राजस्थान की महत्वाकांक्षी ब्यावर-भरतपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर अब ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। सवाईमाधोपुर जिले के बामनवास क्षेत्र सहित भरतपुर के बयाना इलाके में ग्रामीणों ने प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के वर्तमान अलाइनमेंट पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि परियोजना का मौजूदा रूट नहीं बदला गया तो इससे गांवों के जल स्रोत, आबादी क्षेत्र और कृषि भूमि पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इसी मांग को लेकर रविवार को ग्राम कोहली प्रेमपुरा और लिवाली के ग्रामीणों ने राज्य सरकार में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की।
जानकारी के अनुसार कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा गंडाल गांव के दौरे पर जा रहे थे। इसी दौरान पिपलाई में बड़ी संख्या में ग्रामीण उनसे मिलने पहुंचे और एक्सप्रेस-वे परियोजना से जुड़ी अपनी चिंताओं से अवगत कराया। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे का वर्तमान अलाइनमेंट गांव के बेहद महत्वपूर्ण जल स्रोतों और आबादी क्षेत्र के निकट से गुजर रहा है। उनका कहना है कि यदि इसी रूट पर सड़क निर्माण किया गया तो इसका सीधा असर क्षेत्र के पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने विशेष रूप से ग्राम कोहली प्रेमपुरा के मुख्य तालाब को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि यह तालाब केवल जल संग्रहण का साधन नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के भू-जल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि एक्सप्रेस-वे निर्माण के दौरान तालाब प्रभावित होता है तो आसपास के इलाकों में भू-जल स्तर गिरने की आशंका बढ़ जाएगी। इससे आने वाले समय में पेयजल संकट भी गहरा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही कई क्षेत्रों में पानी की समस्या बनी हुई है और यदि प्राकृतिक जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा तो हालात और गंभीर हो जाएंगे।
इसके अलावा ग्राम लिवाली-ए के आसपास स्थित करीब आठ महत्वपूर्ण कुओं पर भी खतरा मंडराने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार इन कुओं पर गांव की पेयजल व्यवस्था और खेती दोनों निर्भर हैं। एक्सप्रेस-वे परियोजना के चलते यदि इन कुओं का अस्तित्व प्रभावित हुआ तो ग्रामीणों के सामने जीवनयापन का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इसी वजह से ग्रामीण लगातार अलाइनमेंट बदलने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने सरकार से आग्रह किया कि एक्सप्रेस-वे के रूट को आबादी क्षेत्र से कम से कम 500 मीटर दूर स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान अलाइनमेंट गांवों को दो हिस्सों में बांट देगा, जिससे लोगों के आवागमन, सामाजिक संपर्क और खेती-किसानी पर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सड़क निर्माण के बाद दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है और गांव की पारंपरिक संरचना पूरी तरह बदल जाएगी।
ज्ञापन में किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। ग्रामीणों ने बताया कि अधिग्रहण की जद में आने वाली अधिकांश जमीन बहुफसली कृषि भूमि है। यह जमीन किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। यदि यह भूमि अधिग्रहित हो गई तो हजारों परिवारों के सामने रोजगार और आय का संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों का कहना है कि उन्हें उचित विकल्प और पुनर्वास की स्पष्ट योजना के बिना भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं है।
उधर भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र में भी एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ग्राम पंचायत ब्रह्मबाद स्थित राजीव गांधी सेवा केंद्र पर आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने परियोजना का विरोध किया। इस जनसुनवाई की अध्यक्षता भूमि अवाप्ति अधिकारी और बयाना एसडीएम दीपक मित्तल ने की। कार्यक्रम में सिंघाड़ा, सिंघानखेड़ा, नयावास, ब्रह्मबाद, खटका, बरौदा, बाबरी, बिरहठा, खेरिया, नारौली और सूपा सहित आसपास के कई गांवों के लगभग 100 प्रभावित ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसानों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए किसानों की उपजाऊ जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। कई किसानों ने कहा कि यदि उनकी जमीन चली गई तो उनके सामने रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं बचेगा।
ब्यावर-भरतपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे राजस्थान की बड़ी सड़क परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है। लगभग 342 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण करीब 14 हजार करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे अजमेर, जयपुर, टोंक, दौसा और सवाईमाधोपुर जिलों से होकर भरतपुर तक पहुंचेगा। परियोजना के तहत ब्यावर के नेशनल हाईवे-58 से शुरू होकर यह मार्ग मसूदा, बांदनवाड़ा, भिनाय, नागोला, केकड़ी, फागी, माधोराजपुरा, टोडारायसिंह, निवाई, लालसोट, निर्झरना और गंगापुर सिटी होते हुए भरतपुर में नेशनल हाईवे-21 से जुड़ेगा।
इस परियोजना के लिए करीब 3175 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। सरकार का दावा है कि एक्सप्रेस-वे बनने से प्रदेश में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, यात्रा का समय कम होगा और औद्योगिक तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और किसानों के हितों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
अब ग्रामीणों की नजर सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि सरकार अलाइनमेंट में बदलाव को लेकर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले समय में यह विरोध और बड़ा रूप ले सकता है।


