राजस्थान में इन दिनों यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्माया हुआ है। प्रदेशभर में ब्लॉक स्तर से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया जारी है और इसी चुनाव के जरिए यह भी तय होना है कि आने वाले समय में राजस्थान यूथ कांग्रेस की कमान किस नेता के हाथों में जाएगी। इस बार के चुनाव कई मायनों में खास माने जा रहे हैं, क्योंकि संगठनात्मक बदलावों के साथ-साथ मेंबरशिप प्रक्रिया और शुल्क संरचना में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। इन बदलावों का असर चुनावी माहौल और संगठन की आर्थिक स्थिति दोनों पर साफ दिखाई दे रहा है।
राजस्थान यूथ कांग्रेस चुनाव में इस बार सदस्यता शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया गया है। संगठन का मानना है कि इस बदलाव के बावजूद युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ, बल्कि बड़ी संख्या में युवा सदस्यता लेकर चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। कांग्रेस संगठन के भीतर इसे युवाओं के बढ़ते भरोसे और राजनीतिक सक्रियता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया के शुरुआती आंकड़े भी यही संकेत दे रहे हैं कि यूथ कांग्रेस के लिए यह अभियान केवल संगठनात्मक चुनाव नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर फंड जुटाने का माध्यम भी बन गया है।
अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में यूथ कांग्रेस चुनाव के लिए कुल 17 लाख 93 हजार 604 वोट डाले जा चुके हैं। इसका मतलब है कि इतने युवा सदस्य संगठन से जुड़ चुके हैं। इनमें से 12 लाख 76 हजार 351 सदस्यों ने अपनी सदस्यता फीस का भुगतान भी कर दिया है, जबकि करीब 5 लाख 17 हजार 253 सदस्यों का भुगतान अभी बाकी बताया जा रहा है। यदि भुगतान किए गए आंकड़ों के आधार पर गणना की जाए तो यूथ कांग्रेस ने कुछ ही दिनों में करीब 9 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक का फंड एकत्र कर लिया है। यह राशि प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्ष कांग्रेस पार्टी को पूरे साल में राजस्थान से लगभग 25 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला था, जबकि यूथ कांग्रेस ने संगठनात्मक चुनावों के जरिए कुछ ही दिनों में बड़ी रकम जुटा ली है। इससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस संगठन अब डिजिटल सदस्यता और चुनावी प्रक्रिया के जरिए आर्थिक रूप से खुद को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
यूथ कांग्रेस चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया 21 तारीख से शुरू हुई थी, लेकिन शुरुआती दिनों में तकनीकी समस्याएं सामने आईं। संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार ऐप पर साइबर अटैक की वजह से दो से तीन दिन तक चुनाव प्रक्रिया प्रभावित रही। इसके चलते कई कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में तकनीकी टीम ने स्थिति को नियंत्रित किया और चुनाव प्रक्रिया दोबारा सुचारू रूप से शुरू कर दी गई।
चुनाव के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों और साइबर अटैक के अलावा हेराफेरी के आरोप भी लगातार सामने आ रहे हैं। कई उम्मीदवारों ने दावा किया है कि ऐप के जरिए बल्क वोटिंग करवाई जा रही है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए यह भी दावा किया कि इस मामले की शिकायत पुलिस और डीजीपी कार्यालय तक पहुंचाई गई है। इन आरोपों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
यूथ कांग्रेस से जुड़े नेताओं का कहना है कि संगठन इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। संगठन के नेता Deshraj ने कहा कि सदस्यता शुल्क बढ़ने के बावजूद युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। उनके अनुसार बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ना चाहते हैं और यही वजह है कि वे सक्रिय रूप से चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में वोटिंग का प्रतिशत और तेजी से बढ़ सकता है, क्योंकि अभी भी मतदान के लिए लगभग 12 दिन का समय बाकी है।
राजस्थान की राजनीति में यूथ कांग्रेस चुनाव हमेशा से महत्वपूर्ण माने जाते रहे हैं, क्योंकि यहीं से भविष्य के कई बड़े राजनीतिक चेहरे उभरते हैं। प्रदेश अध्यक्ष का पद विशेष रूप से चर्चा में रहता है, क्योंकि यह संगठन में युवा नेतृत्व की दिशा तय करता है। इस बार भी कई युवा नेता प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सक्रिय बताए जा रहे हैं और उनके समर्थक प्रदेशभर में सदस्यता अभियान को तेज करने में जुटे हुए हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यूथ कांग्रेस के ये चुनाव केवल संगठनात्मक प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी हैं। बड़ी संख्या में युवाओं को संगठन से जोड़ने की कोशिश कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। दूसरी ओर साइबर अटैक और गड़बड़ी के आरोप संगठन की छवि पर असर डाल सकते हैं, इसलिए कांग्रेस नेतृत्व के सामने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है।


