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सीकर में NEET 2026 पेपर लीक की आशंका से मचा हड़कंप

सीकर में NEET 2026 पेपर लीक की आशंका से मचा हड़कंप

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। राजस्थान के सीकर जिले से सामने आए एक मामले ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि परीक्षा से करीब एक दिन पहले छात्रों के बीच बांटे गए ‘गेस पेपर्स’ में शामिल कई सवाल असली परीक्षा में हूबहू पूछे गए। इस सूचना के सामने आते ही प्रशासनिक और जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड की टीमें सक्रिय हो गई हैं।

घटनाक्रम की शुरुआत परीक्षा के तुरंत बाद हुई, जब कुछ छात्रों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। छात्रों का आरोप था कि 2 मई की रात को कुछ प्रश्न पत्र सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से वायरल हुए थे, जिनमें फिजिक्स और बायोलॉजी विषयों के कई सवाल वास्तविक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे। छात्रों का कहना था कि प्रश्नों का पैटर्न और भाषा तक लगभग समान थी, जिससे उन्हें पेपर लीक की आशंका हुई।

जानकारी के अनुसार, छात्रों ने सबसे पहले उद्योग नगर थाना में शिकायत दी, लेकिन शुरुआती स्तर पर स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत सूचना देने के बजाय छात्रों से मोबाइल जमा कराने की बात कहकर मामले को टालने का प्रयास किया। इससे नाराज छात्रों ने सीधे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी और वायरल गेस पेपर से जुड़े स्क्रीनशॉट तथा अन्य सबूत साझा किए।

मामला जब एनटीए तक पहुंचा तो एजेंसी ने इसे गंभीर मानते हुए राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा से संपर्क किया। इसके बाद राज्य स्तर पर जांच तेज कर दी गई। डीजीपी के निर्देश पर एटीएस और एसओजी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीकर में मोर्चा संभाल लिया। जांच टीम में एडीजी विशाल बंसल, आईजी अजयपाल लांबा और एडीजीपी दिनेश एमएन जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियों ने सीकर के कोचिंग हब माने जाने वाले पिपराली रोड और नवलगढ़ रोड स्थित कई हॉस्टलों और कोचिंग संस्थानों में छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार अब तक लगभग आठ संदिग्ध छात्रों और अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य केंद्र उस ‘गेस पेपर’ का स्रोत तलाशना है, जो कथित तौर पर परीक्षा से करीब 12 घंटे पहले छात्रों तक पहुंचा था। एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह केवल कोचिंग संस्थानों तक सीमित मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

सीकर लंबे समय से देश के प्रमुख कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है, जहां हर साल हजारों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक की आशंका सामने आने से छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं और ऐसे मामलों से पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

राजस्थान में इससे पहले भी कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाएं विवादों में रह चुकी हैं। पिछले कुछ वर्षों में रीट-2021, पटवारी भर्ती, जेईएन भर्ती, लाइब्रेरियन भर्ती और एसआई भर्ती परीक्षा जैसे मामलों में पेपर लीक और नकल गिरोहों के खुलासे ने राज्य की परीक्षा प्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। अब NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती गड़बड़ियां केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों के भविष्य और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती हैं। जब मेहनत करने वाले छात्रों को यह महसूस होता है कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, तो उनके भीतर निराशा और असुरक्षा की भावना बढ़ती है। यही कारण है कि NEET जैसे मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी मानी जा रही है।

फिलहाल प्रवीण नायक नूनावत की ओर से मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। हालांकि एसओजी और एटीएस की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि जांच एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं किया गया तो भविष्य में भी राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर खतरा बना रह सकता है।

जांच एजेंसियां अब डिजिटल सबूतों, सोशल मीडिया चैट, मोबाइल रिकॉर्ड और संदिग्ध छात्रों के संपर्कों की भी जांच कर रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल छात्रों और अभिभावकों की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि इस पूरे मामले का असर लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

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