देशभर में सोना-चांदी की कीमतों में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बुधवार 21 मई को दोनों कीमती धातुओं के दाम में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि यह गिरावट मामूली रही, लेकिन इसके बावजूद सोना और चांदी अभी भी रिकॉर्ड स्तर के आसपास कारोबार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता, डॉलर की चाल और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण इस साल की शुरुआत से ही सर्राफा बाजार में लगातार तेजी बनी हुई है। यही वजह है कि छोटी गिरावट के बाद भी दोनों धातुएं आम लोगों की पहुंच से काफी ऊपर बनी हुई हैं।
India Bullion and Jewellers Association के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 किलो चांदी की कीमत में 2,623 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी का भाव घटकर 2.65 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत में भी मामूली कमी देखने को मिली। 10 ग्राम सोने का दाम 17 रुपए घटकर लगभग 1.59 लाख रुपए पर आ गया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में कीमतों में लगातार आई तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से यह हल्की गिरावट देखने को मिली है।
हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद यदि पूरे साल 2026 की बात करें तो सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। साल की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब 26 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं चांदी लगभग 35 से 36 हजार रुपए प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है। इससे साफ है कि इस साल सर्राफा बाजार में निवेश करने वालों को अच्छा फायदा मिला है।
आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए थी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक तनाव के बीच सोने में लगातार तेजी बनी रही और अब यह बढ़कर 1.59 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी की कीमत भी पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2025 के अंत में चांदी लगभग 2.30 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर थी, जो अब 2.65 लाख रुपए के आसपास कारोबार कर रही है।
इस दौरान दोनों धातुओं ने अपने ऑलटाइम हाई स्तर भी बनाए। 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। वहीं चांदी ने भी इसी दौरान 3.86 लाख रुपए प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार में आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण सोने-चांदी में तेजी बनी हुई है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद बढ़ाने जैसे कारणों का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। जब भी वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। इससे कीमतों में तेजी आती है। यही कारण है कि इस साल सर्राफा बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
इस बीच शादी-विवाह का सीजन होने के कारण बाजार में ज्वेलरी की मांग भी बनी हुई है। हालांकि बढ़ती कीमतों के चलते कई लोग हल्के वजन के गहनों की ओर रुख कर रहे हैं। ज्वेलर्स का कहना है कि ग्राहक अब निवेश के उद्देश्य से भी सोना खरीद रहे हैं। खासतौर पर डिजिटल गोल्ड और हल्के डिजाइन वाले आभूषणों की मांग बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोना खरीदते समय लोगों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले हमेशा प्रमाणित यानी हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदना चाहिए। Bureau of Indian Standards द्वारा जारी हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोना शुद्ध और निर्धारित कैरेट का है। हॉलमार्क पर मौजूद अल्फान्यूमेरिक कोड से सोने की गुणवत्ता की पहचान की जा सकती है। इससे ग्राहकों को नकली या कम गुणवत्ता वाले सोने से बचाव मिलता है।
इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने और चांदी के ताजा भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से जांच लेना भी जरूरी माना जाता है। कई बार स्थानीय बाजार में कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में ग्राहक यदि खरीदारी से पहले बाजार दर की जानकारी ले लें तो उन्हें सही कीमत पर बेहतर खरीदारी करने में मदद मिल सकती है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार आने वाले समय में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों की रणनीति के आधार पर सर्राफा बाजार की दिशा तय होगी। हालांकि लंबे समय के निवेश के लिहाज से अभी भी सोना और चांदी सुरक्षित निवेश विकल्प माने जा रहे हैं।


