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राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने की मांग तेज

राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने की मांग तेज

ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ रही कीमतों का असर अब देशभर के साथ राजस्थान में भी साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल -डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण न केवल परिवहन महंगा हुआ है, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे हालात में राजस्थान में पेट्रोल और डीजल पर लगाए जाने वाले वैट और रोड सेस को कम करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

प्रदेश के पेट्रोलियम डीलर्स, व्यापारिक संगठनों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार से ईंधन पर टैक्स में राहत देने की अपील की है। विभिन्न संगठनों की ओर से सरकार को ज्ञापन सौंपकर कहा गया है कि जिस तरह केंद्र सरकार ने पहले उत्पाद शुल्क में कटौती कर लोगों को राहत देने का प्रयास किया था, उसी प्रकार राजस्थान सरकार को भी अपने स्तर पर वैट और रोड सेस कम करना चाहिए। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं, किसानों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर पड़ रहा है।

राजस्थान में खेती-किसानी का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है। खेतों में ट्रैक्टर चलाने से लेकर सिंचाई और कृषि उत्पादों की ढुलाई तक हर काम में डीजल की जरूरत होती है। ऐसे में डीजल महंगा होने से किसानों की लागत तेजी से बढ़ रही है। पहले से ही खाद, बीज और कृषि उपकरणों की कीमतों से परेशान किसान अब ईंधन की महंगाई का अतिरिक्त बोझ झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीजल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले समय में कृषि उत्पादन की लागत और बढ़ेगी, जिसका असर सीधे खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा।

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी प्रभावित किया है। माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से बाजार में हर वस्तु की कीमत प्रभावित हो रही है। फल, सब्जियां, दूध, अनाज और अन्य जरूरी सामान महंगे होने लगे हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते ईंधन खर्च के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। कई छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को संचालन लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। इसका असर अंततः उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

राजस्थान पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार को वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वैट और रोड सेस में कमी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार को पेट्रोल और डीजल पर प्रतिशत के आधार पर वैट प्राप्त होता है। इसका मतलब यह है कि जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं और ईंधन महंगा होता है, वैसे-वैसे राज्य सरकार का राजस्व भी स्वतः बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार यदि अतिरिक्त बढ़े हुए राजस्व का कुछ हिस्सा कम कर दे तो आम लोगों को राहत मिल सकती है।

व्यापारिक संगठनों द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को पेट्रोल और डीजल से राज्य सरकार को लगभग 39.51 रुपए प्रति लीटर राजस्व प्राप्त हो रहा था। बाद में यह आंकड़ा 15 मई तक बढ़कर 40.70 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया और 19 मई 2026 तक 41.04 रुपए प्रति लीटर हो गया। इसी अवधि में पेट्रोल पर मिलने वाला वैट 23.22 रुपए से बढ़कर 24.17 रुपए प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल पर वैट 13.04 रुपए से बढ़कर 13.62 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया। इन आंकड़ों के आधार पर संगठनों का कहना है कि सरकार के पास अतिरिक्त राजस्व आ रहा है और इसका लाभ जनता को मिलना चाहिए।

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि राज्य सरकार रोड सेस और वैट में आंशिक कटौती भी करती है तो इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासतौर पर किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इसका सीधा फायदा मिलेगा। उनका कहना है कि मौजूदा समय में महंगाई पहले ही लोगों की कमर तोड़ रही है और ऐसे में ईंधन की कीमतों में राहत मिलना बेहद जरूरी हो गया है।

आर्थिक जानकारों का भी कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने पर पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है। इससे बाजार में हर वस्तु की लागत बढ़ जाती है और महंगाई तेजी पकड़ लेती है। ऐसे में राज्य सरकार यदि टैक्स में कुछ राहत देती है तो इससे बाजार में महंगाई नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल प्रदेशभर के व्यापारिक संगठन और पेट्रोलियम डीलर्स राज्य सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सरकार जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकती है। आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में जनता को राहत देने के लिए वैट और रोड सेस में कटौती को एक अहम कदम माना जा रहा है।

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