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यूथ कांग्रेस चुनाव में फर्जी सदस्यता पर बढ़ा विवाद

यूथ कांग्रेस चुनाव में फर्जी सदस्यता पर बढ़ा विवाद

राजस्थान यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव अब विवादों के घेरे में आ गए हैं। प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया के बीच फर्जी सदस्यता और कथित फर्जी आईडी बनाने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। खास बात यह है कि यह आरोप विपक्षी दल की ओर से नहीं बल्कि खुद यूथ कांग्रेस के भीतर से लगाए गए हैं। प्रदेशाध्यक्ष पद के दावेदार अभिषेक चौधरी ने संगठन चुनाव की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि प्रदेश के कई जिलों में फर्जी तरीके से सदस्य बनाए जा रहे हैं और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।

राजस्थान यूथ कांग्रेस में इस बार संगठन चुनाव को लेकर काफी हलचल देखने को मिल रही है। प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए करीब 20 दावेदार मैदान में हैं। हालांकि शुरुआत से मुख्य मुकाबला अभिषेक चौधरी और अनिल चौपड़ा के बीच माना जा रहा था, लेकिन नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में चुनाव मैदान में उतरे राजकुमार रेपसवाल ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। संगठन के भीतर यह चर्चा भी जोरों पर है कि चुनाव में वही उम्मीदवार बढ़त बना सकता है, जिसके पास मजबूत आर्थिक और राजनीतिक समर्थन होगा।

इसी बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद तब और गहरा गया जब अभिषेक चौधरी ने एक वीडियो जारी कर संगठन चुनाव में कथित फर्जीवाड़े के आरोप लगाए। चौधरी ने दावा किया कि कई जिलों में फर्जी आईडी बांटी जा रही हैं और वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए लोगों को लालच दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग एसी कमरों में बैठकर फर्जी सदस्य बना रहे हैं, जिससे संगठनात्मक चुनाव की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

अभिषेक चौधरी ने कहा कि यदि इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक नहीं लगी तो यूथ कांग्रेस के चुनावों की अहमियत समाप्त हो जाएगी। उन्होंने संगठन के वरिष्ठ नेताओं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की। चौधरी के आरोपों के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है और कार्यकर्ताओं के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

इस पूरे विवाद के बीच एक और बड़ा दावा सामने आया है। आरोप लगाए गए हैं कि कुछ कथित फर्जी वोट भाजपा और आरएलपी से जुड़े नेताओं के मोबाइल नंबरों के आधार पर भी बनाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस दावे ने मामले को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया है। विपक्ष ने अब कांग्रेस को इसी मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है।

भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष शंकर गौरा ने अभिषेक चौधरी के बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी आंतरिक चुनाव प्रक्रिया तक को पारदर्शी तरीके से संचालित नहीं कर पा रही है। भाजपा का आरोप है कि यूथ कांग्रेस के चुनावों में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ चुकी है।

शंकर गोरा ने कांग्रेस में गुटबाजी को भी इस विवाद की बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर नेताओं के बीच लगातार राजनीतिक वर्चस्व और लाइमलाइट में बने रहने की होड़ चल रही है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यूथ कांग्रेस का चुनाव संगठन निर्माण की प्रक्रिया कम और चंदा उगाही का माध्यम ज्यादा दिखाई दे रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यूथ कांग्रेस के चुनावों में विवाद का असर कांग्रेस संगठन की छवि पर पड़ सकता है। युवा संगठन किसी भी राजनीतिक दल की भविष्य की ताकत माना जाता है और यदि उसके चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब राजस्थान में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं, कांग्रेस के लिए यह विवाद चुनौती बन सकता है।

कांग्रेस संगठन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर कई कार्यकर्ता चाहते हैं कि आरोपों की स्वतंत्र जांच हो ताकि चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता बनी रहे।

यूथ कांग्रेस के चुनाव हमेशा से संगठन के भीतर नई नेतृत्व क्षमता को सामने लाने का माध्यम माने जाते रहे हैं। लेकिन इस बार जिस तरह से फर्जी सदस्यता और आर्थिक प्रभाव जैसे आरोप सामने आए हैं, उससे चुनाव प्रक्रिया की साख पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कांग्रेस इस विवाद को समय रहते नियंत्रित नहीं कर पाती है, तो विपक्ष इसे आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।

फिलहाल राजस्थान यूथ कांग्रेस का चुनाव केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिष्ठा और पारदर्शिता की परीक्षा बनता जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस नेतृत्व इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

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