latest-newsअजमेरजयपुरराजस्थान

RPSC SI भर्ती 2021 रद्द, अब 20 सितंबर 2026 को होगी दोबारा परीक्षा

RPSC SI भर्ती 2021 रद्द, अब 20 सितंबर 2026 को होगी दोबारा परीक्षा

राजस्थान में लंबे समय से विवादों और कानूनी प्रक्रिया में उलझी उप निरीक्षक (SI) एवं प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2021 को लेकर आखिरकार बड़ा फैसला सामने आ गया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी Rajasthan Public Service Commission (RPSC) ने परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक और डमी कैंडिडेट्स के मामलों की जांच के बाद इस भर्ती परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। आयोग ने 12 मई 2026 को जारी प्रेस नोट में स्पष्ट किया कि अब इस भर्ती परीक्षा का आयोजन नए सिरे से किया जाएगा। आयोग ने पुनर्परीक्षा के लिए 20 सितंबर 2026, रविवार की तिथि निर्धारित की है। इस फैसले के बाद लाखों अभ्यर्थियों के बीच नई उम्मीद और चिंता दोनों का माहौल बना हुआ है।

यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2021 में शुरू हुई थी और इसके तहत राजस्थान पुलिस विभाग में 859 पदों पर भर्ती की जानी थी। लेकिन परीक्षा के बाद लगातार सामने आए पेपर लीक, नकल गिरोह और डमी उम्मीदवारों से जुड़े मामलों ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले की जांच राजस्थान एसओजी द्वारा की गई, जिसमें कई गंभीर खुलासे हुए। जांच के दौरान कई ट्रेनी सब-इंस्पेक्टरों सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारियां भी हुई थीं। इसके बाद यह मामला न्यायालय तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया जारी रही।

हाल ही में Supreme Court of India ने भी इस भर्ती को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा। सर्वोच्च न्यायालय के रुख के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग ने पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परीक्षा को पूरी तरह निरस्त कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया है। आयोग का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आयोग ने पुनर्परीक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। सबसे अहम बात यह है कि इस नई परीक्षा में सभी पुराने अभ्यर्थियों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल वही 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे, जिन्होंने सितंबर 2021 में आयोजित मूल लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्रों में उपस्थिति दर्ज कराई थी। जिन उम्मीदवारों ने उस समय परीक्षा छोड़ दी थी या किसी एक पेपर में अनुपस्थित रहे थे, उन्हें अब इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर नहीं मिलेगा।

आयोग ने अभ्यर्थियों को अपने आवेदन पत्र में आवश्यक संशोधन करने का अवसर भी दिया है। इसके लिए 16 मई से 30 मई 2026 तक की अवधि निर्धारित की गई है। इस दौरान उम्मीदवार अपने मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियों में बदलाव कर सकेंगे। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता की पात्रता वर्ष 2021 के मूल विज्ञापन के अनुसार ही मानी जाएगी। यानी अभ्यर्थियों की योग्यता उसी समयावधि के आधार पर तय होगी, जब पहली बार भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया था।

इस बार आयोग ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए कई नए नियम भी लागू किए हैं। जिन अभ्यर्थियों को अपने आवेदन फॉर्म में किसी प्रकार का संशोधन नहीं करना है, उन्हें भी आयोग के पोर्टल पर लॉग-इन करके “संशोधन की आवश्यकता नहीं” का विकल्प चुनना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उन्हें बायोमेट्रिक सहमति भी देनी होगी। आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि कोई अभ्यर्थी यह प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो उसका आवेदन स्वतः निरस्त माना जाएगा।

भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों ने राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं की साख को प्रभावित किया था। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में कई भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और नकल के मामलों के कारण विवादों में रही हैं। ऐसे में SI भर्ती परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का फैसला सरकार और आयोग दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। आयोग इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी निगरानी और सख्त सुरक्षा इंतजामों पर विशेष ध्यान दे रहा है।

अभ्यर्थियों को आगामी परीक्षा के लिए अपनी तैयारियों के साथ-साथ ऑनलाइन प्रक्रियाओं पर भी ध्यान देना होगा। आयोग ने कहा है कि परीक्षार्थियों को अपनी एसएसओ आईडी के माध्यम से OTR यानी वन टाइम रजिस्ट्रेशन की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। इसी प्रक्रिया के बाद अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। आयोग ने उम्मीदवारों से समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाले अपडेट पर नजर बनाए रखने की अपील की है।

इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे थे। कुछ उम्मीदवार इसे न्याय और पारदर्शिता की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कई अभ्यर्थी वर्षों की मेहनत और इंतजार के बाद दोबारा परीक्षा देने को लेकर मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। बावजूद इसके, अधिकांश अभ्यर्थियों का मानना है कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए यह फैसला आवश्यक था।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading