latest-newsचित्तौड़गढ़राजस्थान

CBSE टॉपर चिन्मय काबरा ने सांवलिया सेठ को भेंट की चांदी की किताब

CBSE टॉपर चिन्मय काबरा ने सांवलिया सेठ को भेंट की चांदी की किताब

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के एक होनहार छात्र की सफलता और आस्था की कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। सीबीएसई 12वीं कॉमर्स परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर 97 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्र चिन्मय काबरा ने अपनी सफलता का श्रेय भगवान श्री सांवलियाजी को देते हुए मंदिर में विशेष चांदी की किताब भेंट की। स्कूल टॉपर बनने के बाद परिवार सहित सांवलियाजी मंदिर पहुंचे चिन्मय ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और भविष्य में भी सफलता की कामना की। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा, मेहनत और धार्मिक आस्था के सुंदर मेल को सामने रखा है।

चित्तौड़गढ़ निवासी व्यवसायी सुनील काबरा ने बताया कि उनके पुत्र चिन्मय ने हाल ही में घोषित सीबीएसई 12वीं कॉमर्स परीक्षा परिणाम में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इसके साथ ही वह हिंद जिंक स्कूल का टॉपर भी बना है। परिवार के अनुसार चिन्मय शुरू से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी रहा है और उसने लगातार मेहनत और अनुशासन के बल पर यह उपलब्धि हासिल की। परिवार को उसकी मेहनत पर पूरा भरोसा था और इसी विश्वास के साथ उन्होंने पहले ही भगवान सांवलिया सेठ से मनोकामना मांगी थी कि चिन्मय जिले और स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करे।

जब सीबीएसई ने 13 मई को परीक्षा परिणाम घोषित किया और चिन्मय ने शानदार अंक प्राप्त किए, तब परिवार ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर भगवान सांवलिया सेठ का आभार व्यक्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद शुक्रवार को राजभोग आरती के दौरान पूरा काबरा परिवार सांवलियाजी मंदिर पहुंचा। मंदिर में परिवार ने विधिवत पूजा-अर्चना की और भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से तैयार करवाई गई चांदी की किताब भगवान को भेंट की, जिसने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का भी ध्यान आकर्षित किया।

सुनील काबरा ने बताया कि यह चांदी की किताब करीब 50 ग्राम वजनी है और इसे विशेष रूप से अहमदाबाद में तैयार करवाया गया था। किताब का डिजाइन भी बेहद खास रखा गया। इसके एक पृष्ठ पर भगवान सांवलिया सेठ की आकर्षक छवि उकेरी गई है। दूसरे पृष्ठ पर “सांवलिया सेठ की जय” लिखा गया है, जबकि तीसरे पृष्ठ पर “12th Pass” अंकित कराया गया। परिवार का मानना है कि यह केवल एक भेंट नहीं, बल्कि उनकी श्रद्धा, विश्वास और बेटे की मेहनत का प्रतीक है।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि परिवार ने परीक्षा परिणाम आने से पहले ही इस चांदी की किताब का ऑर्डर दे दिया था। सुनील काबरा का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की मेहनत और लगन पर पूरा भरोसा था। चिन्मय ने इससे पहले CBSE 10वीं परीक्षा में भी स्कूल टॉपर बनकर परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया था। इसी कारण उन्हें विश्वास था कि इस बार भी वह उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगा। यही वजह रही कि उन्होंने रिजल्ट घोषित होने से पहले ही भगवान को चांदी की किताब अर्पित करने की तैयारी शुरू कर दी थी।

चिन्मय काबरा की सफलता केवल अच्छे अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसके बड़े सपनों और लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम का भी संकेत है। चिन्मय ने बताया कि अब उसका लक्ष्य चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए बनना है। इसके साथ ही वह देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक नई दिल्ली स्थित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में प्रवेश पाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गया है। चिन्मय का कहना है कि नियमित अध्ययन, समय का सही प्रबंधन और परिवार का सहयोग उसकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं।

काबरा परिवार की भगवान सांवलिया सेठ में गहरी आस्था है। मेवाड़ क्षेत्र में स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और पूरी होने पर विशेष भेंट अर्पित करते हैं। व्यापारियों से लेकर छात्रों तक, हर वर्ग के लोग भगवान सांवलिया सेठ को अपनी सफलता और समृद्धि का आधार मानते हैं। चिन्मय काबरा का यह उदाहरण भी इसी आस्था और विश्वास को दर्शाता है।

इस प्रेरणादायक कहानी ने यह साबित किया है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच से मिलती है। चिन्मय की उपलब्धि उन छात्रों के लिए भी प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते हैं। परिवार के संस्कार, शिक्षा के प्रति समर्पण और भगवान के प्रति आस्था ने इस सफलता को और भी खास बना दिया है।

चित्तौड़गढ़ में चिन्मय काबरा की सफलता को लेकर लोगों में खुशी का माहौल है। स्कूल प्रबंधन, रिश्तेदारों और परिचितों ने भी उसे शुभकामनाएं दी हैं। वहीं सांवलियाजी मंदिर में चांदी की किताब भेंट करने की यह अनोखी घटना अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कहानी न केवल एक छात्र की उपलब्धि को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि जब मेहनत के साथ विश्वास जुड़ जाता है, तब सफलता और भी यादगार बन जाती है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading