दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए MTech कोर्स में प्रवेश प्रक्रिया को नया स्वरूप दिया है। अब विश्वविद्यालय पहली बार MTech पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए GATE स्कोर को प्राथमिकता देगा। यह फैसला उन छात्रों के लिए खास मायने रखता है जो इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उच्च अध्ययन करना चाहते हैं। अब तक GATE परीक्षा का उपयोग मुख्य रूप से IIT, NIT और देश के अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में प्रवेश के लिए किया जाता था, लेकिन अब दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी इस प्रक्रिया को अपनाकर खुद को राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा व्यवस्था के साथ और मजबूत तरीके से जोड़ लिया है।
विश्वविद्यालय के इस निर्णय को तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और बेहतर प्रतिभाओं को आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के एडमिशन डीन हनीत गांधी के अनुसार विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में दाखिले के लिए GATE स्कोर को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पहले विश्वविद्यालय GATE स्कोर का उपयोग केवल पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए करता था, लेकिन अब MTech कोर्स में भी इसी प्रणाली को लागू किया गया है।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले GATE स्कोर वाले उम्मीदवारों की मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसके आधार पर सीटों का आवंटन किया जाएगा। इससे उन छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की इस कठिन परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दिल्ली यूनिवर्सिटी के MTech कार्यक्रम की प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक स्तर दोनों में सुधार होगा।
हालांकि विश्वविद्यालय ने उन छात्रों के लिए भी रास्ता खुला रखा है जिनके पास GATE स्कोर नहीं है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि यदि GATE स्कोर वाले उम्मीदवारों के प्रवेश के बाद सीटें खाली रह जाती हैं तो उन सीटों को CUET-PG स्कोर के आधार पर भरा जाएगा। इसका मतलब यह है कि जिन छात्रों ने GATE परीक्षा नहीं दी है, वे भी MTech कोर्स में प्रवेश पाने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। इस फैसले को छात्रों के लिए संतुलित और अवसर बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय ने बताया कि MTech कोई नया कोर्स नहीं है, बल्कि यह पाठ्यक्रम पहले से संचालित हो रहा है। हालांकि हाल ही में इस कोर्स को AICTE यानी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की मंजूरी प्राप्त हुई है। इसी मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय ने प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि AICTE की स्वीकृति मिलने से कोर्स की मान्यता और विश्वसनीयता में भी वृद्धि होगी, जिससे छात्रों को रोजगार और शोध के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
MTech कार्यक्रम में आवेदन करने के लिए विश्वविद्यालय ने कुछ आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित की हैं। इच्छुक उम्मीदवारों के पास BTech, BE, BSc Engineering, MSc या समकक्ष डिग्री होना जरूरी होगा। साथ ही डिग्री संबंधित तकनीकी विषयों में होनी चाहिए। विश्वविद्यालय ने जिन प्रमुख विषयों को पात्रता के दायरे में रखा है उनमें इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग और रेडियो फिजिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकेंगे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने MTech कार्यक्रम के लिए कुल 30 सीटें निर्धारित की हैं। इनमें विभिन्न आरक्षित वर्गों के लिए भी सीटों का विभाजन किया गया है। सामान्य वर्ग के लिए 13 सीटें तय की गई हैं, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के लिए 8 सीटें आरक्षित रहेंगी। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 4 सीटें, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 2 सीटें और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए 3 सीटें निर्धारित की गई हैं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि सभी वर्गों में प्रवेश मेरिट के आधार पर ही किया जाएगा।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने प्रवेश प्रक्रिया को लेकर एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। विश्वविद्यालय ने कहा है कि इस MTech कोर्स में दाखिला सामान्य PG एडमिशन प्रक्रिया की तरह CSAS-PG पोर्टल के माध्यम से नहीं होगा। इसके लिए अलग से विशेष पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां इच्छुक छात्र आवेदन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय का मानना है कि तकनीकी पाठ्यक्रमों की अलग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था अधिक प्रभावी और व्यवस्थित साबित होगी।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का यह कदम देश की पारंपरिक विश्वविद्यालय व्यवस्था और तकनीकी शिक्षा प्रणाली के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। GATE स्कोर को शामिल करने से विश्वविद्यालय में अधिक योग्य और प्रतिस्पर्धी छात्र प्रवेश ले सकेंगे, जिससे शोध और नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही CUET-PG के माध्यम से वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराने से बड़ी संख्या में छात्रों को राहत मिलेगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी का यह नया निर्णय ऐसे समय में आया है जब देशभर में तकनीकी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और गुणवत्ता आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में यह बदलाव अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। छात्रों के बीच भी इस फैसले को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए एक नया और बेहतर अवसर मिलेगा।


