कहा कि भारत में क्वाड बैठक आयोजित करने का निर्णय केवल एक औपचारिक कदम नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की उस सोच को दर्शाता है जिसमें भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है।
क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, नई तकनीक, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों पर सहयोग करता है। अमेरिका का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
रूबियो के दौरे में ऊर्जा सुरक्षा भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रही। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से आयात बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। वर्तमान में भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात को भी बढ़ाए। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सकारात्मक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी नई संभावनाओं पर बातचीत हुई। दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, सेमीकंडक्टर निर्माण, बैटरी तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत और अमेरिका दोनों इन क्षेत्रों को भविष्य की साझेदारी का आधार मान रहे हैं।
रक्षा सहयोग भी दोनों देशों के रिश्तों का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अमेरिका से कई आधुनिक रक्षा उपकरण खरीदे हैं। भारतीय सेना और वायुसेना वर्तमान में अमेरिकी तकनीक से लैस कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही हैं। दोनों देश अब रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और नई सैन्य तकनीकों के विकास पर भी काम करना चाहते हैं। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी और मजबूत होगी।
दिल्ली में अपने संबोधन के दौरान मार्को रूबियो ने हल्के-फुल्के अंदाज में राजधानी की गर्मी का भी जिक्र किया। उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि वह अपना भाषण छोटा रखना चाहते हैं क्योंकि दिल्ली की गर्मी काफी ज्यादा है। मियामी जैसे गर्म शहर से आने के बावजूद उन्हें दिल्ली की गर्मी अलग और अधिक महसूस हो रही है।


