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नीट पेपर लीक विवाद में भाजपा विधायक के परिवार का नाम

नीट पेपर लीक विवाद में भाजपा विधायक के परिवार का नाम

राजस्थान में बहुचर्चित नीट पेपर लीक मामला लगातार नए मोड़ लेता जा रहा है। सीबीआई की जांच के बीच अब इस मामले में सत्ताधारी भाजपा के एक विधायक के परिवार का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जयपुर ग्रामीण जिले की जमवारामगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक महेंद्र पाल मीणा के भतीजे धर्म चंद मीणा के नीट परीक्षा में चयन को लेकर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इस पूरे मामले ने अब केवल परीक्षा में धांधली तक सीमित रहने के बजाय राजनीतिक प्रभाव और कथित नेटवर्क की जांच की मांग को और तेज कर दिया है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पुराना पोस्ट साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या नीट पेपर लीक मामले में राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी। डोटासरा ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा।

पूरा विवाद वर्ष 2025 की नीट-एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा से जुड़ा हुआ है। इस परीक्षा में विधायक महेंद्र पाल मीणा के भतीजे धर्म चंद मीणा का चयन अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत हुआ था। धर्म चंद मीणा ने एसटी कैटेगरी में देशभर में 781वीं रैंक हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला। उस समय विधायक महेंद्र पाल मीणा ने सोशल मीडिया पर अपने भतीजे की तस्वीर साझा कर सार्वजनिक रूप से बधाई दी थी। अब जब नीट पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल की गिरफ्तारी हुई है, तो वही पुराना पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे विपक्ष भाजपा के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

डोटासरा ने अपने बयान में आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक के आरोपियों के केवल कुछ करीबी छात्रों का ही चयन नहीं हुआ, बल्कि कथित तौर पर राजनीतिक संपर्क रखने वाले परिवारों के बच्चों को भी इसका लाभ मिला हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब मुख्य आरोपी दिनेश बिवाल को गिरफ्तार किया गया था, तब उसने मीडिया के सामने यह दावा किया था कि इस पूरे खेल में कई “बड़े लोग” शामिल हैं। कांग्रेस अब इसी बयान को आधार बनाकर जांच एजेंसियों से राजनीतिक कड़ियों को जोड़ने की मांग कर रही है।

कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य आरोपी दिनेश बिवाल का जमवारामगढ़ क्षेत्र में प्रभाव था और वह स्थानीय भाजपा नेताओं के संपर्क में रहा है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे में विधायक के परिवार से जुड़े छात्र का चयन संदेह पैदा करता है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने विधायक या उनके परिवार के खिलाफ किसी प्रकार का आधिकारिक आरोप नहीं लगाया है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी ने इस पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

इस विवाद के बाद राजस्थान की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। विपक्ष का कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में प्रभावशाली लोगों का हस्तक्षेप साबित होता है, तो यह देश के लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ बड़ा धोखा होगा। डोटासरा ने कहा कि देशभर के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्र दिन-रात मेहनत करके मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और यदि कोई नेटवर्क पैसे या राजनीतिक प्रभाव के दम पर चयन दिलाने में सफल होता है, तो यह शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस नेता ने यह भी मांग की कि सीबीआई केवल निचले स्तर के आरोपियों तक सीमित न रहे, बल्कि उन सभी राजनीतिक और प्रशासनिक कड़ियों की भी जांच करे जिनका संबंध इस कथित नेटवर्क से हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में निष्पक्ष और गहन जांच बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। डोटासरा ने केंद्र सरकार से यह सवाल भी पूछा कि क्या प्रभावशाली लोगों से जुड़े एंगल की जांच भी उतनी ही गंभीरता से होगी जितनी अन्य आरोपियों की हो रही है।

दूसरी ओर भाजपा की ओर से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विधायक महेंद्र पाल मीणा ने भी सार्वजनिक रूप से इस मामले पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र और चुनावी माहौल में जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है।

नीट परीक्षा को लेकर पहले से ही देशभर में असंतोष और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। पेपर लीक, धांधली और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों को चिंतित किया है। ऐसे में यदि किसी राजनीतिक परिवार का नाम विवादों में आता है, तो मामला और अधिक संवेदनशील हो जाता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जांच एजेंसियों को पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा।

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