भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर जारी तनाव के बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को एक बार फिर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। शनिवार को आयोजित ‘सेना संवाद’ कार्यक्रम में उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति को दोहराते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवादियों को संरक्षण देना बंद नहीं करता और भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता रहता है, तो उसे यह तय करना होगा कि वह दुनिया के भूगोल और इतिहास में अपनी जगह बनाए रखना चाहता है या नहीं। सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय सेना हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मना चुकी है।
जनरल द्विवेदी के बयान को केवल एक चेतावनी नहीं बल्कि भारत की बदलती सुरक्षा नीति का संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को अधिक आक्रामक और निर्णायक बनाया है। सेना प्रमुख ने साफ कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सीमा पार से आतंकवादी गतिविधियां जारी रहती हैं, तो भारतीय सेना भविष्य में भी उसी मजबूती के साथ जवाब देगी।
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की उन सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। यह ऑपरेशन 6 और 7 मई 2025 की रात को शुरू किया गया था। इस सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ भीषण आतंकी हमला था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
पहलगाम के बैसरन घाटी क्षेत्र में हुए इस हमले में आतंकवादियों ने सैन्य वर्दी पहनकर पर्यटकों को निशाना बनाया था। दोपहर करीब 2:50 बजे खुले मैदान में मौजूद लोगों पर आतंकियों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें कई पर्यटक शामिल थे। मृतकों में दो विदेशी नागरिक भी थे। इस घटना ने पूरे देश में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया था और केंद्र सरकार पर आतंकियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था।
इसी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। इस मिशन का नाम भी बेहद भावनात्मक और प्रतीकात्मक रखा गया था। बताया गया कि हमले में मारे गए लोगों के परिवारों, विशेषकर महिलाओं के दर्द और सम्मान को ध्यान में रखते हुए इस सैन्य अभियान को ‘सिंदूर’ नाम दिया गया। यह नाम आतंकवाद के खिलाफ न्याय और प्रतिशोध दोनों का प्रतीक बन गया।
ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता और गति थी। भारतीय सेना ने अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक, हाई-टेक मिसाइल सिस्टम और आधुनिक निगरानी तंत्र का उपयोग करते हुए पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकवादियों के नौ बड़े लॉन्चपैड और ठिकानों को निशाना बनाया। यह पूरी कार्रवाई लगभग 25 मिनट के भीतर पूरी कर ली गई थी। भारतीय सेना के अनुसार हमले इतने सटीक थे कि आतंकवादी ढांचे पूरी तरह तबाह हो गए और कई बड़े आतंकी संगठनों को भारी नुकसान पहुंचा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित रहने वाला नहीं है। यदि देश पर हमला होगा, तो उसका जवाब उसी भाषा में दिया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की सैन्य क्षमता और रणनीतिक तैयारी की चर्चा हुई थी। कई देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया था।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है और देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने हमेशा साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि आतंकवाद मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा खतरा है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में होने देता है। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत इस मुद्दे को उठाता रहा है। हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन भारत का कहना है कि सीमा पार से होने वाली आतंकी घुसपैठ और हमलों के पीछे पाकिस्तानी समर्थन स्पष्ट दिखाई देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सेना प्रमुख का हालिया बयान पाकिस्तान के लिए रणनीतिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा संदेश है। भारत यह साफ कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। आने वाले समय में यदि पाकिस्तान अपनी नीति में बदलाव नहीं करता, तो भारत की ओर से और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के मौके पर सेना प्रमुख का यह बयान देशवासियों में भरोसा और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। यह संदेश केवल पाकिस्तान के लिए नहीं बल्कि उन सभी आतंकवादी संगठनों के लिए भी है, जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।


