राजस्थान के डीग जिले के बृज नगर कस्बे में संचालित तेज भारत गैस एजेंसी पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के नाम पर गंभीर अनियमितताओं और कथित गैस घोटाले के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गरीब और अशिक्षित परिवारों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनके दस्तावेज लिए गए, लेकिन बदले में उन्हें गैस कनेक्शन से जुड़ी कोई सुविधा नहीं मिली। मामला सामने आने के बाद गांवों में नाराजगी बढ़ गई है और अब लोग पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार एजेंसी से जुड़े डिलीवरी मैन गांवों में पहुंचे और लोगों को बताया कि सरकार की ओर से मुफ्त गैस सिलेंडर और कनेक्शन दिए जा रहे हैं। इस पर भरोसा करते हुए कई गरीब परिवारों ने आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और अन्य आवश्यक दस्तावेज एजेंसी के पास जमा करा दिए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस सुविधा मिलेगी और धुएं से भरे चूल्हों से राहत मिलेगी। लेकिन आरोप है कि दस्तावेज लेने के बाद उनके नाम पर गैस कनेक्शन तो चालू कर दिए गए, जबकि उन्हें न भरा हुआ सिलेंडर मिला, न गैस चूल्हा, न रेगुलेटर, न पाइप लाइन और न ही पासबुक उपलब्ध कराई गई।
मामले ने उस समय गंभीर रूप लिया जब कुछ ग्रामीणों ने ऑनलाइन रिकॉर्ड निकलवाए। रिकॉर्ड में उनके नाम पर गैस कनेक्शन जारी होना ही नहीं, बल्कि सिलेंडर सप्लाई और उठान तक दर्ज मिला। जबकि संबंधित परिवारों का कहना है कि उनके घर कभी गैस सिलेंडर पहुंचा ही नहीं। इस खुलासे के बाद गांवों में यह चर्चा तेज हो गई कि गरीबों के नाम पर गैस कनेक्शन लेकर सिलेंडरों की कथित ब्लैकिंग की गई है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन महिलाओं के नाम पर केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ रिकॉर्ड में दिखाया जा रहा है, वे आज भी लकड़ी और उपलों से खाना बनाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब लाभार्थियों को सिलेंडर मिला ही नहीं, तो रिकॉर्ड में सप्लाई किस आधार पर दर्ज की गई। लोगों का कहना है कि बिना लाभार्थी के गैस उठान संभव नहीं होना चाहिए, फिर आखिर गरीबों के हिस्से की गैस किसे दी गई।
मामले में कई ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बात रखी है। उड़की मोहम्मदा निवासी जमसीदा के पति दीनू का कहना है कि एजेंसी के डिलीवरी मैन ने उन्हें बताया था कि सरकार की ओर से मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपने दस्तावेज जमा करा दिए। बाद में पता चला कि उनके नाम पर उपभोक्ता संख्या और एसवी नंबर जारी हो चुका है। रिकॉर्ड में सिलेंडर सप्लाई भी दर्ज दिखाई दे रही है, लेकिन आज तक उनके घर कोई भरा हुआ सिलेंडर, गैस चूल्हा, पाइप लाइन, रेगुलेटर या पासबुक नहीं पहुंची।
इसी तरह ईसनाका निवासी फजरी के पति सुलेमान ने आरोप लगाया कि उनसे भी मुफ्त गैस योजना का लाभ दिलाने की बात कहकर दस्तावेज लिए गए थे। बाद में रिकॉर्ड में उनके नाम पर गैस सप्लाई दर्ज दिखाई दी, जबकि वास्तविकता में उन्हें कोई सामग्री नहीं मिली। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में सिलेंडर वितरण दर्ज है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए कि आखिर वह सिलेंडर किसे दिया गया।
काबान का बास निवासी मौसमीना के पति फज्जर ने भी इसी प्रकार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रिकॉर्ड में उनके नाम पर गैस सप्लाई दर्शाई गई है, लेकिन उन्हें आज तक गैस कनेक्शन से जुड़ी कोई सुविधा नहीं मिली। वहीं ईसनाका निवासी हफीजन के पति सुबदीन ने भी आरोप लगाया कि उनके नाम पर सिलेंडर उठान और सप्लाई दर्ज होने के बावजूद उन्हें कोई गैस सामग्री नहीं दी गई। उनका कहना है कि यह गरीबों के नाम पर किया गया बड़ा खेल है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मामले को लेकर जब तेज भारत गैस एजेंसी संचालक से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। दूसरी ओर जिला रसद विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। अधिकारियों की यह चुप्पी अब ग्रामीणों के संदेह को और मजबूत कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो संबंधित एजेंसी और विभाग खुलकर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को धुएं से मुक्त स्वच्छ रसोई उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत करोड़ों परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन डीग में सामने आए आरोपों ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनके नाम पर रिकॉर्ड में गैस वितरण दिखाया गया है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी योजना के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, रसद विभाग और तेल कंपनियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गैस सप्लाई रिकॉर्ड, डिलीवरी एंट्री, ओटीपी लॉग और वितरण व्यवस्था की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल एक गैस एजेंसी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गरीबों के नाम पर सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े का बड़ा उदाहरण बन सकता है।


